मणिपुर में अगवा 20 लोगों की रिहाई के लिए मेघालय और नगालैंड के मुख्यमंत्रियों ने उठाई आवाज़, गृह मंत्री से मांगा दखल

20 निर्दोष बंधकों की सुरक्षित रिहाई के लिए मेघालय और नगालैंड के मुख्यमंत्रियों ने की मार्मिक अपील, गृह मंत्री अमित शाह से मांगा तत्काल हस्तक्षेप।
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कोहिमा से मणिपुर का हाईवे फोटो- राजन चौधरी, द मूकनायक
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नई दिल्ली: मणिपुर में 13 मई को तीन चर्च नेताओं की हत्या के बाद भड़की हिंसा के बीच अगवा किए गए 20 आम नागरिकों की जल्द रिहाई की मांग अब तेज हो गई है। मेघालय और नगालैंड के मुख्यमंत्रियों ने सशस्त्र समूहों द्वारा बंधक बनाए गए इन 14 कुकी और 6 नगा लोगों को तुरंत सुरक्षित छोड़ने की पुरजोर अपील की है।

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने इस पूरी घटना पर अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की है। नेशनल पीपुल्स पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एक ईसाई होने के नाते उन्होंने कहा कि मणिपुर के कांगपोकपी जिले के निर्दोष ग्रामीणों को इस तरह से लंबे समय तक बंधक बनाकर रखे जाने से उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत ठेस पहुंची है।

संगमा ने यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) और कुकी इन्पी मणिपुर (केआईएम) को एक बेहद भावुक पत्र लिखा है। उन्होंने इसमें स्पष्ट किया है कि संघर्ष से कोई लेना-देना न रखने वाले निर्दोष नागरिकों के अपहरण से समाज में दर्द और विभाजन ही बढ़ता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस अमानवीय कृत्य से माताएं, बच्चे और बुजुर्ग खौफ में जी रहे हैं, जिससे पीढ़ियों से साथ रहने वाले समुदायों के बीच की खाई और गहरी हो रही है।

यूएनसी और केआईएम क्रमशः नगा और कुकी समुदायों के शीर्ष सामाजिक संगठन माने जाते हैं। गौरतलब है कि इन दोनों समुदायों के बीच यह पूरा विवाद इसी साल फरवरी महीने में हुई एक हिंसक झड़प के बाद से शुरू हुआ था।

अपने पत्र में मुख्यमंत्री संगमा ने सभी बंधकों की तत्काल रिहाई के साथ-साथ उनकी सुरक्षा, चिकित्सा, भोजन और उनके परिवारों से बातचीत सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है। उन्होंने सभी पक्षों से हिंसा का रास्ता छोड़कर बातचीत अपनाने का आग्रह किया और कहा कि करुणा का यह एक कदम मणिपुर में शांति और मरहम की शुरुआत कर सकता है।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूरा पूर्वोत्तर इस समय उन्हें देख रहा है और इतिहास उन लोगों को हमेशा याद रखेगा जो संघर्ष के समय में भी मानवता का चुनाव करते हैं।

दूसरी ओर, नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने भी यूएनसी को पत्र लिखकर स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया है। उन्होंने बताया कि कुकी समूहों द्वारा बंधक बनाए गए छह लियांगमाई नगा लोगों के मामले में नगा समुदाय की गहरी चिंता से उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टेलीफोन पर अवगत करा दिया है।

रियो ने गृह मंत्री से इस संवेदनशील मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि अपहृत किए गए सभी छह लोगों का तुरंत पता लगाने, उनकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने और ऐसा करने वाले दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।

मुख्यमंत्री रियो के अनुसार, अमित शाह ने उन्हें पूरा आश्वासन दिया है कि संबंधित एजेंसियां इन अपहर्ताओं की पहचान करने और कानून अपना काम करे, यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी मुस्तैदी से काम करेंगी। मामले की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए रियो ने केंद्रीय गृह सचिव और इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक से भी बातचीत कर सभी एजेंसियों द्वारा समन्वित कार्रवाई की मांग की है।

इसके साथ ही नगालैंड के मुख्यमंत्री ने यूएनसी से यह भी आग्रह किया है कि वे उन नगा लोगों पर अपना प्रभाव और दबाव बनाएं जिन्होंने 14 कुकी नागरिकों को अपनी हिरासत में रखा हुआ है। उन्होंने इन सभी कुकी बंधकों की सुरक्षित और बिना किसी शर्त के उनके घर वापसी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

इस मौजूदा संकट के बीच यह याद दिलाना भी प्रासंगिक है कि सुरक्षा बलों के सक्रिय और समन्वित प्रयासों से 15 मई को 14 कुकी और 14 नगा लोगों की अदला-बदली के जरिए उनकी सफल रिहाई कराई जा चुकी है।

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