
नागपुर/नई दिल्ली: भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जहाँ अभिव्यक्ति की आज़ादी एक मौलिक अधिकार है, वहीं एक दलित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर मुकेश मोहन इन दिनों भारी कानूनी और मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से जुड़ी एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट पर वीडियो बनाने के बाद, उन्हें 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस मिला है और महाराष्ट्र पुलिस की जांच का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरी कार्रवाई ने सोशल मीडिया पर स्वतंत्र पत्रकारों और इन्फ्लुएंसर्स के अधिकारों पर एक नई बहस छेड़ दी है।
मुकेश मोहन ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर 26 और 27 मार्च को अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रसिद्ध पत्रिका 'द कारवां' (The Caravan) की एक रिपोर्ट पर आधारित एक वीडियो बनाया था।
यह रिपोर्ट 'रेंबल एग्रो एंड फूड्स' (Rembal Agro and Foods) नामक एक गोमांस (बीफ) निर्यातक कंपनी और गडकरी परिवार के व्यापारिक साम्राज्य के बीच कथित संबंधों पर आधारित थी। द कारवां की रिपोर्ट के अनुसार:
रेंबल एग्रो का 'सियान एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर' (Cian Agro Industries and Infrastructure) के साथ गहरा संबंध है, जो नितिन गडकरी के व्यापारिक साम्राज्य की प्रमुख कंपनी है।
सियान एग्रो के प्रबंध निदेशक नितिन गडकरी के बेटे निखिल गडकरी हैं।
रेंबल के कई शेयरधारकों और निदेशकों को गडकरी परिवार द्वारा समर्थित कंपनियों द्वारा वित्त पोषित किया गया था।
रेंबल को समृद्धि को-ऑपरेटिव बैंक से भी बड़े लोन मिले हैं, जिसकी अध्यक्ष नितिन गडकरी की पत्नी कंचन गडकरी हैं।
रेंबल के प्रबंध निदेशक महेशकुमार बालकृष्ण पिल्लई पहले 'सियान कैपिटल' के निदेशक थे।
मुकेश मोहन ने अपने वीडियो में इन्हीं तथ्यों को जनता के सामने रखा था। इसके परिणामस्वरूप, उन्हें एक कानूनी नोटिस भेजा गया है जिसमें 50 करोड़ रुपये (Rs. 50,00,00,000/-) के हर्जाने की मांग की गई है और 24 घंटे के भीतर सभी प्लेटफार्मों से सामग्री हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है।
द मूकनायक से बात करते हुए मुकेश ने बताया कि उन्होंने 2021 में अपने मौसी के लड़के (घनश्याम डोलिया) के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके अपना इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया था। इसी वजह से पुलिस ने साइबर पुलिस स्टेशन, नागपुर शहर की ओर से घनश्याम डोलिया को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 35(3) के तहत नोटिस भेजकर तलब किया है।
मुकेश मोहन ने द मूकनायक को बताया कि, "मैंने अपनी इन्स्टाग्राम आईडी 2021 में अपने मौसी के लड़के के मोबाइल नंबर का यूज करके बनाया था, इसलिए इस मामले में अब उसे भी खींचा जा रहा है. पुलिस ने उसके मोबाइल फोन को भी जब्त करने के लिए फोन मांगा है."
"यह जो नोटिस मिला है वह मेरे मौसी के लड़के को मिला था. लेकिन पुलिस के सामने पेश होने के लिए हम दोनों साथ आए थे. क्योंकि मुझे पता था कि ये (मौसी का लड़का) सरकारी सर्विस में हैं इसलिए इसे परेशान करेंगे. इसलिए मैं इसके साथ आया था. तब मुझे पता चला कि मेरे खिलाफ FIR हुई है, और जो मैंने बीफ वाला वीडियो किया था उसपर हुई है," मुकेश ने बताया.
द मूकनायक से मुकेश ने उनके खिलाफ FIR दर्ज होने की बात भी बताई है, लेकिन उनके पास FIR की कॉपी नहीं है.
तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि मुकेश मोहन एक बड़े कानूनी प्रताड़ना का सामना कर रहे हैं। उन्हें 'द कारवां' की बीफ रिपोर्ट वाले वीडियो के लिए 50 करोड़ का मानहानि नोटिस मिला है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें आशंका है कि नागपुर पुलिस उन्हें एक वीडियो को लेकर दर्ज की गई आपराधिक FIR (Crime No. 22/2026) के सिलसिले में परेशान कर रही है।
बहरहाल, यह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे राजनीतिक हस्तियों की आलोचना करने पर एक आम नागरिक को चौतरफा कानूनी मुकदमों और पुलिसिया पूछताछ के चक्रव्यूह में फंसा दिया जाता है, जिससे अंततः अभिव्यक्ति की आज़ादी "रेस्ट इन पीस" (Rest in Peace) होने के कगार पर पहुँच जाती है।
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