TM Exclusive: UGC विवाद पर कांग्रेस लाइन से हटे नेता! वायरल वीडियो और “सामाजिक न्याय” की राजनीति पर उठे सवाल

भिंड दौरे के बाद अजय सिंह के बयान से शुरू हुई नई बहस, कांग्रेस के भीतर दो अलग विचार से स्थिति गड़बड़ाई!
TM Exclusive: UGC विवाद पर कांग्रेस लाइन से हटे नेता! वायरल वीडियो और “सामाजिक न्याय” की राजनीति पर उठे सवाल
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भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े कानून को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इसकी शुरुआत तब हुई जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह हाल ही में भिंड पहुंचे और वहां कांग्रेस के नए जिला कार्यालय का उद्घाटन किया। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि UGC से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर देश की जनता भ्रम में है और सरकार बिना व्यापक संवाद के फैसले ले रही है।

अजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे फैसले समाज में नई खाई पैदा कर सकते हैं और सरकार को संवेदनशील विषयों पर व्यापक चर्चा करनी चाहिए थी। उनके बयान के बाद यह मुद्दा पुनः राजनीतिक विमर्श का विषय बन गया।

वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद और पार्टी लाइन पर सवाल

इसके पहले कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसमें वे कथित तौर पर UGC नियमों का विरोध कर रहे समूह के लोगों से बातचीत करते हुए कहते सुनाई देते हैं कि वे उनके साथ खड़े हैं और ऐसे फैसलों को सहन नहीं किया जाएगा।

वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या कांग्रेस का आधिकारिक रुख वही है जो उसके नेता सार्वजनिक रूप से बोल रहे हैं, या फिर यह व्यक्तिगत बयान हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस वीडियो ने कांग्रेस की घोषित नीति और जमीनी स्तर के राजनीतिक व्यवहार के बीच अंतर को उजागर कर दिया है।

सामाजिक न्याय की राजनीति बनाम जमीनी बयान

कांग्रेस लंबे समय से खुद को सामाजिक न्याय की राजनीति करने वाली पार्टी के रूप में पेश करती रही है। राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के बरिष्ठ नेता, संसद के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार सामाजिक न्याय, समान अवसर और प्रतिनिधित्व की बात करते रहे हैं।

लेकिन जयवर्धन सिंह के वीडियो और अजय सिंह के बयान के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की कथनी और करनी में अंतर दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि यदि पार्टी सच में सामाजिक न्याय की पक्षधर है, तो उसे शिक्षा और प्रतिनिधित्व से जुड़े कानूनों पर स्पष्ट और एकसमान रुख रखना चाहिए।

बहुजन संगठनों का हमला- “दोहरे चरित्र की राजनीति”

इस विवाद पर कई बहुजन संगठनों और दलों ने खुलकर प्रतिक्रिया दी। आजाद समाज पार्टी के बरिष्ठ प्रदेश नेता सुनील अस्तेय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव के समय दलित-आदिवासी-पिछड़े समाज की बात करती है, लेकिन नीतिगत मुद्दों पर उसका रुख बदल जाता है।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी और भीम आर्मी UGC नियमों के समर्थन में हैं और इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय मानती हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस का विरोध यह संकेत देता है कि पार्टी अवसरवाद की राजनीति कर रही है।

बसपा और अन्य दलों की प्रतिक्रिया

बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत पिप्पल ने कहा कि जनता अब राजनीतिक दलों के बयानों और वास्तविक नीतियों के अंतर को समझने लगी है। उनके अनुसार कांग्रेस का सामाजिक न्याय का दावा अब भरोसेमंद नहीं रहा और इसी वजह से बहुजन समाज वैकल्पिक राजनीतिक विकल्प तलाश रहा है।

वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अमान सिंह पोर्ते ने द मूकनायक से कहा कि कांग्रेस को साफ-साफ बताना चाहिए कि वह UGC नियमों के समर्थन में है या विरोध में। उन्होंने कहा कि अस्पष्ट रुख समाज में भ्रम पैदा करता है और इससे दलित-आदिवासी वर्गों का भरोसा कमजोर होता है।

कांग्रेस की तय लाइन से हट रहे नेता?

कांग्रेस में इन दिनों आंतरिक अनुशासन को लेकर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि पार्टी के कुछ नेता लगातार केंद्रीय नेतृत्व की तय राजनीतिक लाइन से अलग बयान देते नजर आ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जब नेता सार्वजनिक मंचों पर पार्टी की आधिकारिक नीति से विपरीत रुख अपनाते हैं और उसके बावजूद उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होती, तो इससे संगठनात्मक संदेश कमजोर पड़ता है और कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बनती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो यह पार्टी की वैचारिक एकरूपता और नेतृत्व की नियंत्रण क्षमता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर सकती है।

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