
भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने की घटना ने मध्यप्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। इस मामले में अब कांग्रेस सीधे सड़क पर उतरने की तैयारी में है। नर्मदापुरम में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने साफ शब्दों में कहा कि यदि 11 जनवरी से पहले नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा नहीं होता और जिम्मेदार अधिकारियों व महापौर पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, तो कांग्रेस इंदौर में प्रदेश स्तरीय महाआंदोलन करेगी।
पटवारी ने कहा कि यह सिर्फ इंदौर का मामला नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में सरकारी लापरवाही और जवाबदेही के खत्म होते जाने का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मौतों को भी आंकड़ों और मुआवज़े में तौल रही है, जबकि जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई से लगातार बचा जा रहा है।
‘बूथ चलो, गांव चलो’ अभियान के दौरान किया बड़ा ऐलान
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान “बूथ चलो, गांव चलो” के तहत जीतू पटवारी नर्मदापुरम जिले के ग्राम निमसाड़िया पहुंचे थे। यहां उन्होंने ग्राम पंचायत कांग्रेस कमेटी का गठन किया और कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूत करने का मंत्र दिया। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस को बूथ स्तर पर मजबूत किए बिना न विधानसभा चुनाव जीते जा सकते हैं और न ही लोकसभा चुनाव। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जनता के मुद्दों को ही पार्टी की प्राथमिक राजनीति बनानी होगी। इसी दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने इंदौर दूषित पानी मामले को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला और आंदोलन का ऐलान किया।
एक जान की कीमत सिर्फ 2 लाख?
पीसीसी चीफ ने कहा कि सरकार ने दूषित पानी से हुई मौतों के बाद सिर्फ चार अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया और मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये का मुआवज़ा देकर अपना कर्तव्य पूरा मान लिया।
उन्होंने सवाल उठाया- “क्या एक इंसानी जान की कीमत सिर्फ दो लाख रुपये है? क्या अफसरों का ट्रांसफर ही सज़ा है?”
पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश की एक पंचायत में सरकारी अधिकारी महज़ दो घंटे में डेढ़ लाख रुपये के ड्रायफ्रूट्स खा जाते हैं, लेकिन आम जनता की मौत पर सरकार दो लाख रुपये देकर मामले को खत्म करना चाहती है। उन्होंने इसे जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा करार दिया।
गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज हो
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यदि 11 जनवरी तक इस पूरे मामले में गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज नहीं किया गया, तो कांग्रेस हजारों लोगों के साथ इंदौर की सड़कों पर उतरेगी।
उन्होंने कहा, “यह नहीं चल सकता कि लोग मरते रहें और अधिकारी मौन रहें। जवाबदेही तय करनी होगी, नहीं तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।”
पहले भी हुईं मौतें, पर कार्रवाई शून्य
पटवारी ने इंदौर की घटना को प्रदेश में लापरवाही की लंबी श्रृंखला से जोड़ते हुए कहा कि इससे पहले दवा पीने से 26 बच्चों की मौत हुई, कुएं में गिरने से 36 लोगों की जान गई, अस्पतालों में चूहों द्वारा बच्चों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं सामने आईं, लेकिन किसी भी मामले में जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि यह सरकार की कार्यप्रणाली को उजागर करता है, जहां मौतें होती हैं लेकिन मंत्री और अधिकारी अपनी कुर्सी पर सुरक्षित बने रहते हैं। पटवारी ने दो टूक कहा कि अब मंत्रियों को भी अपनी जवाबदारी लेनी पड़ेगी और कैलाश विजयवर्गीय को इस्तीफा देना होगा।
11 जनवरी को इंदौर में निर्णायक आंदोलन
कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं, तो 11 जनवरी को इंदौर में मध्यप्रदेश स्तर का महाआंदोलन होगा। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, स्थानीय नागरिक और मृतकों के परिजन शामिल होंगे। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ इंदौर के लिए नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में जवाबदेह शासन और जनता की सुरक्षा के लिए होगा।
दूषित पानी से हुई मौतों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासनिक लापरवाही पर सिर्फ मुआवज़ा ही समाधान है, या फिर अब सख़्त कार्रवाई और राजनीतिक जवाबदेही का वक्त आ चुका है। कांग्रेस के अल्टीमेटम के बाद अब सबकी निगाहें 11 जनवरी और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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