MP के राजगढ़ के संपन्न कारोबारी दंपती ने अंधविश्वास में छोड़ी गोद ली मासूम, श्योपुर हाईवे से मिली बच्ची, दंपती गिरफ्तार

नेशनल हाईवे-552 पर लावारिस मिली बच्ची, व्यापार में नुकसान को बताया वजह; गोद लेने की वैधता की भी जांच में जुटी पुलिस
MP के राजगढ़ के संपन्न कारोबारी दंपती ने अंधविश्वास में छोड़ी गोद ली मासूम
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भोपाल। मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले से एक बेहद संवेदनहीन और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां राजगढ़ जिले के एक संपन्न व्यापारी परिवार से जुड़े दंपती ने अंधविश्वास के चलते अपनी गोद ली हुई मासूम बच्ची को नेशनल हाईवे-552 पर छोड़ दिया। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब शनिवार रात सोंईकलां कस्बे के पास राहगीरों ने एक छोटी बच्ची को सड़क किनारे लावारिस हालत में देखा। सूचना मिलते ही मानपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बच्ची को उसके गोद लेने वाले माता-पिता ही जानबूझकर यहां छोड़कर चले गए थे।

हाईवे पर लावारिस मिली मासूम, लोगों की सतर्कता से बची जान

शनिवार देर रात सोंईकलां क्षेत्र के पास नेशनल हाईवे-552 पर एक मासूम बच्ची के लावारिस मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। स्थानीय लोगों ने बच्ची को अकेले देखा तो तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्ची को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और मेडिकल जांच कराई। राहत की बात यह रही कि बच्ची को किसी प्रकार की शारीरिक चोट नहीं आई थी, लेकिन मानसिक और सामाजिक स्तर पर यह घटना बेहद गंभीर मानी जा रही है। पुलिस ने तुरंत मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और आसपास के सीसीटीवी फुटेज व अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई।

पूछताछ में खुला राज: अंधविश्वास में ‘मनहूस’ मानकर छोड़ा बच्ची को

जांच के दौरान पुलिस ने राजगढ़ निवासी आकाश मूंदड़ा और उनकी पत्नी कृतिका मूंदड़ा को हिरासत में लिया। पूछताछ में दंपती ने स्वीकार किया कि उन्होंने बच्ची को गोद लिया था, लेकिन हाल के समय में उनके व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा था। इसी कारण उन्होंने अंधविश्वास के चलते यह मान लिया कि बच्ची के आने के बाद ही उनके जीवन में परेशानियां बढ़ीं। इसी सोच के चलते उन्होंने बच्ची को ‘मनहूस’ मानते हुए श्योपुर लाकर हाईवे पर छोड़ दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें रिमांड पर लिया गया है और आगे की पूछताछ जारी है।

पहले विवाह, तलाक और फिर गोद लेने का फैसला

जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि आकाश मूंदड़ा की पहली शादी गुजरात के अहमदाबाद में हुई थी, जिससे उनका एक बेटा है। करीब नौ साल पहले उनका तलाक हो गया, जिसके बाद बेटा अपनी मां के साथ रहने लगा। इसके बाद आकाश ने मध्यप्रदेश के कुरावर में दूसरी शादी की, लेकिन लंबे समय तक संतान न होने के कारण दंपती ने बच्ची को गोद लिया था। शुरुआती समय में सब कुछ सामान्य था, लेकिन जैसे ही व्यापार में गिरावट आई, उन्होंने इसका कारण बच्ची को मान लिया और यह अमानवीय कदम उठा लिया।

संपन्न परिवार से जुड़ा मामला, कई व्यवसाय और संपत्तियां

मूंदड़ा परिवार राजगढ़ जिले के बड़े व्यापारिक घरानों में गिना जाता है। परिवार के पास कई पेट्रोल पंप और अन्य व्यवसाय हैं। पारिवारिक बंटवारे के बाद आकाश मूंदड़ा के हिस्से में कुरावर और खुजनेर में दो पेट्रोल पंप आए थे। इसके अलावा उनके पास भोपाल के कोहेफिजा क्षेत्र सहित अन्य स्थानों पर भी संपत्तियां होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे संपन्न और शिक्षित परिवार द्वारा इस तरह का कृत्य समाज के लिए एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।

गोद लेने की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल!

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि बच्ची को गोद लेने की प्रक्रिया कानूनी रूप से पूरी की गई थी या नहीं। संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है और बाल संरक्षण से जुड़े विभागों को भी मामले की जानकारी दी गई है। यदि गोद लेने में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।

यह घटना न केवल कानून व्यवस्था बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास और संवेदनहीन सोच को भी उजागर करती है। एक मासूम बच्ची को ‘मनहूस’ मानकर हाईवे पर छोड़ देना न केवल अमानवीय है, बल्कि यह गंभीर आपराधिक कृत्य भी है।

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