
उत्तर प्रदेश: गाजीपुर में एक 17 वर्षीय दलित (विश्वकर्मा समुदाय) किशोरी की कथित रेप और हत्या के मामले ने उत्तर प्रदेश में एक बड़ा सियासी भूचाल ला दिया है। यह घटना ऐसे समय में तूल पकड़ रही है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने के लिए हरदोई का दौरा करने वाले हैं। यह किशोरी 14 अप्रैल की रात को लापता हो गई थी, जिसके बाद 15 अप्रैल को करंडा इलाके के कटारिया गांव में एक पुलिया के पास गंगा नदी से उसका शव बरामद किया गया था। परिजनों ने बलात्कार और हत्या का गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उन्हें एफआईआर दर्ज कराने से रोकने के लिए धमकाया गया था।
दूसरी ओर, पुलिस हर संभव एंगल से इस संवेदनशील मामले की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पानी में डूबने से मौत की बात सामने आई है। इसे मुख्य आरोपी के साथ पिछले संबंधों से जुड़ा संभावित आत्महत्या का मामला भी माना जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है। वाराणसी जोन के अपर पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने गांव का दौरा कर पीड़ित परिजनों से मुलाकात की है। पुलिस का दावा है कि परिवार चल रही जांच से संतुष्ट है और उन्होंने मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराने की मांग की है।
इस घटना के बाद से ही राजनीतिक बयानबाजी और नेताओं के दौरों का सिलसिला तेज हो गया है। 22 अप्रैल को पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे समाजवादी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल पर गांव में पथराव किया गया था। इस हमले में पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल हो गए थे। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस हिंसा के सिलसिले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।
अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 29 अप्रैल को ही पीड़ित परिवार से मिलने वाले हैं, जिस दिन प्रधानमंत्री राज्य के दौरे पर होंगे। इसे देखते हुए प्रशासन ने सभी राजनीतिक दलों से शांति बनाए रखने की अपील की है और चेतावनी दी है कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे प्रकरण पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल कार्रवाई और पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की मांग की है।
राहुल गांधी ने हाथरस, कठुआ, उन्नाव और मणिपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हर बार पीड़ित दलित, पिछड़ा, आदिवासी या गरीब ही होता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधा सवाल किया कि उनके शासन में बेटियां इतनी असुरक्षित क्यों हैं।
राहुल ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जिस देश और राज्य में माता-पिता को अपनी बेटी के लिए एफआईआर दर्ज कराने के लिए गिड़गिड़ाना पड़े, वहां की सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हत्या का मामला दर्ज करने में आनाकानी करना, पीड़ित परिवार को धमकाना और रसूखदारों द्वारा अराजकता फैलाना यह दर्शाता है कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार अपने चरम पर है।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा के शासन में जब भी किसी महिला पर अत्याचार होता है, तो पीड़िता को ही और अधिक प्रताड़ित किया जाता है। उन्नाव, हाथरस और प्रयागराज का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के महिला सशक्तिकरण वाले बयान महज दिखावा हैं, क्योंकि सत्ताधारी दल हमेशा शोषक के साथ खड़ा नजर आता है।
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