MP इंदौर में ज़हरीला पानी बना काल: भागीरथपुरा में 17 मौतें, सड़कों से ICU तक हाहाकार, कांग्रेस ने भाजपा विधायकों-सांसदों के घरों के बाहर घंटा बजाकर किया प्रदर्शन

रविवार शाम को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इंदौर की मौतों को सीधा-सीधा हत्या करार दिया।
MP इंदौर में ज़हरीला पानी बना काल: भागीरथपुरा में 17 मौतें, सड़कों से ICU तक हाहाकार, कांग्रेस ने भाजपा विधायकों-सांसदों के घरों के बाहर घंटा बजाकर किया प्रदर्शन
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भोपाल। मध्यप्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 17 हो गया है। हाल ही में रिटायर्ड पुलिस कर्मी ओमप्रकाश शर्मा की किडनी फैल होने से मौत होई है। हालात की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब 150 लोग अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। कई मरीजों की हालत नाजुक बताई जा रही है, जिन्हें ICU में रखा गया है। शनिवार शाम 6 बजे के बाद अलग-अलग अस्पतालों से 12 गंभीर मरीजों को एक साथ बॉम्बे हॉस्पिटल के ICU में शिफ्ट किए गए थे।

इलाके में स्वास्थ्य और प्रशासनिक तंत्र पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। भागीरथपुरा में पानी की सप्लाई पूरी तरह बाधित है और फिलहाल टैंकरों के जरिए पीने का पानी दिया जा रहा है। स्थानीय निवासी ललित ने बताया कि बोरिंग में लीकेज की भी जांच की जा रही है, क्योंकि आशंका है कि सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया। हालात इतने खराब हैं कि साफ पानी की मांग को देखते हुए गलियों में बिसलेरी से भरी गाड़ियां तक घूमने लगी हैं।

प्रदेशभर में कांग्रेस का विरोध, भाजपा नेताओं के बंगलों के बाहर घंटा-प्रदर्शन

इंदौर की इस त्रासदी के खिलाफ कांग्रेस ने रविवार सुबह से पूरे प्रदेश में भाजपा विधायकों और सांसदों के आवासों के बाहर प्रतीकात्मक विरोध शुरू किया। भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा सांसद आलोक शर्मा के बंगले के बाहर घंटा बजाते हुए पहुंचे और रघुपति राघव राजाराम भजन गाया।

मंदसौर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और सांसद सुधीर गुप्ता के आवास का घेराव किया। इस दौरान डिप्टी सीएम के बंगले के बाहर पुलिस और कांग्रेसियों के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड लांघकर गेट तक पहुंच गए, जिसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए।

कटनी में मुड़वारा विधायक संदीप जायसवाल के बंगले के बाहर कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी और झड़प की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इसी दौरान भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेसियों के सामने नाचते हुए नजर आए। इस पर कांग्रेस नेता दिव्यांशु अंशु मिश्रा ने आरोप लगाया कि “प्रदेश शोक में है और भाजपा जश्न मना रही है।”

“यह हादसा नहीं, हत्या है”- जीतू पटवारी

रविवार शाम को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इंदौर की मौतों को सीधा-सीधा हत्या करार दिया। उन्होंने कहा कि दूषित पानी से लोगों की जान जाना प्रशासनिक लापरवाही और सत्ता की संवेदनहीनता का नतीजा है। पटवारी ने इंदौर के प्रभारी मंत्री, मुख्यमंत्री मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव और जिम्मेदार अधिकारियों से इस्तीफे की मांग की।

उन्होंने ऐलान किया कि 11 जनवरी से कांग्रेस गली-गली जाकर लोगों को इस मुद्दे पर जागरूक करेगी और सरकार की जवाबदेही तय करने तक आंदोलन जारी रहेगा। पटवारी ने कहा, “जब साफ पानी जैसी बुनियादी ज़रूरत सरकार नहीं दे पा रही, तो सत्ता में बैठे लोगों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना चाहिए।”

भागीरथपुरा में अब भी डर और गुस्से का माहौल है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे के पीछे क्या बुनियादी व्यवस्थाएं सड़ चुकी हैं, और इस ज़हरीले पानी की कीमत आखिर कौन चुकाएगा?

जानिए किस अधिकारी पर क्या आरोप?

दिलीप यादव (आयुक्त, हटाए गए): गंदे पानी की शिकायतों की अनदेखी, पाइपलाइन टेंडर प्रक्रिया पर निगरानी में लापरवाही।

रोहित सिसोनिया (अपर आयुक्त, सस्पेंड): अगस्त में हुए टेंडरों को लंबित रखना, शिकायतों पर कार्रवाई न करना।

संजीव श्रीवास्तव (पीएचई, सस्पेंड): दूषित पानी की शिकायतों पर कोई ठोस कदम नहीं।

शुभम श्रीवास्तव (उपयंत्री, सस्पेंड): जोन-4 में दूषित जल की समस्या का निराकरण नहीं किया।

योगेश जोशी (सहायक यंत्री, सस्पेंड): हेल्पलाइन पर आई शिकायतों के अनुसार लीकेज मरम्मत की जिम्मेदारी नहीं निभाई।

शालिग्राम शितोले (जोनल अधिकारी, सस्पेंड): जोन स्तर पर निगरानी में विफलता।

राहुल गांधी का हमला

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोल चुके हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट के जरिए कहा था, “इंदौर में पानी नहीं, जहर बांटा गया। प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। लोगों ने बार-बार बदबूदार और गंदे पानी की शिकायत की, फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?”

राहुल गांधी ने आगे कहा कि साफ पानी कोई एहसान नहीं, बल्कि जीवन का अधिकार है, और इस अधिकार की हत्या के लिए भाजपा का “डबल इंजन” और लापरवाह प्रशासन जिम्मेदार है। उन्होंने मध्यप्रदेश को “कुप्रशासन का एपिसेंटर” करार देते हुए कहा कि कहीं खांसी की सिरप से मौतें होती हैं, कहीं सरकारी अस्पतालों में बच्चों की जान जाती है और अब सीवर मिला पानी पीकर लोग मर रहे हैं।

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