
कन्नूर (केरल): केरल की दिवंगत दलित कार्यकर्ता और मशहूर ऑटोरिक्शा चालक चित्रलेखा के निधन को अभी कुछ ही समय बीता है कि अब उनके परिवार के सिर से छत छिनने का खतरा मंडराने लगा है। कन्नूर के कट्टमपल्ली कुथिराथडम स्थित उनके घर पर 'कन्नूर को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक' ने जब्ती (Foreclosure) का नोटिस चस्पा कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस नीत प्रबंधन समिति द्वारा संचालित इस बैंक ने परिवार को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे 7 दिसंबर तक घर खाली कर दें। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो 18 दिसंबर को बैंक घर को अपने कब्जे में ले लेगा। बैंक अधिकारियों ने थलासेरी कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए 24 नवंबर को चित्रलेखा के घर पर यह नोटिस तामील कराया था।
चित्रलेखा के पति एम. श्रीकांत ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए बताया कि उनका परिवार पहले से ही गरीबी, बेरोजगारी और बीमारियों से जूझ रहा है। अब घर छिनने के डर ने उनके भविष्य को अधर में लटका दिया है।
कर्ज का जाल और ब्याज का बोझ
रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार की यह मुसीबत अगस्त 2016 में लिए गए 5 लाख रुपये के लोन से शुरू हुई। यह लोन कन्नूर के पूर्व मेयर टी.ओ. मोहनन के माध्यम से व्यवस्थित कराया गया था। परिवार का कहना है कि उन्होंने डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा चुका दिए थे, लेकिन अक्टूबर 2024 में चित्रलेखा के आकस्मिक निधन और अन्य पारिवारिक संकटों के कारण बकाया राशि बढ़ती चली गई।
बैंक का दावा है कि ब्याज मिलाकर अब कुल बकाया राशि 9 लाख रुपये हो गई है। हालांकि, बैंक के वर्तमान चेयरमैन और डीसीसी महासचिव राजीवन एलायावूर ने पहले कथित तौर पर परिवार को भरोसा दिलाया था कि कर्ज का निपटारा 6 लाख रुपये में कर दिया जाएगा। लेकिन इसके बावजूद जिला सत्र न्यायालय के माध्यम से जब्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
संघर्ष से मिली थी जमीन, अब कानूनी पेंच में फंसी
कुथिराथडम में जिस पांच सेंट जमीन पर यह घर बना है, उसके पीछे चित्रलेखा का लंबा संघर्ष छिपा है। कन्नूर कलेक्ट्रेट और सचिवालय के सामने 200 दिनों के लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद, 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने उन्हें यह जमीन आवंटित की थी।
हालाँकि, बाद में आई एलडीएफ सरकार ने जमीन और 5 लाख रुपये के आवास अनुदान दोनों को रद्द कर दिया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, जून 2024 में केरल उच्च न्यायालय ने उन्हें जमीन वापस दिलाई। विडंबना यह रही कि इसके चार महीने बाद ही चित्रलेखा का निधन हो गया।
बेचना चाहते हैं घर, मगर नियम आ रहे आड़े
श्रीकांत पैर में चोट के कारण काम करने में असमर्थ हैं। वे अपने बेटे मनु और दो पोतों के साथ घोर गरीबी में जी रहे हैं। परिवार कर्ज चुकाने के लिए घर बेचने को तैयार है और खरीदार भी उपलब्ध हैं। लेकिन, कानूनी प्रावधानों के अनुसार, आवंटन के 12 साल पूरे होने से पहले जमीन को बेचा नहीं जा सकता।
परिवार ने इस नियम में छूट के लिए राजस्व आयुक्त (Revenue Commissioner) के पास आवेदन किया है, जो फिलहाल विचाराधीन है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन और बैंक इस परिवार की लाचारी को समझते हुए कोई रियायत देते हैं या उन्हें बेघर होना पड़ेगा।
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