एमपी में जल संकट बना जानलेवा! रायसेन में पानी भरने गईं तीन आदिवासी छात्राओं की कुएं में डूबकर मौत

भीषण गर्मी और पेयजल संकट के बीच सामने आई दर्दनाक तस्वीर, ग्रामीण बोले- गांव में पानी होता तो नहीं जाती बच्चियों की जान
एमपी में जल संकट बना जानलेवा! रायसेन में पानी भरने गईं तीन आदिवासी छात्राओं की कुएं में डूबकर मौत
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भोपाल। मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ रही गर्मी और गहराते जल संकट ने अब भयावह रूप लेना शुरू कर दिया है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सामने आई दो दर्दनाक घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था को लेकर सरकार और प्रशासन कितने गंभीर हैं। एक ओर रायसेन जिले में पानी भरने गई तीन आदिवासी छात्राओं की कुएं में डूबने से मौत हो गई, वहीं दूसरी ओर छिंदवाड़ा जिले में उभरती कराटे और ताइक्वांडो खिलाड़ी केशिका चौरे की भी कुएं में गिरने से जान चली गई। इन घटनाओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की भयावह स्थिति को उजागर कर दिया है।

रायसेन के सगौर गांव में मातम, पानी भरने गईं तीन मासूम छात्राएं नहीं लौटीं घर

रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के सगौर गांव में शनिवार सुबह उस समय चीख-पुकार मच गई, जब पानी भरने गई चार छात्राओं में से तीन की कुएं में डूबने से मौत हो गई। गांव में लंबे समय से गंभीर पेयजल संकट बना हुआ है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को रोजाना करीब एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ता है। भीषण गर्मी के बीच यही कुआं गांव के लोगों के लिए पानी का एकमात्र सहारा बना हुआ है।

शनिवार सुबह गांव की चार छात्राएं पानी भरने के लिए कुएं पर पहुंची थीं। बताया जा रहा है कि पानी भरने के दौरान वे नहाने लगीं। इसी दौरान एक छात्रा का पैर अचानक फिसल गया और वह गहरे कुएं में जा गिरी। अपनी सहेली को डूबता देख दूसरी छात्रा उसे बचाने के लिए कुएं में कूद गई। कुछ ही क्षणों बाद तीसरी छात्रा ने भी उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन गहरे पानी और तैरना नहीं आने के कारण तीनों की दर्दनाक मौत हो गई।

चौथी छात्रा ने गांव पहुंचकर सुनाई हादसे की जानकारी

घटना के समय चौथी छात्रा अमीना भी वहां मौजूद थी। हादसे के बाद वह घबराकर गांव पहुंची और परिजनों तथा ग्रामीणों को पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद बच्चियों को कुएं से बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने तीनों छात्राओं को मृत घोषित कर दिया।

हादसे में जान गंवाने वाली छात्राओं की पहचान राधा पिता हलके राम (12 वर्ष), अमृता पिता रामगोपाल (12 वर्ष) और तनु पिता हलके राम (13 वर्ष) के रूप में हुई है। राधा और अमृता पांचवीं कक्षा में पढ़ती थीं, जबकि तनु आठवीं कक्षा की छात्रा थी। तनु और राधा सगी बहनें थीं। एक ही परिवार की दो बच्चियों की मौत से गांव में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा गांव सदमे में डूबा हुआ है।

ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी, बोले- पानी की व्यवस्था होती तो बच जातीं बच्चियां

घटना के बाद अस्पताल परिसर में ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लंबे समय से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने कोई स्थायी समाधान नहीं किया। मजबूरी में महिलाएं और बच्चे दूर-दराज के कुओं से पानी भरने जाते हैं, जिससे हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों ने कहा कि यदि गांव में पर्याप्त पेयजल व्यवस्था होती, तो बच्चियों को इतनी दूर पानी भरने नहीं जाना पड़ता और शायद उनकी जान बच सकती थी। लोगों ने प्रशासन से मृतक परिवारों को आर्थिक सहायता देने, गांव में सुरक्षित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

छिंदवाड़ा में उभरती खिलाड़ी केशिका चौरे की मौत ने भी बढ़ाई चिंता

इसी बीच छिंदवाड़ा जिले से भी एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां उभरती कराटे और ताइक्वांडो खिलाड़ी केशिका चौरे की कुएं में गिरने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह पानी से जुड़े काम के दौरान हादसे का शिकार हुई। खेल जगत में अपनी पहचान बना रही केशिका की मौत से इलाके में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में खुले और असुरक्षित कुएं लगातार जानलेवा साबित हो रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे।

जल संकट और असुरक्षित जल स्रोत बन रहे मौत का कारण

मध्य प्रदेश के कई जिलों में इस समय भीषण गर्मी के कारण जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप सूख चुके हैं और लोगों को दूरस्थ जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ऐसे में बच्चे और महिलाएं रोजाना जोखिम उठाकर पानी लाने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षित पेयजल व्यवस्था, जल संरक्षण और खुले कुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में ऐसे हादसे और बढ़ सकते हैं।

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