
भोपाल। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग पर कुछ दिन पहले एक युवक को गोली मारने का आरोप लगा था। इस घटना में गंभीर रूप से घायल हुए मोतीलाल कुशवाहा ने अब पहली बार द मूकनायक से बातचीत में पूरे घटनाक्रम का अपना पक्ष रखा है। मोतीलाल का दावा है कि यह हमला किसी व्यक्तिगत रंजिश का नहीं, बल्कि बागेश्वर धाम के प्रस्तावित गुरुकुलम की जमीन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद का परिणाम था। उनका कहना है कि गुरुकुलम से लगी जमीन को खरीदने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था और इसी विवाद के चलते यह हिंसक घटना हुई।
द मूकनायक की टीम छतरपुर जिले के गढ़ा गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित कोड़ा गांव पहुंची, जहां घायल मोतीलाल कुशवाहा से उनके घर पर मुलाकात की गई। जिस दिन टीम गांव पहुंची, उसी दिन मोतीलाल ग्वालियर के अस्पताल से उपचार कर घर लौटे थे। उनके घर पर परिजनों, रिश्तेदारों और गांव के लोगों की भीड़ लगी हुई थी। बातचीत के दौरान मोतीलाल ने बताया कि फायरिंग में एक गोली उनके पेट में लगी, जबकि दूसरी गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल, फिर बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया।
मोतीलाल कुशवाहा का कहना है कि पूरा विवाद गांव के ही पुष्पेंद्र पांडे और उनके परिवार की लगभग 18 एकड़ जमीन से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि यह जमीन गुरुकुलम के लिए प्रस्तावित भूमि से लगी हुई है। उनके अनुसार, शालिग्राम गर्ग और उनके सहयोगियों द्वारा पांडे परिवार पर जमीन बेचने का दबाव बनाया जा रहा था। जब परिवार ने जमीन बेचने से इनकार किया, तब उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं। मोतीलाल का कहना है कि इसी कारण पांडे परिवार ने राजनगर थाने में शिकायत दी थी और वह स्वयं भी पुष्पेंद्र पांडे के साथ शिकायत दर्ज कराने गए थे। उनका आरोप है कि शिकायत के बाद से ही उन्हें भी निशाना बनाया जाने लगा।
मोतीलाल के अनुसार, शिकायत पत्र देने के लगभग डेढ़ महीने बाद शालिग्राम गर्ग अपने साथियों के साथ कोड़ा गांव पहुँचा था। उनका कहना है कि उस समय पुष्पेंद्र पांडे घर पर नहीं मिले, जिसके बाद आरोपी उनके घर पहुंच गए। वहां पहले गाली-गलौज और मारपीट हुई। जब उन्होंने और उनके परिवार ने इसका विरोध किया, तो आरोप है कि शालिग्राम गर्ग ने अपनी पिस्तौल निकालकर पहले एक हवाई फायर किया और फिर दूसरा फायर सीधे उनकी ओर कर दिया। मोतीलाल का कहना है कि गोली उनके पेट में लगी और दूसरी गोली कान को छूते हुए निकल गई। गोली लगने के बाद वह मौके पर ही गिर पड़े। घटना के बाद आरोपी वहां से फरार हो गए। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें फायरिंग के बाद आरोपी के मौके से भागते हुए दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि गुरुकुलम की जमीन को लेकर लंबे समय से क्षेत्र में तनाव बना हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार, जमीन को लेकर कई बार विवाद और कहासुनी की स्थिति बनी थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि मामला गोलीबारी तक पहुंच जाएगा। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और घायल को अस्पताल पहुंचाया गया।
पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है। प्रारंभिक जांच में पुलिस भी जमीन विवाद के पहलू की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, वायरल वीडियो और अन्य सबूतों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पुलिस अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचेगी और आरोपों की पुष्टि करेगी
घटना के प्रत्यक्षदर्शी और घायल मोतीलाल कुशवाहा के छोटे भाई अमन कुशवाहा ने द मूकनायक से बातचीत में दावा किया कि फायरिंग की पूरी घटना उनकी आंखों के सामने हुई। उनके अनुसार, शालिग्राम गर्ग पहले उनके घर पहुंचा, जहां कहासुनी और मारपीट के दौरान उसने सबसे पहले एक हवाई फायर किया। इसके बाद उसने सामने से मोतीलाल कुशवाहा पर गोली चला दी, जिससे गोली उनके पेट में लगी और वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। अमन ने बताया कि घटना के तुरंत बाद पुलिस को सूचना दी गई और पुलिस मौके पर पहुंची। उनका आरोप है कि उन्होंने स्वयं शालिग्राम गर्ग की फॉर्च्यूनर कार की चाबी और उसका मोबाइल पुलिस को सौंपा था, लेकिन पुलिस ने जब्ती पंचनामा और शिकायत में केवल कार की चाबी का उल्लेख किया, जबकि मोबाइल जब्त किए जाने का जिक्र नहीं किया। अमन का दावा है की मोबाइल में काफी कुव्ह अन्य घटनाओं के वीडियो हो सकते है, वहीं पुलिस इस मामले में पूरी निष्पक्षता से कार्रवाई नहीं कर रही है और शालिग्राम गर्ग को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
अमन कुशवाहा ने यह भी आरोप लगाया कि शालिग्राम गर्ग और उसके सहयोगियों का इलाके में लंबे समय से दबदबा बना हुआ है। उनका कहना है कि स्थानीय लोग उनके प्रभाव और डर के कारण खुलकर सामने नहीं आ पाते। अमन का दावा है कि गुरुकुलम से लगी जमीनों को लेकर ग्रामीणों पर लगातार दबाव बनाया जाता है और कई लोगों को धमकाकर जमीन बेचने के लिए मजबूर किया गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आए दिन लोगों के साथ मारपीट और धमकाने जैसी घटनाएं होती रहती हैं, इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
पांडे परिवार के सदस्य 70 वर्षीय आसाराम पांडे ने द मूकनायक से बातचीत में दावा किया कि उनके परिवार की लगभग 18 एकड़ कृषि भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, यह जमीन बागेश्वर धाम के प्रस्तावित गुरुकुलम से सटी हुई है, जिसके कारण पिछले कई महीनों से शालिग्राम गर्ग लगातार उन पर जमीन बेचने का दबाव बना रहा था। आसाराम पांडे का कहना है कि परिवार ने जमीन बेचने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें कथित रूप से धमकियां मिलने लगीं।
आसाराम पांडे ने बताया कि इसी दबाव और कथित धमकियों से परेशान होकर उनके परिवार ने राजनगर थाने में शिकायत दर्ज की थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ, बल्कि तनाव लगातार बढ़ता गया और आखिरकार इसी विवाद के बीच मोतीलाल कुशवाहा को गोली मारने की घटना हुई। पांडे परिवार का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जमीन विवाद से जुड़े सभी तथ्यों की गहराई से पड़ताल की जानी चाहिए।
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