
भोपाल। देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे वाले इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले ने अब गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक रूप ले लिया है। राज्य सरकार ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को उनके पद से हटा दिया है, जबकि अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव, उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव, सहायक यंत्री योगेश जोशी और जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले को निलंबित कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इन अधिकारियों ने गंदे पानी की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।
इसी दिन राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में 39 पेज की स्टेटस रिपोर्ट भी पेश की। इसमें सरकार ने स्वीकार किया कि दूषित पानी से सिर्फ 4 मौतें हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सभी मृतकों की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी।
उर्मिला की मौत: 28 दिसंबर तारा (60) और नंदा (70): 30 दिसंबर, हीरालाल (65): 31 दिसंबर
हालांकि, इस दावे के बाद विवाद और गहरा गया है। मृतकों के परिजनों और अस्पतालों के रिकॉर्ड के आधार पर कम से कम 15 मौतों की जानकारी सामने आ चुकी है। इसी विरोधाभास के चलते हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को तय की गई है। गौरतलब है कि अदालत ने 1 जनवरी को ही सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी, लेकिन सरकार ने पांच दिन बाद आंकड़े पेश किए।
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पानी को पीने योग्य नहीं पाया गया है। जांच में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पानी में हैजा फैलाने वाला विब्रियो कोलेरी भी पाया गया है, लेकिन सरकारी तंत्र इसे प्रारंभिक रिपोर्ट बताकर सार्वजनिक करने से बच रहा है। नगर निगम की अपनी लैब में भेजे गए करीब 80 सैंपल्स भी असंतोषजनक पाए गए हैं। विशेष रूप से भागीरथपुरा क्षेत्र से लिए गए सैंपल को पीने और घरेलू उपयोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त बताया गया, लेकिन दोनों रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
कार्रवाई के साथ-साथ सरकार ने प्रशासनिक पुनर्गठन भी किया है। आकाश सिंह (सीईओ, जिला पंचायत खरगोन) प्रखर सिंह (सीईओ, जिला पंचायत अलीराजपुर) आशीष कुमार पाठक (उप परिवहन आयुक्त, इंदौर) इन तीनों अधिकारियों को इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त नियुक्त किया गया है और उन्हें अलग-अलग जोन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दिलीप यादव (आयुक्त, हटाए गए): गंदे पानी की शिकायतों की अनदेखी, पाइपलाइन टेंडर प्रक्रिया पर निगरानी में लापरवाही।
रोहित सिसोनिया (अपर आयुक्त, सस्पेंड): अगस्त में हुए टेंडरों को लंबित रखना, शिकायतों पर कार्रवाई न करना।
संजीव श्रीवास्तव (पीएचई, सस्पेंड): दूषित पानी की शिकायतों पर कोई ठोस कदम नहीं।
शुभम श्रीवास्तव (उपयंत्री, सस्पेंड): जोन-4 में दूषित जल की समस्या का निराकरण नहीं किया।
योगेश जोशी (सहायक यंत्री, सस्पेंड): हेल्पलाइन पर आई शिकायतों के अनुसार लीकेज मरम्मत की जिम्मेदारी नहीं निभाई।
शालिग्राम शितोले (जोनल अधिकारी, सस्पेंड): जोन स्तर पर निगरानी में विफलता।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “इंदौर में पानी नहीं, जहर बांटा गया। प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। लोगों ने बार-बार बदबूदार और गंदे पानी की शिकायत की, फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?”
राहुल गांधी ने आगे कहा कि साफ पानी कोई एहसान नहीं, बल्कि जीवन का अधिकार है, और इस अधिकार की हत्या के लिए भाजपा का “डबल इंजन” और लापरवाह प्रशासन जिम्मेदार है। उन्होंने मध्यप्रदेश को “कुप्रशासन का एपिसेंटर” करार देते हुए कहा कि कहीं खांसी की सिरप से मौतें होती हैं, कहीं सरकारी अस्पतालों में बच्चों की जान जाती है और अब सीवर मिला पानी पीकर लोग मर रहे हैं।
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