छत्तीसगढ़: दिनांक 15 सितंबर को रायपुर स्थित जिसा (XISA) सेंटर में नफरती भाषण, घृणा अभियान और लक्षित हिंसा के खिलाफ एक राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस साझा प्रयास के तहत कारवां ए मोहब्बत के राष्ट्रीय संयोजक हर्षमंदर के हाथों और फैक्ट-फाइंडिंग टीम की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ के कोसा में हुए एक दलित युवक की हत्या पर विस्तृत रिपोर्ट रिलीज़ की गई। यह बहु-सांगठनिक रिपोर्ट जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला थाना अंतर्गत हुई एक नृशंस प्रतिष्ठा आधारित हत्या (ऑनर किलिंग) के काले सच को सामने लाती है।
यह रूह कंपा देने वाली घटना जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसा की है, जहां 27 जून 2026 की रात को 25 वर्षीय दलित युवक अमित कुमार भंडारी अचानक लापता हो गया था। दो दिन बाद, 29 जून 2026 को गांव के अमहा तालाब के पास एक निर्जन बाड़ी में उसका शव औंधे मुंह पड़ा मिला। मृतक के सिर और सीने पर घातक चोटों और बर्बरता के स्पष्ट निशान थे, जो एक सुनियोजित हत्या की गवाही दे रहे थे।
स्वतंत्र जांच दल की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट के अनुसार, इस हत्या के मूल में एक अंतरजातीय प्रेम प्रसंग था। मृतक अमित भंडारी (सतनामी समाज) का गांव की ही एक क्षत्रिय युवती संतोषी सिंह के साथ पिछले सात-आठ सालों से प्रेम संबंध था। इस रिश्ते से नाराज होकर लड़की के परिजनों ने पहले भी अमित को धमकियां दी थीं। यह नृशंस हत्या समाज में व्याप्त उच्च वर्णीय वर्चस्व और दलितों के प्रति हिंसक सामंती मानसिकता का सीधा परिणाम थी।
रिपोर्ट ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और उनके जातीय पूर्वाग्रहों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। घटना के बाद दो महीनों तक पुलिस असली दोषियों को बचाने और मामले की लीपापोती करने की कोशिश करती रही। मुलमुला थाने की पुलिस और साइबर सेल ने मृतक के बड़े भाई अमृत भंडारी, उनकी पत्नी लक्ष्मी और दोस्त विनोद को अवैध हिरासत में रखकर बेरहमी से पीटा। पुलिस ने मृतक की भाभी को चरित्रहीन साबित करने की कोशिश की और उन्हें बिजली का करंट लगाने की धमकी देकर हत्या का झूठा जुर्म कबूल करवाने का दबाव डाला।
दलित अधिकार संगठनों की सक्रियता, फैक्ट-फाइंडिंग टीम के जमीनी दौरे और सोशल मीडिया पर चले सघन अभियान के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा। बढ़ते जन-दबाव के चलते पुलिस कप्तान को मजबूरन एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन करना पड़ा। अंततः 9 सितंबर 2026 को पुलिस ने इस हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए संतोषी सिंह, उसके भाई बजरंग सिंह और पप्पू सिंह क्षत्रिय को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिसिया जांच में यह साबित हुआ कि 27 जून की रात संतोषी से मिलने पहुंचे अमित को देखकर बजरंग सिंह ने आपा खो दिया और फावड़े से वार कर उसकी नृशंस हत्या कर दी। इसके बाद पप्पू सिंह और संतोषी ने मिलकर शव को ठिकाने लगाने और पुलिस को गुमराह करने की साजिश रची थी।
इस घटना से जुड़े अन्य तथ्यों और विस्तृत संदर्भों को देखने के लिए नीचे दिए गए "Kosa Words" रिपोर्ट देख सकते हैं।
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