
रायपुर। सतनामी समाज को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोपी आशुतोष चैतन्य उर्फ बृजमोहन त्रिपाठी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। आशुतोष पर सतनामी समाज को “गाय काटने वाला” और “मूर्ख” कहने का आरोप है, जिस पर उसके खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। इसी मामले से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एक हालिया सुनवाई की लाइव वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आशुतोष चैतन्य को “गुरुजी” कहकर संबोधित कर रहे हैं। इसे लेकर कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस व्यक्ति पर एक विशेष समाज को अपमानित करने का गंभीर आरोप है, उसे अदालत में इस तरह संबोधित करना क्या उचित है? हालांकि, इस पर अब तक न्यायालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर चल रही बहस में कई लोग लिख रहे हैं कि अगर अदालत में किसी आरोपी के प्रति नरमी या विशेष व्यवहार दिखता है, तो आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा डगमगाता है। कुछ पोस्ट में यहां तक कहा जा रहा है कि “क्या ऐसे हालात में पीड़ित पक्ष को न्याय की उम्मीद करनी चाहिए?” हालांकि, ये सभी दावे और आरोप सोशल मीडिया यूजर्स के हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
दूसरी ओर, कुछ लोग इस बहस को एकतरफा और जल्दबाजी में निकाले गए निष्कर्ष बता रहे हैं। उनका कहना है कि अदालत की कार्यवाही के छोटे-छोटे अंश को काटकर या संदर्भ से अलग करके पेश करना सही नहीं है। पूरी सुनवाई, कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक मर्यादा को समझे बिना किसी एक शब्द या संबोधन के आधार पर न्यायपालिका पर सवाल खड़े करना भी ठीक नहीं माना जा सकता।
द मूकनायक से बातचीत में संजीत वर्मन ने कहा कि उनका मकसद किसी तरह का विवाद खड़ा करना नहीं था, बल्कि सिर्फ उस कथावाचक के बयान पर कानूनी कार्रवाई करवाना था, जिसने सतनामी समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने बताया कि कथावाचक ने खुले मंच से समाज को “गाय काटने वाला” और “मूर्ख” कहा, जिससे पूरे समाज की भावना आहत हुई। इसी कारण उन्होंने शांतिपूर्वक आंदोलन कर शिकायत दर्ज कराई और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद कथावाचक के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और वह जेल भी गया।
संजीत वर्मन का आरोप है कि इसके बाद मामला जानबूझकर बिगाड़ा गया। उनके मुताबिक, कथावाचक की गिरफ्तारी के बाद बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के एक स्थानीय पदाधिकारी वहां पहुंचे और उन्होंने विवाद खड़ा कर दिया। इसी हंगामे के दौरान हालात बिगड़े और फिर दोनो पक्षों में विवाद हुआ था, इसलिए यह प्रकरण बना दिया गया। संजीत का कहना है कि अगर बाहरी लोग आकर माहौल खराब न करते तो यह मामला वहीं खत्म हो सकता था।
कोर्ट की कार्यवाही को लेकर संजीत वर्मन ने कहा कि उन्हें अदालत से निष्पक्ष और संवैधानिक व्यवहार की उम्मीद थी, लेकिन सुनवाई के दौरान जो रवैया अपनाया गया, वह उन्हें संविधान की भावना के अनुरूप नहीं लगा। उन्होंने कहा कि वे किसी से विशेष व्यवहार नहीं चाहते थे, सिर्फ न्याय चाहते थे।
गौरतलब है कि आशुतोष चैतन्य उर्फ बृजमोहन त्रिपाठी पर बिलासपुर के तखतपुर में कथा के दौरान सतनामी समाज को लेकर कथित आपत्तिजनक बयान देने का आरोप है, जिसे लेकर समाज में आक्रोश देखा गया था।
जानकारी अनुसार कथावाचक आशुतोष चैतन्य ने सतनामी समाज को मूर्ख कहकर गाय काटने वाला बताया था, जिसके बाद समाज के लोगों ने शिकायत की और इसी के बाद एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ और उसे जेल भी भेजा गया। इस पूरे प्रकरण में संजीत बर्मन और अमृत डहरिया की भूमिका को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
फिलहाल, यह पूरा विवाद सोशल मीडिया तक सीमित है, जहां अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। एक तरफ लोग न्याय को लेकर चिंता जता रहे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ लोग इसे गलत तरीके से पेश किया गया मामला बता रहे हैं।
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