भोपाल में SC-ST ओबीसी संयुक्त मोर्चा का महासम्मेलन, सामाजिक न्याय और आरक्षण को लेकर सरकार पर तीखा हमला!

सम्मेलन के दौरान भेल दशहरा मैदान और आसपास के इलाकों में दिनभर भारी भीड़ रही।
भोपाल में SC-ST ओबीसी संयुक्त मोर्चा का महासम्मेलन
भोपाल में SC-ST ओबीसी संयुक्त मोर्चा का महासम्मेलनInternet
Published on

भोपाल। राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में रविवार को अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग संयुक्त मोर्चा का महासम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। सुबह से ही मैदान में लोगों का जुटना शुरू हो गया था और दोपहर तक पूरा इलाका नारों, झंडों और बैनरों से भर गया।

मंच से सामाजिक न्याय, आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों को लेकर सरकार के खिलाफ तीखा तेवर देखने को मिला। नेताओं ने कहा कि आज़ादी के इतने साल बाद भी ओबीसी, एससी और एसटी समाज को शिक्षा, नौकरी, प्रशासन और न्याय व्यवस्था में बराबरी का हक नहीं मिल पा रहा है। संविधान में जो अधिकार इन वर्गों को मिले हैं, वे कागज़ों में तो हैं लेकिन ज़मीनी हकीकत में उनका पूरा लाभ नहीं पहुंच रहा। इसी नाराज़गी और मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम 20 सूत्रीय ज्ञापन सौंपने की घोषणा की गई। संयुक्त मोर्चा ने साफ कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि समानता, सामाजिक न्याय, सम्मान और सही प्रतिनिधित्व की मांग को मजबूती से उठाना है और सरकार का ध्यान लंबे समय से लंबित सामाजिक और आर्थिक मुद्दों की ओर खींचना है।

कथावाचकों की भाषा का विरोध

सम्मेलन में सबसे ज़्यादा चर्चा पूर्व विधायक और संपूर्ण बुंदेलखंड जन जागरण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरडी प्रजापति के भाषण की रही। उन्होंने मंच से कथा वाचकों धीरेंद्र शास्त्री और अनिरुद्ध आचार्य के कथित बयानों का जिक्र करते हुए महिलाओं को लेकर इस्तेमाल की गई भाषा पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि कुछ कथावाचक और धर्मगुरु करोड़ों लोगों की भीड़ जुटाकर महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। 25 साल की लड़कियों, बहन-बेटियों और ‘100 बार बेचने’ जैसी तुलना पर उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा न सिर्फ महिलाओं का अपमान है बल्कि पूरे समाज को शर्मसार करने वाली है। प्रजापति ने सवाल उठाया कि अगर कोई महिला विधवा हो जाए तो क्या उसका सिंदूर और मंगलसूत्र हट जाना उसे ‘खाली प्लॉट’ बना देता है।

उन्होंने कहा कि प्लॉट का मतलब ज़मीन होता है, जिसे बार-बार खरीदा और बेचा जा सकता है, तो क्या समाज अपनी बहन-बेटियों को भी उसी नज़र से देखेगा। मंच से उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी भाषा व्यास पीठ से नहीं दी जानी चाहिए और प्रशासन को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

आरडी प्रजापति ने यह भी कहा कि कुछ कथावाचकों द्वारा यह कहना कि 20–25 साल की लड़कियां कथाओं में जाकर अपनी जवानी ‘उतार कर’ आती हैं, न सिर्फ असंवेदनशील है बल्कि महिलाओं के चरित्र पर सीधा हमला है।

उन्होंने कहा कि यह सोच बताती है कि समाज के एक हिस्से में आज भी महिलाओं को बराबरी का इंसान नहीं बल्कि उपभोग की वस्तु की तरह देखा जाता है। प्रजापति ने प्रधानमंत्री और मौजूदा व्यवस्था पर भी हमला बोलते हुए कहा कि देश में मेहनत करने वाला वर्ग लगातार हाशिए पर जा रहा है, जबकि धर्म और चंदे के सहारे प्रभावशाली बनने वाले लोग मलाई खा रहे हैं।

आदिवासियों के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को आदिवासी समाज के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बताया और कहा कि विकास के नाम पर आदिवासियों को उनके ही जंगल-जमीन से बेदखल किया जा रहा है।

