
उत्तर प्रदेश: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से हाल ही में निष्कासित किए गए आकाश आनंद ने एक बार फिर पार्टी में वापसी की गहरी इच्छा जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक संदेश लिखकर अपनी बुआ और बसपा सुप्रीमो मायावती से माफी मांगी है। आकाश ने मायावती को अपनी 'बुआ-मां', राजनीतिक गुरु और प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा है कि वह केवल उनके एकमात्र नेतृत्व में ही पार्टी और उसके मिशन की सेवा करना चाहते हैं।
शुक्रवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए आकाश ने लिखा कि भरोसा केवल शब्दों से नहीं बल्कि काम से जीता जाता है। उन्होंने अपने व्यवहार और कड़ी मेहनत के जरिए खुद को साबित करने का संकल्प लिया है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि बाबासाहेब का मिशन, कांशीराम का दिखाया रास्ता और मायावती का नेतृत्व ही उनकी राजनीति का मुख्य आधार है। उन्होंने किसी भी अन्य दल में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बसपा उनके लिए सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि उनका परिवार है।
गौरतलब है कि आकाश आनंद को 10 सितंबर को बसपा के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाते हुए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। वह मायावती के भाई आनंद कुमार के बड़े बेटे हैं। उनके निष्कासन के कुछ ही दिनों बाद, 23 सितंबर को मायावती ने उनके छोटे भाई ईशान आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त कर दिया था।
आकाश की इस माफी और वापसी की अपील ने एक बार फिर यह फैसला मायावती पर छोड़ दिया है कि वह उन्हें माफ करती हैं या नहीं। हालांकि, मायावती पहले ही सार्वजनिक तौर पर यह साफ कर चुकी थीं कि वह आकाश को दोबारा पार्टी में शामिल नहीं करेंगी।
आकाश को 10 सितंबर को उस वक्त पार्टी से निकाला गया था, जब उनके ससुर और निष्कासित वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ ने एक लंबी पोस्ट के जरिए राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया था। दरअसल, 9 सितंबर को मायावती ने एक पोस्ट के जरिए अशोक सिद्धार्थ के संन्यास की मांग की थी। मायावती की नाराजगी इस बात से थी कि आकाश ने उनके इस अहम पोस्ट को रीपोस्ट नहीं किया था।
शुक्रवार को अपने बयान में आकाश ने अशोक सिद्धार्थ को बाहर करने और उनके संन्यास की मांग वाले मायावती के फैसले का पूरी तरह से समर्थन किया। उन्होंने लिखा कि वह इस फैसले के साथ खड़े हैं क्योंकि मिशन किसी भी रिश्ते से बड़ा होता है। आकाश ने जोर देकर कहा कि पार्टी और आंदोलन के हितों को व्यक्तिगत या पारिवारिक हितों से ऊपर रखना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
रीपोस्ट न करने के विवाद पर आकाश ने स्पष्ट किया कि उस दौरान उन्होंने खुद को सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रखा हुआ था, जिस वजह से वह 9 सितंबर वाली पोस्ट को साझा नहीं कर सके। उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि उनकी इस खामोशी को गलत समझ लिया गया और इससे कई अफवाहें फैलीं, जिसके लिए वह दिल से माफी मांगते हैं।
यह आकाश आनंद का बसपा से तीसरा निष्कासन है। इससे पहले उन्हें मई 2024 और फिर मार्च 2025 में भी पार्टी से निकाला गया था। हालांकि, पार्टी के भीतर समीकरण इतने जटिल रहे हैं कि पिछले दोनों मौकों पर एक महीने के भीतर ही उनकी न सिर्फ वापसी हो गई थी, बल्कि पार्टी में उनका कद भी बढ़ा दिया गया था।
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