आइज़ोल: मिज़ोरम की राजधानी आइज़ोल में मिज़ो शॉर्ट फ़िल्म प्रतियोगिता 2026 का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। राज्य सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और मिज़ोरम फ़िल्म डेवलपमेंट कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में प्रदेश भर से कुल 41 शॉर्ट फ़िल्में प्रदर्शित की गईं। इन फ़िल्मों के माध्यम से मिज़ोरम की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, सामाजिक सरोकार, स्थानीय मुद्दों और युवाओं की सोच की प्रभावशाली झलक दर्शकों को देखने को मिली।
मिज़ोरम को देश के एक प्रमुख आदिवासी बहुल राज्य के रूप में जाना जाता है, जिसकी राजधानी आइज़ोल को अपनी शांति और अनुशासन के लिए ‘साइलेंट सिटी’ का दर्जा प्राप्त है। यहाँ के निवासियों का उच्च सिविक सेंस और ट्रैफिक नियमों का पालन देशभर में मशहूर है, और समाज की यही संवेदनशीलता व चेतना प्रदर्शित फ़िल्मों में भी साफ़ परिलक्षित हुई।
जूरी ने किया 41 फ़िल्मों का मूल्यांकन, ‘मैमिज़ियाल’ को प्रथम पुरस्कार
प्रतियोगिता में प्रदर्शित 41 फ़िल्मों के मूल्यांकन और पुरस्कार चयन के लिए एक विशेष जूरी पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल में मीना ज़ोलियानी, पु वनलालतलाना वार्टे, पु बी. लालबियाकवेला, लालसावम्लियाना पचुआउ और आईआईएमसी आइज़ोल के असिस्टेंट प्रोफेसर मधुसूदन शामिल रहे।
जूरी के निर्णय के अनुसार, रेमंड कोलनी द्वारा निर्देशित फ़िल्म ‘मैमिज़ियाल’ ने प्रथम पुरस्कार जीता, जिसके तहत उन्हें ₹2.50 लाख की इनामी राशि प्रदान की गई। एच. लालसंगज़ेला निर्देशित फ़िल्म 'ज़ुअलतेई पा' को ₹1.25 लाख के साथ द्वितीय, तथा लालरोहलुआ रेंथलेई निर्देशित फ़िल्म 'नुन्ना' को ₹70 हजार के साथ तृतीय पुरस्कार से नवाज़ा गया। इसके अतिरिक्त, पाँच अन्य फ़िल्मों को ₹30-30 हजार के सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए।
मार्च में होगा ‘लेमचान – मिज़ो फ़िल्म फ़ेस्टिवल’
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि सूचना, जनसंपर्क एवं मुद्रण सेवा विभाग के मंत्री पु बी. लालछनज़ोवा ने शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अच्छी फ़िल्में समाज को सकारात्मक दिशा देने का एक सशक्त माध्यम होती हैं और फ़िल्म निर्माण में गुणवत्ता को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।
इस अवसर पर मंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य में 16 से 18 मार्च 2026 तक ‘लेमचान – मिज़ो फ़िल्म फ़ेस्टिवल’ का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे मिज़ोरम के फ़िल्म उद्योग को एक नया मंच और नई पहचान मिलेगी।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाओं को ले जाने का प्रयास
इस आयोजन पर मिज़ोरम सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के डिप्टी डायरेक्टर प्रताप छेत्री ने कहा कि मिज़ोरम फ़िल्म फ़ेस्टिवल के ज़रिए स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने का एक निरंतर प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में नई प्रतिभाओं को जो पहचान मिलेगी, वह मिज़ोरम के लिए बेहद गर्व की बात है।
वहीं, जूरी पैनल के सदस्य और आईआईएमसी आइज़ोल के असिस्टेंट प्रोफेसर मधुसूदन ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि फ़िल्में समाज का आईना होती हैं। उन्होंने बताया कि मिज़ो फ़िल्मों के माध्यम से उन्हें यहाँ की संस्कृति, युवाओं की सोच, प्रोडक्शन क्वालिटी और बेहतरीन अभिनय क्षमता को करीब से समझने का अवसर मिला, जो अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने मिज़ोरम के लोगों के विनम्र, मृदुभाषी और सहयोगी स्वभाव के साथ-साथ राज्य की उच्च साक्षरता दर और उत्कृष्ट सिविक सेंस की भी सराहना की और इस प्रतियोगिता में बतौर जूरी सदस्य शामिल होने को एक अविस्मरणीय अनुभव बताया।