
नई दिल्ली: राजधानी में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज और हथियारों के इस्तेमाल की अब कड़ी निंदा हो रही है। इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट (IDPD) ने इस घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय गरिमा पर एक गंभीर हमला करार दिया है। संस्था ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन और शॉक बैटन जैसे खतरनाक हथियारों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
आईडीपीडी, जो कि इंटरनेशनल फिज़िशियन्स फॉर प्रिवेंशन ऑफ न्यूक्लियर वॉर (IPPNW) की भारतीय शाखा है, ने 23 जुलाई को जारी अपने बयान में पुलिस की बर्बरता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने कहा है कि छात्रों पर बिना सोचे-समझे किया गया लाठीचार्ज और महिला छात्राओं पर हुए कथित हमले बेहद निंदनीय हैं। संस्था ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के खिलाफ सैन्य शैली के हथियारों की तैनाती लोकतंत्र में पुलिसिंग के खतरनाक सैन्यीकरण को दर्शाती है।
चिकित्सकों के संगठन ने पेलेट गन को भीड़ नियंत्रण का नहीं, बल्कि शरीर को स्थायी नुकसान पहुंचाने वाला हथियार बताया है। आईडीपीडी के अनुसार, सबसे पहले श्रीनगर में आम लोगों पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की गई इन पेलेट गन से हमेशा के लिए अंधापन, आंखों में गंभीर चोटें और चेहरे पर फ्रैक्चर जैसी स्थितियां पैदा होती हैं। इसके अलावा गहरे घाव, विकलांगता और जीवन भर का मनोवैज्ञानिक असर भी इसका एक भयानक परिणाम है।
निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर ऐसे हथियारों का इस्तेमाल चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह अक्षम्य है। यह बल और आग्नेयास्त्रों के उपयोग पर 1990 के संयुक्त राष्ट्र के बुनियादी सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। साथ ही, यह कानून प्रवर्तन में कम-घातक हथियारों पर 2020 के संयुक्त राष्ट्र मार्गदर्शन के भी खिलाफ है, जो ऐसे अंधाधुंध और असंगत बल प्रयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है।
संस्था ने प्रदर्शनकारियों पर शॉक बैटन के कथित इस्तेमाल को भी उतना ही खतरनाक बताया है। इन हथियारों से हृदय संबंधी अतालता (कार्डियक एरिथमिया), गंभीर जलन और तंत्रिका संबंधी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। झटके के कारण गिरने से फ्रैक्चर और गहरे मनोवैज्ञानिक नुकसान का खतरा भी लगातार बना रहता है।
इन भयावह परिणामों को देखते हुए आईडीपीडी ने भीड़ नियंत्रण के लिए पेलेट गन और अन्य अविवेकी हथियारों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही, संस्था ने महिला छात्रों पर यौन उत्पीड़न के आरोपों सहित पुलिस की पूरी हिंसक कार्रवाई की निष्पक्ष न्यायिक जांच की आवश्यकता पर भी बल दिया है।
अपने बयान के अंत में संगठन ने एक कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि कोई भी लोकतंत्र शांतिपूर्ण विरोध का जवाब ऐसे क्रूर हथियारों से नहीं दे सकता। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में उन हथियारों की कोई जगह नहीं है जो अपने ही नागरिकों को दृष्टिहीन, विकलांग और आतंकित करते हों।
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