भोपाल में भीम आर्मी-ASP का प्रदर्शन: UGC व आरक्षण मुद्दों पर सरकार को चेतावनी, CM हाउस घेराव के दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल

भोपाल में भीम आर्मी-ASP का प्रदर्शन: UGC व आरक्षण मुद्दों पर सरकार को चेतावनी, CM हाउस घेराव के दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल

सभा के अंत में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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भोपाल। भीम आर्मी भारत एकता मिशन और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के बैनर तले राजधानी भोपाल में यूजीसी विनियम और आरक्षण सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया गया। पार्टी के कार्यकर्ता अंबेडकर जयंती मैदान पर एकत्रित हुए, जहां सभा आयोजित कर मुख्यमंत्री के नाम 17 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। सभा के बाद कार्यकर्ता सीएम हाउस की ओर कूच करने निकले, जिन्हें पुलिस ने रास्ते में रोक लिया।

सभा में भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील बैरसिया, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील अस्तेय, पूर्व विधायक आरडी प्रजापति और दलित पिछड़ा समाज संगठन के अध्यक्ष दामोदर यादव सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, किसान और छात्रों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

पूर्व विधायक आरडी प्रजापति की धीरेन्द्र शास्त्री पर तीखी टिप्पणी

सभा को संबोधित करते हुए छतरपुर जिले की चंदला के पूर्व विधायक आरडी प्रजापति ने कहा कि उनकी यात्रा 27 फरवरी को सागर में आयोजित होगी और 28 फरवरी को छतरपुर जिले में पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि वे किसी दल विशेष से बंधे नहीं हैं, बल्कि जहां दलित, आदिवासी और पिछड़ों की आवाज उठती है, वहां पहुंचना अपना कर्तव्य मानते हैं।

अपने संबोधन के दौरान प्रजापति ने धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा कराए जा रहे गरीब कन्याओं के सामूहिक विवाह कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए उसकी तुलना पुराने समय के डाकुओं से की। उन्होंने कहा कि पहले डाकू भी बड़ी रकम लाकर कुछ बेटियों की शादी करवा देते थे और लोग उन्हें अच्छा कह देते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े स्तर पर दान मिलने के बावजूद सीमित संख्या में शादियां कराई जाती हैं। इस बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रिया की संभावना जताई जा रही है।

करणी सेना और राजगढ़ पैलेस को लेकर भी आरोप

प्रजापति ने अपने भाषण में करणी सेना और राजगढ़ पैलेस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित छत्रसाल महाराज की धरोहर राजगढ़ पैलेस की स्थिति पर सवाल उठाए जाने चाहिए। उनका आरोप था कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के बजाय उन्हें व्यावसायिक उपयोग में बदला जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी संगठन को संघर्ष करना है तो पहले अपने ऐतिहासिक स्थलों और संसाधनों की स्थिति सुधारनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने आरएसएस पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाए।

सीएम हाउस घेराव की कोशिश, पुलिस ने चलाई वाटर कैनन

अंबेडकर जयंती मैदान पर सभा समाप्त होने के बाद कार्यकर्ता सीएम हाउस की ओर बढ़े। प्रकाश तरण-पुष्कर क्षेत्र के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया। पुलिस अधिकारियों द्वारा समझाइश देने के बाद भी जब कार्यकर्ता आगे बढ़ने पर अड़े रहे, तो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

इस दौरान कई कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस वैन में बैठाया गया। कुछ समय तक मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा 17 सूत्रीय ज्ञापन

प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री के नाम 17 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में प्रमुख रूप से ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाया गया। संगठन ने 13 प्रतिशत होल्ड आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू करने और आगामी जातिगत जनगणना में पिछड़ा वर्ग की जातियों के लिए अलग कॉलम बनाए जाने की मांग की।

साथ ही एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लंबित बैकलॉग पदों को विशेष भर्ती अभियान के जरिए भरने और पदोन्नति में आरक्षण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। शिक्षा के क्षेत्र में यूजीसी विनियम 2026 में संशोधन की मांग करते हुए वर्ष 2012 की तर्ज पर सख्त दिशा-निर्देश लागू करने की बात कही गई, ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव खत्म हो सके।

संगठन ने यह भी मांग की कि इक्विटी कमेटी और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन तंत्र में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की कम से कम 50 प्रतिशत भागीदारी अनिवार्य की जाए।

किसानों और एससी-एसटी वर्ग के मुद्दे भी प्रमुख

ज्ञापन में किसानों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों का पारदर्शी सर्वे कर तत्काल मुआवजा देने की मांग की गई। नीमच स्थित धानुका इथेनॉल प्लांट से फैल रहे कथित प्रदूषण की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग रखी गई।

इसके अलावा एससी-एसटी वर्ग को आवंटित जमीनों से अवैध कब्जे हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने और 2 अप्रैल 2018 के आंदोलन तथा गुर्जर सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा विवाद के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की गई।

आंदोलन की चेतावनी

सभा के अंत में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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