मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की कवायद तेज: लिव-इन रिलेशनशिप पर सबसे ज्यादा आपत्ति, इंदौर की बैठक में गरमाया माहौल

इंदौर से शुरू हुआ जन परामर्श, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को लेकर सामने आए सुझाव
मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की कवायद तेज: लिव-इन रिलेशनशिप पर सबसे ज्यादा आपत्ति, इंदौर की बैठक में गरमाया माहौल
मूकनायक।
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भोपाल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। प्रदेश में यूसीसी को लेकर जन परामर्श प्रक्रिया की शुरुआत शनिवार को इंदौर से की गई। शहर के जाल सभागृह में आयोजित इस बैठक में राज्य सरकार द्वारा गठित समिति के चारों सदस्यों ने विभिन्न सामाजिक संगठनों, धार्मिक प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से सुझाव लिए। बैठक के दौरान यूसीसी को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन सबसे अधिक विरोध और बहस लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने के प्रस्ताव पर देखने को मिली।

बैठक में मौजूद अधिकांश लोगों ने महिलाओं पर होने वाले अत्याचार, तलाक के मामलों में असमानता और बच्चों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए यूसीसी लागू करने का समर्थन किया। लोगों का कहना था कि अलग-अलग धर्मों और समुदायों में अलग कानून होने के कारण महिलाओं और बच्चों को कई बार न्याय नहीं मिल पाता। ऐसे में एक समान कानून से सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर तीखी प्रतिक्रिया, कानूनी मान्यता का विरोध

बैठक में सबसे अधिक चर्चा लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर हुई। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारतीय सामाजिक व्यवस्था और पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ जाकर लिव-इन संबंधों को कानूनी संरक्षण देना उचित नहीं होगा। वक्ताओं ने कहा कि यदि इसे वैधानिक रूप दिया गया तो पारिवारिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

कुछ लोगों ने यह भी कहा कि विवाह संस्था भारतीय समाज की मूल आधारशिला है और लिव-इन को मान्यता देना सामाजिक असंतुलन पैदा कर सकता है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों ने यह तर्क भी रखा कि यदि लोग लिव-इन में रह रहे हैं तो महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी ढांचा जरूरी है।

बैठक में कई लोगों ने परिवारों के भीतर या रिश्तेदारी में होने वाली शादियों पर भी चिंता जताई और इस तरह के संबंधों को हतोत्साहित करने की बात कही।

समिति ने बताया UCC का उद्देश्य, 15 जून तक मांगे गए सुझाव

यूसीसी समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने बैठक के दौरान समान नागरिक संहिता के उद्देश्य और प्रस्तावित प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यूसीसी का मकसद किसी धर्म विशेष को प्रभावित करना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करना है।

राज्य सरकार ने नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। सुझाव देने की अंतिम तारीख 15 जून तय की गई है। आम लोग ucc.mp.gov.in पोर्टल पर जाकर अपने सुझाव दर्ज कर सकते हैं।

बैठक में विधायक मधु वर्मा, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता, गोपीकृष्ण नेमा, श्रवण चावड़ा, डॉ. विनोद भंडारी, गणेश चौधरी, धर्मेंद्र पंड्या और सुरेश कार्टन सहित कई सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रशासनिक स्तर पर कलेक्टर शिवम वर्मा और एडीएम रोशन राय भी बैठक में उपस्थित रहे।

तलाक के कानून में समानता लाने की तैयारी

यूसीसी के तहत तलाक से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। प्रस्ताव के अनुसार सभी धर्मों के पुरुषों और महिलाओं के लिए तलाक के कानूनी आधार समान होंगे। किसी भी समुदाय में निजी या धार्मिक ट्रिब्यूनल के जरिए होने वाले एकतरफा तलाक को अवैध माना जाएगा।

इसके साथ ही तलाक के बाद पत्नी और बच्चों के गुजारा भत्ते के अधिकारों को भी समान बनाने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण महिलाओं को कई बार आर्थिक और कानूनी असमानता का सामना करना पड़ता है।

लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव

प्रस्तावित यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी कई प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य हो सकता है।

यदि कोई पुरुष साथी अपनी महिला पार्टनर को छोड़ देता है, तो महिला को गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में पूरा कानूनी अधिकार देने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

सरकार का तर्क है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है, जबकि विरोध करने वाले पक्ष इसे पारिवारिक व्यवस्था के लिए खतरा बता रहे हैं।

भाजपा नेताओं ने किया समर्थन, मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि ने जताई आपत्ति

बैठक के दौरान राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी अलग-अलग राय सामने आईं। भाजपा नेता सद्दाम पठान ने यूसीसी को सही कदम बताया और कहा कि इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे।

वहीं मुस्लिम समाज की ओर से मोइनुद्दीन रजवी ने स्पष्ट कहा कि उनका समाज इस कानून को स्वीकार नहीं करता। इस बयान पर इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूसीसी का उद्देश्य ही पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू करना है।

विधायक मालिनी गौड़ ने भी यूसीसी का समर्थन करते हुए कहा कि इसका विरोध उचित नहीं है और समाज को समान कानून व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब मध्यप्रदेश की तैयारी

देश में सबसे पहले उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू की थी। 27 जनवरी 2025 से वहां यूसीसी पूरी तरह लागू है। इसके बाद गुजरात भी यूसीसी विधेयक पारित करने वाला दूसरा राज्य बन चुका है। मार्च 2026 में गुजरात विधानसभा ने इसे मंजूरी दी थी।

गोवा में पुर्तगाली सिविल कोड पहले से लागू है, जिसे एक प्रकार का सामान्य नागरिक कानून माना जाता है। हालांकि, यह उत्तराखंड मॉडल से कुछ अलग है। अब मध्यप्रदेश, असम और राजस्थान जैसे राज्य भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

सामाजिक और राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा यूसीसी

मध्यप्रदेश में यूसीसी को लेकर शुरू हुआ जन परामर्श अब सामाजिक और राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। एक ओर इसे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कई धार्मिक और सामाजिक समूह इसे व्यक्तिगत कानूनों और परंपराओं में हस्तक्षेप मान रहे हैं।

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