बिजली-पानी की व्यवस्था की न शौचालय चालू हुआ, अकबरनगर विस्थापितों को आवास कर दिया आवंटित! -ग्राउंड रिपोर्ट

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बनाए गए अधूरे मकानों में रहने को मजबूर किये जा रहे अकबरनगर के लोग, चुनाव खत्म होते ही गरजने लगा 'बाबा का बुलडोजर'.
अकबरनगर में अपने टूटते मकान को देखती महिला.
अकबरनगर में अपने टूटते मकान को देखती महिला.तस्वीर- द मूकनायक

लखनऊ। इस तपती धूप से बचने के लिए एक बुजुर्ग महिला अपनी बेटी के साथ ऊंची इमारतों की छाया में खुद को बचाने के लिए बैठी हुई थी। वह सरसरी निगाहों से मकानों पर लिखे नंबरों को पढ़ रही थी। हाथ में एक कागज था। उसपर आवंटित मकान की संख्या लिखी थी, लेकिन उस संख्या का मकान उसको नजर नहीं आया। महिला लोगों से पूछताछ कर रही थी, लेकिन कोई भी उसकी मदद नहीं कर रहा था।

दरअसल, यह महिला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित अकबरनगर से विस्थापित होकर सरकार द्वारा आवंटित किये मकान में आई है। लोकसभा चुनाव खत्म होते ही अकबरनगर में फिर बुलडोजर गरजने लगा है। लोगों के मकानों को तोड़ने के लिए दोगुनी संख्या में मशीनें लगाई गई हैं। मकानों को तोड़ने के लिए दो शिफ्ट लगा दी गई है। इधर, जिनके मकान तोड़े जा रहे हैं, उन्हें पीएम आवास योजना के तहत दुबग्गा इलाके में बन रहे बसंत कुंज आवासीय योजना में मकान आवंटित किये गए हैं।

लोगों का आरोप है कि इनमें से अधिकांश मकान अभी पूरे भी नहीं हुए हैं। इसके बावजूद भी उन्हें उनके अकबरनगर घर से जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आवंटित किये गए मकानों में मूलभूत सुविधाएं चालू नहीं हुई है। इस कारण इस गर्मी में इन आवंटित मकानों में रहना मुश्किल हो रहा है।

अकबरनगर में मकानों को तोड़ते पोकलेन.
अकबरनगर में मकानों को तोड़ते पोकलेन.तस्वीर- द मूकनायक

लखनऊ में कुकरैल रिवर फ्रंट के दायरे में आए अकबरपुर में मकान तोड़े जाने लगे हैं। क्षेत्र में तनाव व्याप्त है। हालांकि प्रशासन ने इसका नोटिस पहले ही दे दिया था। इस कार्रवाई के दौरान परिवार बसंतकुंज में मिले नए घर के लिए अकबरनगर से पलायन करने लगे हैं।

सड़क पर खड़े होकर अपने मकानों को टूटता देखते लोग.
सड़क पर खड़े होकर अपने मकानों को टूटता देखते लोग.तस्वीर- द मूकनायक

अकबरनगर में मकानों को तोड़ने के लिए गत रविवार रात को ही 10 जेसीबी व छह पोकलैंड पहुंच गईं थीं। एलडीए वीसी ने पुलिस अफसरों के साथ गली-गली मार्च कर आवंटियों से बसंतकुंज में नए घरों का कब्जा लेने और अकबरनगर के पुराने घर खाली करने की अपील की। एलडीए ने जिन परिवारों को एक-एक और जिनको दो-दो मकान आवंटित किए हैं, उसका पूरा विवरण होर्डिंग्स के जरिये प्रदर्शित किया है।

इसमें आवंटी के नाम सहित पूरा विवरण है। अकबरनगर में पूरे दिन लाउडस्पीकर से परिवारों को मकान खाली करने के लिए अनाउंसमेंट किया जा रहा है। दो शिफ्ट में मकानों-दुकानों को तोड़ने का अभियान शुरू है। पहली शिफ्ट सुबह 7 से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 से रात 8 बजे तक चल रही है।

तीन दिन में गिरा दिए तीन सौ से अधिक मकान

चुनाव के बाद अब तक तीन दिन में कुल 312 अवैध निर्माण गिराया गया है। बुधवार को 162 अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए। आगे होने वाली कार्रवाई के दौरान दो मस्जिद,एक मंदिर,दो मदरसे और एक स्कूल भी तोड़ा जाएगा। इस काम में 12 बड़ी पोकलेन मशीन, 9 जेसीबी मशीन व 15 वाटर टैंकर लगाए गए हैं।

प्रधानमंत्री आवास में शिफ्ट भी किया जा रहा

एलडीए के अधिकारियों ने बताया कि आवंटियों को प्रधानमंत्री आवास का कब्जा दिलाया जा रहा है। कुल 1800 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास आवंटित किए गए हैं। आवंटन पत्र देने का काम लगातार जारी है। आवंटियों का सामान नए भवन में शिफ्ट करने के लिए कुल 53 लोडर गाड़ियां लगाई गई हैं। अब तक कुल 788 आवंटियों को भवन पर कब्जा दिया जा चुका है।

