एमपी के इंदौर में जल संकट पर फूटा जनता का गुस्सा! शहर के कई चौराहों पर चक्काजाम, घंटों थमी रफ्तार

भीषण गर्मी के बीच पानी के लिए सड़कों पर उतरे लोग, कांग्रेस पार्षदों के नेतृत्व में उग्र प्रदर्शन, प्रशासन ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
एमपी के इंदौर में जल संकट पर फूटा जनता का गुस्सा! शहर के कई चौराहों पर चक्काजाम, घंटों थमी रफ्तार
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भोपाल। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर इन दिनों भीषण गर्मी और गहराते जल संकट से जूझ रही है। पानी की भारी किल्लत से परेशान जनता का गुस्सा रविवार को सड़कों पर फूट पड़ा, जब शहर के अलग-अलग इलाकों में कांग्रेस पार्षदों के नेतृत्व में हजारों रहवासियों ने उग्र प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम कर दिया। तपती धूप के बीच हुए इस विरोध प्रदर्शन ने शहर की रफ्तार थाम दी। कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और सैकड़ों यात्री घंटों तक सिटी बसों और निजी वाहनों में फंसे रहे। आखिरकार नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा तत्काल कार्रवाई और पानी सप्लाई सुधारने के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया।

पालदा और सुखलिया बने विरोध के केंद्र, सड़क पर बैठे रहवासी

रविवार सुबह से ही शहर के दो बड़े केंद्रों पर प्रदर्शनकारियों ने मोर्चा संभाल लिया। पालदा चौराहे पर कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में वार्ड-75 और वार्ड-64 के सैकड़ों लोग सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने खाली बर्तन और मटके लेकर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का कहना था कि कई दिनों से नियमित पानी सप्लाई नहीं हो रही है, जिससे परिवारों के सामने पीने के पानी तक का संकट खड़ा हो गया है।

वहीं दीनदयाल उपाध्याय चौराहे, सुखलिया जोन-5 क्षेत्र में वार्ड-27 के पार्षद राजू भदौरिया के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय रहवासियों ने चक्काजाम किया। प्रदर्शनकारियों ने महापौर और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि क्षेत्र में पहले चल रही निःशुल्क पानी वितरण व्यवस्था बंद कर दी गई है, जिसके कारण गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

घंटों जाम में फंसे रहे यात्री

शहर के प्रमुख चौराहों पर हुए चक्काजाम का असर आम जनजीवन पर भी साफ दिखाई दिया। पालदा और सुखलिया मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सिटी बसों में सफर कर रहे यात्री घंटों तक भीषण गर्मी में फंसे रहे। कई जगह बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ लोग बसों से उतरकर पैदल अपने गंतव्य तक जाते नजर आए।

स्थानीय लोगों का कहना था कि जब तक प्रशासन पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं करेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम की लापरवाही के कारण हर साल गर्मी में हालात बदतर हो जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।

पहले भी हो चुके हैं कई प्रदर्शन

जल संकट को लेकर कांग्रेस और स्थानीय रहवासी इससे पहले भी कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। शहर के सभी 22 जोनल कार्यालयों पर कांग्रेस द्वारा पानी संकट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा चुका है। कई इलाकों में लोग सड़क पर उतरकर धरना और चक्काजाम कर चुके हैं।

हाल ही में बड़ी संख्या में रहवासी “पानी दो-पानी दो” के नारे लगाते हुए पैदल विधायक रमेश मेंदोला के निवास तक पहुंच गए थे। लोगों का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद पानी सप्लाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है।

महिलाओं ने खाली बर्तन लेकर जताया विरोध

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं। महिलाओं ने खाली बाल्टी, घड़े और बर्तन लेकर नगर निगम प्रशासन और महापौर के खिलाफ नारेबाजी की। कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें सुबह से लेकर देर रात तक पानी के लिए इंतजार करना पड़ता है। कई कॉलोनियों में टैंकर कई-कई दिनों तक नहीं पहुंचते, जिससे लोगों को निजी टैंकरों से महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गर्मी बढ़ने के साथ जल संकट और गंभीर हो गया है। जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, उनके लिए पानी खरीदना भी मुश्किल हो गया है।

इंदौर में पानी संकट के तीन बड़े कारण

कांग्रेस पार्षदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, शहर में गहराते जल संकट के पीछे तीन मुख्य कारण जिम्मेदार हैं।

पहला बड़ा कारण कई नई कॉलोनियों और मोहल्लों में नर्मदा जल पाइपलाइन का अब तक नहीं पहुंच पाना है। वार्ड-75 और आसपास के कई क्षेत्रों में लोग आज भी टैंकरों पर निर्भर हैं क्योंकि नगर निगम ने वहां पाइपलाइन नेटवर्क विकसित नहीं किया है।

दूसरा कारण नगर निगम के टैंकरों की भारी कमी बताया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन नहीं है, वहां पानी सप्लाई पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर है, लेकिन पर्याप्त संख्या में टैंकर उपलब्ध नहीं होने के कारण नियमित पानी वितरण प्रभावित हो रहा है।

तीसरा और सबसे गंभीर कारण भूजल स्तर का लगातार गिरना है। भीषण गर्मी के कारण कई इलाकों में बोरिंग सूख चुके हैं। इससे लोगों के पास पानी का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं बचा है और वे पूरी तरह टैंकर सप्लाई पर निर्भर हो गए हैं।

प्रशासन ने दिया आश्वासन, कांग्रेस ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

घंटों चले हंगामे के बाद नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। अधिकारियों ने प्रभावित वार्डों में अतिरिक्त टैंकर भेजने और पानी सप्लाई को नियमित करने का आश्वासन दिया। साथ ही स्थायी समाधान के लिए भी जल्द कदम उठाने की बात कही गई।

हालांकि कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों में हालात नहीं सुधरे और टैंकरों की संख्या नहीं बढ़ाई गई तो कांग्रेस पार्टी शहरव्यापी उग्र आंदोलन करेगी। नेताओं का कहना है कि पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता को लेकर जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो नगर निगम की विफलता को दर्शाता है।

निगम का अनुबंधित टैंकर पानी बेचते पकड़ा गया, 25 हजार का जुर्माना

इसी बीच नगर निगम ने पानी संकट के दौरान बड़ी कार्रवाई भी की है। जोन-18 में उपयंत्री अर्पित मालवीय ने फील्ड निरीक्षण के दौरान अग्रेशन प्रतिमा चौराहे के पास जय मां आराधना इंटरप्राइजेस के ट्रैक्टर-टैंकर क्रमांक MP 67 AB 1494 को एक चिल्ड वॉटर एजेंसी को पानी बेचते हुए पकड़ा।

कार्रवाई करते हुए निगम ने टैंकर-ट्रैक्टर को जब्त कर वर्कशॉप भेज दिया। आयुक्त श्री क्षितिज सिंघल के निर्देश पर संबंधित एजेंसी पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा रहा है। साथ ही टैंकर को भी जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

नगर निगम आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि निगम के अनुबंधित टैंकर निजी तौर पर पानी बेचते पाए गए तो संबंधित एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी अनुबंधित टैंकरों पर निगम का अधिकृत स्टीकर अनिवार्य रूप से लगा हो।

भीषण गर्मी के बीच बढ़ती चिंता

इंदौर में लगातार बढ़ते तापमान और घटते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। शहर के कई इलाकों में पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है जबकि उपलब्ध संसाधन कम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है। फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया है, लेकिन जनता की नाराजगी अब भी बनी हुई है।

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