MP इंदौर में ज़हर बन चुका है नल का पानी? वॉटर ऑडिट ने खोली स्वच्छता के दावों की पोल, नेता प्रतिपक्ष ने BJP सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि इंदौर को लगातार आठ बार सबसे स्वच्छ शहर का तमगा दिया गया और 2025 में भी शीर्ष स्थान मिला, जबकि नगर निगम का बजट 8,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके बावजूद अगर नागरिकों को सीवेज मिला पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है, तो ऐसी स्वच्छता रैंकिंग का क्या मतलब है।
MP इंदौर में ज़हर बन चुका है नल का पानी? वॉटर ऑडिट ने खोली स्वच्छता के दावों की पोल, नेता प्रतिपक्ष ने BJP सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
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भोपाल। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में प्रचारित किए जाने वाले इंदौर में नल का पानी लोगों के लिए ज़हर बनता जा रहा है। भगीरथपुरा से सामने आए जल-प्रदूषण कांड के बाद किए गए वॉटर ऑडिट (Water Audit) ने यह साफ़ कर दिया है कि भाजपा सरकार के स्वच्छता और विकसित भारत के दावे ज़मीनी हकीकत में पूरी तरह फेल हो चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने वॉटर ऑडिट के निष्कर्ष सार्वजनिक करते हुए कहा कि यह संकट किसी एक मोहल्ले तक सीमित नहीं, बल्कि इंदौर के शहरी प्रशासन और नगर निगम की पूरी व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है।

नेता प्रतिपक्ष पहुँचे थे इंदौर

6 जनवरी 2026 को उमंग सिंघार भगीरथपुरा पहुँचे, जहाँ दूषित पानी पीने से बीमारियों और मौतों का सिलसिला सामने आया। स्थानीय नागरिकों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अब तक लगभग 20 लोगों की जान जा चुकी है। हालात इतने गंभीर थे कि पीड़ित इलाक़े में जाने से रोकने की कोशिश की गई और पुलिस ने बैरिकेडिंग कर नाकाबंदी की। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस का रवैया कानून-व्यवस्था बनाए रखने से ज़्यादा विपक्ष की आवाज़ दबाने जैसा था। पूरा इलाक़ा मानो सील कर दिया गया हो। पीड़ित परिवारों ने बताया कि वे दबाव में हैं और खुलकर बोलने से डर रहे हैं। कई घरों में अब भी बदबूदार और गंदा पानी सप्लाई हो रहा है, जबकि मुआवज़े, इलाज और भविष्य की सुरक्षा को लेकर सरकार की ओर से कोई भरोसेमंद कदम नहीं उठाया गया है।

भगीरथपुरा की स्थिति सामने आने के बाद 7 जनवरी 2026 को इंदौर के विभिन्न इलाक़ों में वॉटर ऑडिट किया गया। यह कोई औपचारिक निरीक्षण नहीं था, बल्कि नलों तक जाकर पानी की वास्तविक स्थिति को परखने की कोशिश थी। मदीना नगर, खजराना, भूरी टेकरी, बर्फानी धाम, कृष्णा बाग और कनाडिया जैसे इलाक़ों में सीधे नल खोलकर पानी देखा गया। ये सभी क्षेत्र भगीरथपुरा से 5 से 18 किलोमीटर के दायरे में हैं और यहाँ इंदौर का गरीब, मज़दूर और मेहनतकश तबका बड़ी संख्या में रहता है, जो दिनभर की मेहनत के बाद कम से कम साफ़ पानी की उम्मीद करता है।

वॉटर ऑडिट ने खोली पोल, गंदगी का अंबार

वॉटर ऑडिट के दौरान सामने आई तस्वीर बेहद डरावनी थी। कई इलाक़ों में पानी में साफ़ तौर पर गंदगी, तेज़ बदबू और असामान्य रंग दिखाई दिया। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इस पानी को पीने के बाद उल्टी, दस्त और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियाँ फैल रही हैं। कुछ स्थानों पर सीवेज की मिलावट इतनी स्पष्ट थी कि पानी पीना तो दूर, उसके पास खड़ा होना भी मुश्किल लग रहा था। कई इलाक़ों में महिलाएं रो-रोकर अपनी पीड़ा बयान करती दिखीं और कहती नज़र आईं कि बच्चों को क्या पिलाएँ और कैसे ज़िंदा रखें।

मदीना नगर भी गंदा पानी पी रहे लोग

मदीना नगर में लोगों ने बताया कि नियमित रूप से पानी का बिल चुकाने के बावजूद उन्हें गंदा और बदबूदार पानी मिल रहा है। कथित बकाया के नाम पर भारी वसूली की जा रही है, लेकिन शिकायतों के बाद भी न तो नगर निगम के अधिकारी पहुँचते हैं और न ही जनप्रतिनिधि। खजराना में नर्मदा जल की सप्लाई में तेज़ बदबू और प्रदूषण पाया गया, जिससे पानी पीने योग्य नहीं रह गया है। भूरी टेकरी में स्थिति और भी गंभीर है, जहाँ वर्षों से गंदे पानी और जलभराव की शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

कृष्णा बाग में पेयजल पाइपलाइन गटर के बिल्कुल पास से गुजरती पाई गई, जिससे सीवेज मिलावट का खतरा साफ़ नज़र आया। यह बुनियादी मानकों की खुली अनदेखी है। बर्फानी धाम में अव्यवस्थित जल वितरण और दूषित पानी की आपूर्ति ने प्रशासन की उदासीनता को उजागर किया, जबकि कनाडिया में भी पानी की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई और हालात पूरे क्षेत्र में एक जैसे ही रहे।

नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज़ादी के 79 साल बाद, वर्ष 2026 में भी नागरिक साफ़ पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस देश ने अंतरिक्ष तक उड़ान भरी है, उसी देश में लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। यह विकसित भारत के नारों पर करारा तमाचा है। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर, खुले नाले, कीचड़ और टूटी सड़कें साफ़ बताती हैं कि स्वच्छता सिर्फ़ काग़ज़ों और दीवारों तक सीमित है।

उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि इंदौर को लगातार आठ बार सबसे स्वच्छ शहर का तमगा दिया गया और 2025 में भी शीर्ष स्थान मिला, जबकि नगर निगम का बजट 8,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके बावजूद अगर नागरिकों को सीवेज मिला पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है, तो ऐसी स्वच्छता रैंकिंग का क्या मतलब है। उन्होंने कहा, “दीवारों पर अवॉर्ड टंगे हैं और नालों में ज़हर बह रहा है।”

जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर की मांग

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सीधे संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि स्वच्छता के अवॉर्ड से लोग ज़िंदा नहीं रहते, ज़िंदा रहने के लिए साफ़ पानी चाहिए, जो सरकार देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।

अंत में उमंग सिंघार ने मांग की कि पूरे मध्यप्रदेश में वॉटर ऑडिट कराया जाए और नागरिकों व जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता की जाँच करें, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि नगर निगम के अधिकारियों और महापौर सहित सभी जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर दर्ज कर सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए। जब तक साफ़ पानी, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक विपक्ष जनता की इस लड़ाई को सड़क से सदन तक पूरी ताक़त से उठाता रहेगा।

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