
भोपाल। मध्यप्रदेश की कानून व्यवस्था पर NCRB के ताजा आंकड़ों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिलाओं, आदिवासियों, बच्चों और कमजोर वर्गों के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि सरकार के उदासीन रवैये और प्रशासनिक ढीलापन के कारण आपराधिक घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उनका आरोप है कि अपराधियों में कानून का डर खत्म होता जा रहा है, जबकि पीड़ितों को समय पर न्याय और सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।
देशभर में अपराध के आंकड़ों को दर्ज करने वाली संस्था (NCRB) की ओर से जारी ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के खिलाफ अपराध के मामलों में मध्य प्रदेश पूरे देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। वहीं महिलाओं के खिलाफ अपराध, दहेज हत्या, बच्चों के खिलाफ अपराध, अपहरण, हत्या और POCSO मामलों में भी प्रदेश देश के शीर्ष राज्यों में शामिल रहा। रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि राज्य में महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा लगातार चुनौती बनी हुई है।
NCRB ने यह रिपोर्ट 6 मई 2026 को जारी की है, जिसमें वर्ष 2024 के अपराध संबंधी आंकड़े शामिल किए गए हैं। सामान्यतः यह रिपोर्ट सितंबर 2025 तक जारी हो जानी चाहिए थी, लेकिन इस बार डेटा सत्यापन और अपराध संबंधी सूचनाओं के मिलान में देरी के कारण रिपोर्ट करीब आठ महीने बाद सामने आई।
रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में वर्ष 2024 के दौरान महिलाओं के खिलाफ कुल 32,832 मामले दर्ज किए गए, जिसके चलते प्रदेश लगातार चौथे वर्ष देश में पांचवें स्थान पर बना रहा। आंकड़ों के मुताबिक राज्य में प्रतिदिन औसतन 90 से अधिक महिला अपराध दर्ज हुए। इनमें दुष्कर्म, दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, अपहरण और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि प्रदेश में हर तीन घंटे में एक दुष्कर्म का मामला दर्ज हो रहा है, जो महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
दहेज हत्या के मामलों में भी मध्य प्रदेश की स्थिति बेहद चिंताजनक रही। NCRB के अनुसार 2024 में प्रदेश में दहेज हत्या के कुल 450 मामले दर्ज किए गए। इनमें 232 मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) और 218 मामले भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत दर्ज हुए। इस श्रेणी में मध्य प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर रहा। उत्तर प्रदेश 2038 मामलों के साथ पहले स्थान पर जबकि बिहार दूसरे स्थान पर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि दहेज प्रथा और महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा की घटनाएं ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गंभीर सामाजिक समस्या बनी हुई हैं।
रिपोर्ट में हत्या और अपहरण के मामलों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। मध्य प्रदेश हत्या और अपहरण दोनों अपराधों में देश में चौथे स्थान पर रहा। हालांकि हत्या के मामलों में पिछले दो वर्षों में कुछ गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में प्रदेश में 1,978 हत्या के मामले सामने आए थे, जो 2023 में घटकर 1,832 और 2024 में 1,813 रह गए। यानी दो वर्षों में हत्या के मामलों में 173 की कमी दर्ज की गई। इसके विपरीत अपहरण के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में राज्य में 10,409 अपहरण के मामले दर्ज हुए थे, जो 2023 में बढ़कर 11,768 और 2024 में 11,847 तक पहुंच गए। इसका अर्थ है कि प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 32 लोगों के अपहरण के मामले दर्ज हो रहे हैं। अपहरण के मामलों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के बाद मध्य प्रदेश चौथे स्थान पर रहा।
अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के खिलाफ अपराध के मामलों में मध्य प्रदेश का देश में पहले स्थान पर पहुंचना सबसे अधिक चिंता का विषय माना जा रहा है। NCRB के अनुसार वर्ष 2024 में प्रदेश में ST समुदाय के खिलाफ 3,165 मामले दर्ज किए गए। वहीं अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के खिलाफ अपराध के 7,765 मामलों के साथ मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा। सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि आदिवासी और दलित समुदायों के खिलाफ हिंसा, जमीन विवाद, सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इनके रोकथाम के लिए प्रभावी कदम अभी भी पर्याप्त नहीं दिखाई दे रहे हैं।
बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में भी मध्य प्रदेश की स्थिति गंभीर बनी हुई है। हालांकि राहत की बात यह रही कि पिछले वर्ष जहां प्रदेश इस श्रेणी में देश में पहले स्थान पर था, वहीं इस बार तीसरे स्थान पर पहुंच गया। NCRB रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 21,908 मामले दर्ज किए गए। इनमें बाल यौन शोषण, अपहरण, बाल विवाह, बाल श्रम और हिंसा जैसे मामले शामिल हैं। POCSO यानी ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्स’ अधिनियम के तहत भी प्रदेश में 3,721 मामले दर्ज किए गए, जिसके चलते मध्य प्रदेश देश में चौथे स्थान पर रहा। इस सूची में तमिलनाडु 5,320 मामलों के साथ पहले, महाराष्ट्र 4,829 मामलों के साथ दूसरे और उत्तर प्रदेश 3,671 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि NCRB की यह रिपोर्ट केवल अपराध के आंकड़े नहीं बल्कि सामाजिक असमानता, महिलाओं की असुरक्षा, कमजोर वर्गों के उत्पीड़न और प्रशासनिक चुनौतियों की भी तस्वीर पेश करती है। लगातार बढ़ते अपराधों ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि अपराध नियंत्रण के लिए केवल सख्त कानून पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, संवेदनशील पुलिसिंग और त्वरित न्याय व्यवस्था की भी आवश्यकता है।
द मूकनायक से बातचीत में कांग्रेस अनुसूचित जनजाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम ने NCRB रिपोर्ट को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग के खिलाफ अपराधों में लगातार बढ़ोतरी होना बेहद चिंताजनक है। प्रदेश का ST अत्याचार के मामलों में देश में पहले स्थान पर पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज आज भी हिंसा, शोषण, जमीन कब्जे और सामाजिक उत्पीड़न का शिकार हो रहा है, लेकिन सरकार संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने में विफल साबित हुई है।
रामू टेकाम ने कहा कि सरकार केवल घोषणाएं और विज्ञापन करने में व्यस्त है, जबकि जमीनी स्तर पर आदिवासी समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के खिलाफ बढ़ते अपराध यह साबित करते हैं कि अपराधियों में कानून का डर खत्म हो चुका है। टेकाम ने मांग की कि आदिवासी अत्याचार के मामलों की विशेष निगरानी हो, फास्ट ट्रैक अदालतों में सुनवाई कर दोषियों को जल्द सजा दी जाए और पीड़ित परिवारों को तत्काल न्याय व सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
द मूकनायक से बातचीत में राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य, संगीता शर्मा ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता जताते हुए कहा कि NCRB की रिपोर्ट मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों की भयावह स्थिति को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगातार बढ़ रहे दुष्कर्म, अपहरण, दहेज हत्या और POCSO के मामले यह साबित करते हैं कि सरकार महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है। संगीता शर्मा ने आरोप लगाया कि अपराधियों में कानून का डर खत्म हो चुका है और पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही
द मूकनायक से बातचीत में आजाद समाज पार्टी के नेता सुनील अस्तेय ने NCRB रिपोर्ट को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा अत्याचार आदिवासी, दलित, महिलाओं और बच्चों पर हो रहे हैं, लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते अपराध यह साबित करते हैं कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। अस्तेय ने आरोप लगाया कि कमजोर वर्गों को सुरक्षा देने में सरकार नाकाम रही है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होने से उनका मनोबल लगातार बढ़ रहा
द मूकनायक से बातचीत में ने NCRB रिपोर्ट को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेता अमान सिंह पोर्ते ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में आदिवासी समाज के खिलाफ बढ़ते अपराध बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में आदिवासी समुदाय पर अत्याचार, हिंसा और शोषण की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई है। पोर्ते ने कहा कि सरकार आदिवासियों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है, जिसके कारण कमजोर वर्ग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
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