गौरव का पल: बाबासाहब को UNESCO का सलाम! संविधान दिवस पर पेरिस में चमकी अम्बेडकर प्रतिमा

गांधी के बाद आंबेडकर पहले भारतीय नेता हैं जिन्हें पेरिस में यह सम्मान प्राप्त हुआ है। इससे पहले आंबेडकर की प्रतिमाएं संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (न्यूयॉर्क), ब्रिटिश संसद और कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्थापित की जा चुकी हैं।
पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में लगी बाबा साहब की कांस्य प्रतिमा
पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में लगी बाबा साहब की कांस्य प्रतिमाImage: X
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नई दिल्ली/पेरिस– भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकार और सामाजिक न्याय के प्रणेता डॉ. भीमराव आंबेडकर की कांस्य प्रतिमा का अनावरण मंगलवार को पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में किया गया। यह अनावरण भारत के संविधान दिवस (26 नवंबर) के अवसर पर हुआ, जो संविधान सभा द्वारा 1949 में संविधान को अपनाए जाने की 75वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। यह घटना न केवल भारत के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि वैश्विक स्तर पर आंबेडकर के विचारों को मान्यता प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

यूनेस्को के 'पीस गार्डन' (शांति उद्यान) में आयोजित इस समारोह में भारत के स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा ने प्रतिमा का औपचारिक अनावरण किया। समारोह में यूनेस्को महानिदेशक खालिद अल-एनानी सहित वरिष्ठ राजनयिक और अधिकारी उपस्थित थे। प्रतिमा महाराष्ट्र सरकार द्वारा उपहार में दी गई है, जो आंबेडकर के जन्मस्थान महाराष्ट्र से जुड़ी है। यह कांस्य प्रतिमा प्रसिद्ध मूर्तिकार नरेश कुमावत द्वारा निर्मित है।

प्रतिमा के आधार पर एक पट्टिका लगाई गई है, जिसमें लिखा है: "भारतीय संविधान के शिल्पकार, 70 वर्ष (1950-2025) भारतीय संविधान के"। यह प्रतिमा अब महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला और मार्टिन लूथर किंग जूनियर की प्रतिमाओं के साथ यूनेस्को के शांति उद्यान में विराजमान है। गांधी के बाद आंबेडकर पहले भारतीय नेता हैं जिन्हें पेरिस में यह सम्मान प्राप्त हुआ है। इससे पहले आंबेडकर की प्रतिमाएं संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (न्यूयॉर्क), ब्रिटिश संसद और कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्थापित की जा चुकी हैं।

प्रधानमंत्री नरेश मोदी ने इस अनावरण को "उपयुक्त श्रद्धांजलि" बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया: "आज संविधान दिवस पर पेरिस के यूनेस्को मुख्यालय में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण होना अत्यंत गौरव का विषय है। यह डॉ. आंबेडकर और हमारे संविधान निर्माण में उनकी भूमिका के प्रति एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है। उनके विचार और आदर्श दुनिया भर में असंख्य लोगों को शक्ति और आशा प्रदान करते हैं।" उन्होंने भारतीय मिशन को बधाई दी और आंबेडकर के जीवन को "अरबों लोगों के लिए गरिमा और समानता की खोज का प्रेरणास्रोत" बताया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे महाराष्ट्र और भारत के लिए गौरवपूर्ण क्षण करार देते हुए कहा: "महामानव भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा, जो महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तुत की गई, का संविधान दिवस पर पेरिस के यूनेस्को मुख्यालय में अनावरण होना एक ऐतिहासिक पल है। बाबासाहेब ने अपनी बुद्धि और प्रतिभा से दुनिया को समानता, भाईचारे और सामाजिक परिवर्तन का दिशा-निर्देश दिया। यह अनावरण दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संविधान के प्रति सर्वोच्च सम्मान है।" उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और अन्य अधिकारियों को बधाई दी तथा महाराष्ट्र की जनता की ओर से आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की।

भारत के यूनेस्को राजदूत विशाल वी. शर्मा ने कहा: "यह भारत के लिए गर्व का क्षण है कि आंबेडकर की प्रतिमा अब यूनेस्को मुख्यालय को सुशोभित कर रही है।" उन्होंने आंबेडकर के सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आजीवन संघर्ष और समानता, न्याय, स्वतंत्रता तथा भाईचारे के दृष्टिकोण पर जोर दिया, जो वैश्विक स्तर पर हाशिए पर पड़े समुदायों को प्रेरित करता है।

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