
भोपाल। मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में एक बार फिर घरेलू गैस सिलिंडर को लेकर अव्यवस्था की स्थिति बनती नजर आ रही है। पिछले कुछ दिनों से हालात सामान्य होते दिखाई दे रहे थे और उपभोक्ता एजेंसियों पर जाने के बजाय घर पर ही डिलीवरी का इंतजार कर रहे थे। लेकिन अचानक बढ़ी बुकिंग और सीमित भंडार ने स्थिति को फिर से बिगाड़ दिया है। शुक्रवार को शहर के कई गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी गईं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि उपभोक्ताओं में गैस को लेकर असमंजस और घबराहट का माहौल बन चुका है।
हनुमानगंज क्षेत्र स्थित ऑटो हाउस इंडेन गैस एजेंसी पर शुक्रवार सुबह का नजारा स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। यहां सुबह छह बजे से ही लोग सिलिंडर लेने के लिए पहुंचने लगे और देखते ही देखते कतार लंबी होती चली गई। दोपहर तक 200 से अधिक उपभोक्ता एजेंसी पर जमा हो चुके थे। एजेंसी प्रबंधन ने खाद्य विभाग को सूचित किया कि उनके पास मात्र 380 सिलिंडर का स्टॉक है, जबकि 1600 से अधिक बुकिंग पहले ही हो चुकी हैं। इस असंतुलन ने अव्यवस्था को और बढ़ा दिया, क्योंकि अधिकांश लोग तत्काल सिलिंडर की उम्मीद में एजेंसी पहुंच गए थे।
खाद्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उपभोक्ताओं को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिन उपभोक्ताओं को डिलीवरी की तारीख दी गई है, उन्हें उसी दिन घर पर सिलिंडर उपलब्ध कराया जाएगा और एजेंसी पर भीड़ लगाने से कोई लाभ नहीं है। समझाइश के बाद धीरे-धीरे लोग वापस लौटने लगे, लेकिन यह घटना इस बात का संकेत है कि लोगों में भरोसे की कमी और आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है।
खाद्य विभाग के अनुसार, शहर में प्रतिदिन लगभग 15 हजार घरेलू गैस सिलिंडरों की बुकिंग हो रही है, जबकि आपूर्ति केवल 10 से 11 हजार सिलिंडरों तक सीमित है। यह अंतर ही मौजूदा संकट की मुख्य वजह बन रहा है। फिलहाल शहर में करीब 2100 मीट्रिक टन गैस का भंडार मौजूद है, जो पांच से छह दिन के लिए पर्याप्त बताया जा रहा है। इसी भंडार से घरेलू और व्यावसायिक दोनों तरह के सिलिंडरों की आपूर्ति की जा रही है, जिससे दबाव और बढ़ जाता है।
अफवाहों से बढ़ रही घबराहट!
स्थिति को और जटिल बनाने में अफवाहों की भी बड़ी भूमिका सामने आ रही है। बुकिंग के बावजूद समय पर सिलिंडर नहीं मिलने की खबरें फैलते ही लोग घबराकर एजेंसियों की ओर दौड़ने लगे हैं। करोंद क्षेत्र की हैप्पी इंडेन गैस एजेंसी पर भी इसी तरह की भीड़ देखी गई, जहां लोगों ने लंबी कतार लगाकर अपनी चिंता जाहिर की। अधिकारियों ने यहां भी पहुंचकर लोगों को संयम रखने और निर्धारित समय पर डिलीवरी मिलने का भरोसा दिलाया।
व्यावसायिक क्षेत्र की बात करें तो शहर में लगभग 40 हजार कमर्शियल सिलिंडर उपभोक्ता हैं, जिनमें करीब दो हजार होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालक शामिल हैं। इन कारोबारियों को रोजाना गैस की जरूरत होती है, लेकिन हाल के प्रतिबंधों के चलते उनकी स्थिति भी प्रभावित हुई थी। हालांकि सरकार द्वारा कोटा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत किए जाने के बाद कुछ राहत जरूर मिली है। फिर भी जिन क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां के कारोबारियों को अभी भी प्राथमिकता के आधार पर गैस वितरण की आवश्यकता बनी हुई है।
पेट्रोल पम्पों पर लग रही कतारें
इसी बीच पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति भी अफवाहों के कारण प्रभावित होती नजर आई। शहर के लगभग 192 पेट्रोल पंपों में से करीब आधा दर्जन पंपों पर शुक्रवार को ईंधन की कमी देखी गई। हालांकि तेल कंपनियों से आपूर्ति मिलने के बाद स्थिति को जल्द ही सामान्य कर लिया गया, लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि अफवाहें किस तरह से आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
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