दुबग्गा स्थित पीएम आवास योजना में सामान लेकर पहुंचा नगर निगम का लोडर.
दुबग्गा स्थित पीएम आवास योजना में सामान लेकर पहुंचा नगर निगम का लोडर.तस्वीर- द मूकनायक

एलडीए के कागजों में अभी अधूरा है प्रोजेक्ट

अकबरनगर से विस्थापित किये गए लोगों को पीएम आवास योजना के तहत दुबग्गा में बन रही बसंतकुंज योजना में आवास आवंटित किये जा रहे हैं। एलडीए खुद बता रहा है कि इस प्रोजेक्ट को 21 जून 2022 में शुरू किया गया था। वहीं इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की प्रस्तावित तिथि 20 जून 2024 है। वहीं 20 जून से पहले ही इन आवासों का आवंटन कर दिया है।

दुबग्गा स्थित बसंत कुज परियोजना के बाहर लगा बोर्ड,
दुबग्गा स्थित बसंत कुज परियोजना के बाहर लगा बोर्ड, तस्वीर- द मूकनायक

अधूरे हैं अधिकांश मकान

द मूकनायक ने बसंतकुंज में मौजूद पीएम आवास में शिफ्ट हो रहे लोगों से बातचीत की। इसके साथ ही यहाँ की व्यवस्था को कैमरे में कैद किया। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अकबरनगर के विस्थापितों को बसंतकुंज योजना में जो आवास आवंटित किए हैं, वह अभी अधूरे हैं। किसी में दरवाजे नहीं हैं तो किसी में खिड़कियां नहीं हैं। ज्यादातर में वायरिंग का कार्य भी नहीं हुआ है और पानी की आपूर्ति भी नहीं है। कई आवासों तक पहुंचने के रास्ते पर नाला खाेदा पड़ा है। अव्यवस्थाओं के चलते अकबरनगर से गए कई विस्थापितों का सामान बाहर सड़क पर ही रखा रहा।

बसंत कुञ्ज पीएम आवास योजना का अस्त-व्यस्त परिसर।
बसंत कुञ्ज पीएम आवास योजना का अस्त-व्यस्त परिसर।तस्वीर- द मूकनायक

बुलडोजर की कार्रवाई तेज होने के बाद अकबरनगर के निवासियों को कैंप लगाकर प्रधानमंत्री आवास के आवंटन पत्र बांटे जा रहे हैं। गृहस्थी का सामान बटोर यहां पहुंचने पर पता चला कि उन्हें जो आवास दिए गए वो रहने के लायक नही हैं। कॉलोनी में नाली, सड़क तो दूर बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नही हैं। घर के अंदर दाखिल होने पर पता चला कि दरवाजे नही हैं। जिस घर में कीवाड़ लगे भी हैं तो उनमें कुंडी नही है।

बेघर हुए और रोजी-रोटी भी गई

सईदा बानो, सब्बो, रेशमा और मोहम्मद कलाम का परिवार काफी बड़ा है। अकबर नगर में कोई घर परचून की दुकान चलाकर तो कोई कॉलोनी के बाहर मेन रोड पर ठेला लगाकर जीवन यापन कर रहा था। ध्वस्तीकरण के बाद बेघर होने के साथ इनकी रोजी-रोटी भी छिन गई। ये परिवार के साथ अब बसंतकुंज योजना में सड़क पर सामान रखकर रात बिता रहे हैं।

मकान संख्या हुई आवंटित, लेकिन नहीं मिल रहा फ़्लैट

द मूकनायक को सना बताती हैं-"हमारा पांच कमरों का मकान था। इस मकान में परिवार के नौ लोग रहते थे। अब यह मकान टूट रहा है। इसकी जगह दुबग्गा में एक कमरे का मकान मिला है, लेकिन मकान ढूँढ़ने से भी नहीं मिल रहा है। अकबर नगर में हमारा मकान खाली करा लिया गया है। उसे तोड़ा जा रहा है। कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं है।'

रेलिंग लगी न ही पानी की सप्लाई

एक पीड़ित को मकान संख्या पीएम आवास में योजना के तहत टावर नंबर 93 में फलित नंबर 28 आबंटित हुआ है। आरोप है कि इस फ़्लैट में दरवाजे तक नहीं लगाए गए है। बाथरूम में पानी की सप्लाई भी नहीं की गई है। इसके साथ ही मकान की रेलिंग भी नहीं लगाई गई, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

बसंतकुञ्ज में टावर संख्या 92 के नीचे वाले तल पर बने कमरों के बाहर रखा हुआ दरवाजा.
बसंतकुञ्ज में टावर संख्या 92 के नीचे वाले तल पर बने कमरों के बाहर रखा हुआ दरवाजा.तस्वीर- द मूकनायक

द मूकनायक को एलडीए वीसी इंद्रमणि त्रिपाठी का पक्ष जाना। उनका कहना है जिन्हे भी मकान में समस्या है या जिनके मकान अधूरे हैं। उन्हें बदलकर दूसरा मकान आवंटित किया जा रहा है।

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