
अहमदाबाद: गुजरात के मेहसाणा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दलित परिवार को शादी की रस्में बीच में ही रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा। कथित तौर पर सवर्ण दरबार समुदाय के दो लोगों ने दूल्हे के घोड़ी चढ़ने पर कड़ी आपत्ति जताई और बारात को आगे नहीं बढ़ने दिया।
इस घटना को लेकर विजापुर तालुका की लाडोल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस ने माडी गांव के रहने वाले युवराज सिंह चौहान और निकुल सिंह चौहान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली है।
यह शिकायत 26 वर्षीय भाविक रावत ने दर्ज कराई है। भाविक ने आरोप लगाया है कि रविवार सुबह उनके छोटे भाई मयंक रावत की बारात निकाली जा रही थी। तभी आरोपियों ने रास्ता रोक लिया और परिवार के सदस्यों को जातिसूचक गालियां दीं। उन्होंने यह भी धमकी दी कि अगर बारात आगे बढ़ी तो इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
एफआईआर में दी गई जानकारी के अनुसार, रावत परिवार ने अपनी पारंपरिक रस्मों के तहत बारात का आयोजन किया था। दूल्हा घोड़ी पर सवार था और रिश्तेदार, ग्रामीण तथा बैंड-बाजे वाले खुशी से झूम रहे थे। गांव में घूमने के बाद इस बारात को शादी के मुख्य समारोह के लिए अहमदाबाद रवाना होना था।
पुलिस का कहना है कि यह विवाद रविवार सुबह करीब 10 बजे गांव की डेयरी के पास हुआ। आरोपी कथित तौर पर विवाह के जश्न में शामिल भीड़ में घुस गए और एक दलित दूल्हे के घोड़ी पर बैठकर गांव में बारात निकालने का सख्त विरोध करने लगे।
शिकायत में यह भी बताया गया है कि आरोपियों ने दावा किया कि इस तरह से शान से बारात निकालने का अधिकार केवल दरबार समुदाय के लोगों को ही है। इसके बाद उन्होंने सरेआम परिवार के साथ जातिगत दुर्व्यवहार शुरू कर दिया।
भाविक ने अपने बयान में आगे बताया कि आरोपियों ने उनके भाई यानी दूल्हे को धक्का दिया और उसके साथ हाथापाई की। जब भाविक बीच-बचाव करने गए, तो उन पर भी हमला किया गया। परिवार का दावा है कि आरोपियों ने जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि अगर बारात आगे बढ़ी तो किसी को भी जिंदा गांव से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।
इस अचानक हुए हमले और धमकियों से रिश्तेदारों और मेहमानों में भारी दहशत फैल गई। मजबूर होकर दूल्हे के परिवार को बीच रास्ते में ही अपनी बारात रोकनी पड़ी। इसके बाद शादी वाले परिवार के सदस्य चुपचाप अहमदाबाद के लिए निकल गए, जहां बिना किसी और हंगामे के विवाह समारोह संपन्न हुआ।
शादी-ब्याह में घोड़ी चढ़ना सामाजिक दर्जे और समानता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इसी बात को लेकर राज्य के कई गांवों में दलित परिवारों को अक्सर ऐसे ही कड़वे टकरावों का सामना करना पड़ता है।
मेहसाणा के सामाजिक कार्यकर्ता कौशिक परमार ने इस घटना पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह मामला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि संवैधानिक सुरक्षा और जातिगत भेदभाव के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधानों के बावजूद दलित परिवारों को आज भी गहरे सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और इस पूरी घटना की जांच की जा रही है।
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