
भोपाल। मध्य प्रदेश के उज्जैन में गुरुवार रात एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान संभावित बाल तस्करी के मामले का खुलासा हुआ, जब अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन से 26 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। यह कार्रवाई बाल कल्याण समिति (CWC) को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें दावा किया गया था कि करीब 100 बच्चों को मजदूरी के लिए उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से गुजरात के अहमदाबाद ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया और तत्काल एक संयुक्त टीम का गठन कर कार्रवाई शुरू की गई।
गुरुवार रात करीब 11 बजे जैसे ही अंत्योदय एक्सप्रेस उज्जैन रेलवे स्टेशन पहुंची, पुलिस, जीआरपी, आरपीएफ, श्रम विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने ट्रेन में सघन सर्चिंग अभियान चलाया। इस दौरान करीब आधे घंटे तक 50 से अधिक बच्चों और उनके साथ यात्रा कर रहे संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई। शुरुआती जांच में 4 बच्चों को संदिग्ध स्थिति में पाकर तुरंत रेस्क्यू किया गया। हालांकि इसी दौरान ट्रेन उज्जैन से आगे बढ़ गई, जिससे पूरी टीम को अलर्ट मोड में आना पड़ा।
रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहीं सीएसपी दीपिका शिंदे ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत नागदा रेलवे स्टेशन को सूचना दी, जिसके बाद ट्रेन को वहां रोका गया। नागदा में लगभग एक घंटे तक चली गहन तलाशी और पूछताछ के बाद 22 और नाबालिग बच्चों को ट्रेन से उतारा गया। इस प्रकार कुल 26 बच्चों को सुरक्षित बचाया गया। अधिकारियों के अनुसार, नागदा से उतारे गए सभी बच्चे नाबालिग हैं, जिनमें से दो की उम्र 14 वर्ष से भी कम है, जो इस मामले को और गंभीर बनाता है।
रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को फिलहाल उज्जैन जीआरपी के हवाले कर दिया गया है और उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) के संरक्षण में रखा गया है। प्रशासन द्वारा बच्चों के परिजनों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनकी वास्तविक स्थिति और पृष्ठभूमि का पता लगाया जा सके। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि बच्चों को किस उद्देश्य से और किन लोगों के द्वारा इस तरह समूह में ले जाया जा रहा था।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि इन बच्चों को गुजरात में मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था, जो कि बाल श्रम और मानव तस्करी के गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। हालांकि पूछताछ के दौरान कुछ बच्चों ने यह भी बताया कि वे सोमनाथ और अन्य स्थानों पर घूमने जा रहे थे, जिससे जांच और भी जटिल हो गई है। पुलिस अब इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि क्या बच्चों को झांसा देकर ले जाया जा रहा था या फिर उनके साथ किसी संगठित गिरोह की संलिप्तता है।
श्रम विभाग की सहायक आयुक्त राखी जोशी ने बताया कि प्रारंभिक सूचना के अनुसार चार संदिग्ध व्यक्ति करीब 100 से अधिक नाबालिग बच्चों को गुजरात ले जा रहे थे। फिलहाल इन सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है और संबंधित लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यदि बाल तस्करी या बाल श्रम से जुड़ी पुष्टि होती है, तो आरोपियों पर कठोर धाराओं में केस दर्ज किया जाएगा।
यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर बाल सुरक्षा व्यवस्था और रेलवे नेटवर्क के जरिए होने वाली संभावित तस्करी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि प्रशासन की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई के चलते 26 बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन यह मामला इस बात का संकेत भी है कि ऐसे नेटवर्क अभी भी सक्रिय हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस और अन्य एजेंसियां पूरे मामले की तह तक जाने में जुटी हैं, ताकि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके और दोषियों को सजा दिलाई जा सके।
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