मणिपुर में 14 कुकी नागरिकों की होने वाली रिहाई को फिलहाल रद्द कर दिया गया है। सोमवार, 1 जून को नागा समुदाय के एक गुट द्वारा किए गए भारी विरोध-प्रदर्शन के बाद यह अहम फैसला लिया गया।
इन 14 कुकी लोगों को 'नागा विलेज गार्ड-नॉर्दर्न कमांड' नामक संगठन ने बंधक बनाया हुआ है। इनमें तीन नाबालिग छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह बंधक संकट राज्य के कांगपोकपी जिले में 13 मई को हुए एक हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें तीन चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी।
मणिपुर में नागाओं के शीर्ष संगठन यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने सोमवार सुबह बंधकों को लेकर एक सकारात्मक घोषणा की थी। इसके तहत दोपहर 2 बजे इन सभी कुकी नागरिकों को रिहा किया जाना था।
यह सहमति सरकार के उस आश्वासन के बाद बनी थी जिसमें कहा गया था कि अपहृत छह नागाओं का पता लगाया जाएगा और उनके अपहरणकर्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
हालांकि, शाम होते-होते जमीनी हालात बदल गए और यूएनसी को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। संगठन ने एक नया बयान जारी कर कहा कि नागा जनता की वर्तमान भावनाओं को देखते हुए रिहाई का प्रस्ताव रद्द किया जाता है।
रिहाई टलने का मुख्य कारण सेनापति स्थित यूएनसी कार्यालय पर हुआ भारी प्रदर्शन था। आक्रोशित नागा प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय पर धावा बोलकर इस फैसले का कड़ा विरोध किया।
प्रदर्शनकारियों की स्पष्ट मांग थी कि जब तक कुकी उग्रवादियों द्वारा कथित तौर पर बंधक बनाए गए छह नागाओं को रिहा नहीं किया जाता, तब तक इन 14 कुकी लोगों को भी नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
चर्च नेताओं की हत्या के बाद से ही दोनों समुदायों के बीच यह तनाव चरम पर है। इससे पहले 15 मई को भी एक समझौते के तहत 14 कुकी और इतने ही नागाओं को रिहा किया गया था।
यूएनसी की हालिया घोषणा से कम से कम यह स्पष्ट हो गया है कि सभी 14 कुकी बंधक पूरी तरह सुरक्षित हैं। दूसरी तरफ, छह नागा बंधकों की स्थिति के बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
इस गंभीर मामले को लेकर पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने ऐलान किया था कि चर्च नेताओं की हत्या और छह नागाओं के अपहरण से जुड़े इस पूरे मामले की जांच अब NIA को सौंपी जाएगी।
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