
भोपाल। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं को मध्यप्रदेश में अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर रोके जाने और ट्रेनों से उतारे जाने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भोपाल, इटारसी और ग्वालियर में पुलिस ने कार्रवाई की। इस दौरान कम से कम 30 प्रदर्शनकारियों को रोके जाने की जानकारी सामने आई है। कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर जबरन ट्रेन से उतारने और दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं।
इटारसी में गोवा एक्सप्रेस से उतारे गए कार्यकर्ता
रिपोर्टों के अनुसार, पुणे से दिल्ली जा रहे छात्र-छात्राओं के एक समूह को इटारसी रेलवे स्टेशन पर गोवा एक्सप्रेस से उतार दिया गया। इस कार्रवाई में जिला पुलिस के साथ राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे थे, लेकिन उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया। भोपाल और ग्वालियर में भी दूसरे राज्यों से आ रहे कुछ कार्यकर्ताओं को रोके जाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, अलग-अलग स्टेशनों पर रोके गए सभी लोगों की संख्या और उनकी हिरासत की स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी स्पष्ट नहीं है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का है कार्यक्रम
CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर विरोध शामिल था।
विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने की भी खबरें सामने आई थीं। इसी पृष्ठभूमि में दिल्ली जा रहे कार्यकर्ताओं को मध्यप्रदेश में रोके जाने की घटनाएं सामने आईं।
मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा
गोवा निवासी शार्दुल जितेंद्र बुआ ने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि यात्रियों के पास वैध टिकट थे, फिर भी उन्हें ट्रेन से उतारकर जिला पुलिस को सौंप दिया गया।
शुक्रवार को चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने नर्मदापुरम एसपी को निर्देश दिया कि हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाए या कोर्ट में पेश किया जाए। कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 12 अक्टूबर, सोमवार को तय की।
अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर सवाल
इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए यात्रा कर रहे नागरिकों को रास्ते में रोके जाने और हिरासत में लेने की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्वक एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।
ऐसे मामलों में यह महत्वपूर्ण है कि प्रशासन कार्रवाई का कानूनी आधार स्पष्ट करे और हिरासत में लिए गए लोगों के अधिकारों का पालन सुनिश्चित हो।
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