Press Freedom | सरकार का मीडिया से सवाल पूछने पर 'असहिष्णु' रवैया चिंताजनक : एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक दशक से अधिक के कार्यकाल में एक भी खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित नहीं किया है।
एडिटर्स गिल्ड ने सरकार से अपील की है कि वह मीडिया को केवल अपना कर्तव्य निभाने, सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह बनाने पर विरोधी न समझे।
एडिटर्स गिल्ड ने सरकार से अपील की है कि वह मीडिया को केवल अपना कर्तव्य निभाने, सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह बनाने पर विरोधी न समझे।
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नई दिल्ली-  एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया नीदरलैंड और नॉर्वे दौरे के दौरान भारतीय अधिकारियों और यूरोपीय पत्रकारों के बीच हुई 'अप्रिय खींचतान' पर गहरी चिंता व्यक्त की है। गिल्ड के अनुसार यह तनाव प्रेस ब्रीफिंग के बाद प्रधानमंत्री द्वारा स्थानीय पत्रकारों के सवालों के जवाब देने से इनकार करने के कारण पैदा हुआ।

गौरतलब है कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में नॉर्वे और नीदरलैंड क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर हैं, जबकि भारत 180 देशों में से 157वें स्थान पर है। गिल्ड ने कहा कि पश्चिमी पत्रकार भारत के इतिहास से पूरी तरह अवगत नहीं हो सकते हैं, लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछने की उनकी जरूरत सही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक दशक से अधिक के कार्यकाल में एक भी खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित नहीं किया है।

गिल्ड ने कहा कि सवाल पूछे जाने के प्रति असहिष्णुता अब केंद्र और राज्य स्तरों पर सरकार के सभी स्तरों पर देखी जा रही है, जिससे अर्थव्यवस्था और समाज को नुकसान हो रहा है। हालांकि, प्रेस स्वतंत्रता की रैंकिंग के तरीकों से असहमति हो सकती है, लेकि भारत की दयनीय स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।

एडिटर्स गिल्ड ने सरकार से अपील की है कि वह मीडिया को केवल अपना कर्तव्य निभाने, सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह बनाने पर विरोधी न समझे।

यूरोपीय मीडिया के साथ यह टकराव प्रधानमंत्री द्वारा एक प्रेस ब्रीफिंग के बाद स्थानीय पत्रकारों के सवालों के जवाब देने से इनकार करने के कारण शुरू हुआ।

क्या है विवाद की जड़?

आपको बता दें बीते सप्ताह नॉर्वे में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हेले लिंग ने भारत में मानवाधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी से सवाल पूछे, जिसके बाद उन्हें सीधे तौर पर मंच से जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद हेले लिंग ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी और दावा किया कि उनका फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया है। राहुल गांधी सहित विपक्ष के नेताओं ने इस मुद्दे पर पीएम मोदी पर निशाना साधा, वहीं भारतीय दूतावास और समर्थकों ने पत्रकार की मंशा पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वो पत्रकारिता नहीं बल्कि भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैला रही हैं। उनका सवाल एजेंडे से प्रेरित था। जबकि कुछ लोग इसे प्रेस की आजादी बता रहे हैं।

पत्रकार हेले लिंग ने अपनी सफाई में लिखा है "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे यह लिखना पड़ेगा लेकिन मैं किसी भी तरह की विदेशी जासूस नहीं हूं जिसे किसी विदेशी सरकार ने भेजा हो। मेरा काम पत्रकारिता है और अभी मुख्य रूप से नॉर्वे में काम करती हूं।" एक और पोस्ट में उन्होंने लिखा "पत्रकारिता कभी-कभी आमने-सामने की होती है। हम जवाब चाहते हैं। अगर कोई इंटरव्यू देने वाला, खासकर कोई ताकतवर व्यक्ति, मेरे पूछे गए सवाल का जवाब नहीं देता है, तो मैं बीच में टोककर ज़्यादा सटीक जवाब पाने की कोशिश करूंगी। यही मेरा काम और फर्ज है। मुझे जवाब चाहिए, सिर्फ बातें नहीं।"

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