आरक्षण देने की मांग

संयुक्त मोर्चा की मांगों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर मंच से पढ़ा गया। प्रशासन और आरक्षण से जुड़ी मांगों में आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ जारी नोटिस और डोप्ट को भेजा गया प्रस्ताव वापस लेने, ओबीसी को उनकी जनसंख्या के अनुसार 52 प्रतिशत आरक्षण देने, ओबीसी के 13 प्रतिशत रोके गए पद तुरंत खोलने और नियुक्ति पत्र देने तथा ओबीसी, एससी और एसटी के खाली और बैकलॉग पदों को विशेष भर्ती अभियान चलाकर भरने की मांग प्रमुख रही।

नौकरी और पदोन्नति से जुड़ी मांगों में निजी और आउटसोर्स कामों में भी ओबीसी, एससी और एसटी को जनसंख्या के अनुसार आरक्षण देने, सरकारी सेवाओं में ओबीसी को भी एससी-एसटी की तरह पदोन्नति में आरक्षण देने, पुरानी पेंशन योजना दोबारा लागू करने और सफाई कर्मचारियों को ठेके से मुक्त कर नियमित करने की मांग रखी गई।

न्याय व्यवस्था को लेकर संयुक्त मोर्चा ने सिविल जज भर्ती परीक्षा 2022 पर दोबारा विचार करने, आगे सिविल जजों की भर्ती एमपीपीएससी से कराने, जिला अदालतों के कर्मचारियों की भर्ती कर्मचारी चयन आयोग से कराने, हाईकोर्ट जजों में ओबीसी, एससी और एसटी को जनसंख्या के अनुसार भागीदारी देने और कॉलेजियम व्यवस्था खत्म कर राष्ट्रीय न्यायिक आयोग बनाने की मांग की। शिक्षा और छात्रों से जुड़ी मांगों में ओबीसी, एससी और एसटी छात्रों की लंबित छात्रवृत्ति जल्द देने और छात्रावासों की संख्या बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया। संविदा और ठेका व्यवस्था को लेकर 16 दिसंबर 2025 को पास संविदा और आउटसोर्स से जुड़ा कानून रद्द करने, वर्ग-3 और वर्ग-4 के पदों पर स्थायी भर्ती करने और सरकारी ठेकों में ओबीसी, एससी और एसटी ठेकेदारों को एक करोड़ तक के काम में 33 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग रखी गई।

प्रतिनिधित्व और सामाजिक सम्मान के मुद्दे पर मोर्चा ने कहा कि जिलों में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों की पोस्टिंग जनसंख्या के अनुसार होनी चाहिए, आदिवासी सलाहकार परिषद को मज़बूत किया जाए और पेसा कानून को पूरी तरह लागू किया जाए। बाबा साहब अंबेडकर से जुड़ी मांगों में ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाने और बाबा साहब के अपमान से जुड़े मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग शामिल रही। संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने मंच से ऐलान किया कि अगर इन मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो पूरे प्रदेश में आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।

सम्मेलन के दौरान भेल दशहरा मैदान और आसपास के इलाकों में दिनभर भारी भीड़ रही। अलग-अलग जिलों से आए लोगों के कारण सड़कों पर भी चहल-पहल और जाम जैसी स्थिति बनी रही। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस बल तैनात रहा और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त जवान लगाए गए। कुल मिलाकर यह महासम्मेलन सिर्फ एक सभा नहीं, बल्कि ओबीसी, एससी और एसटी समाज के असंतोष, अपेक्षाओं और अधिकारों की आवाज़ बनकर सामने आया, जिसने सरकार के सामने सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए।

भोपाल में SC-ST ओबीसी संयुक्त मोर्चा का महासम्मेलन
MP में कांग्रेस के SC विधायक फूल सिंह बरैया के बयान पर सियासी तूफान: दलित महिलाओं से रेप को लेकर की थी टिप्पणी, जानिए क्या है पूरा मामला?
भोपाल में SC-ST ओबीसी संयुक्त मोर्चा का महासम्मेलन
MP: भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतें: पीड़ितों से मिले राहुल गांधी, सरकार के ‘अर्बन मॉडल’ पर उठाए सवाल
भोपाल में SC-ST ओबीसी संयुक्त मोर्चा का महासम्मेलन
MP उज्जैन में नाबालिग के साथ बर्बरताः प्रेम प्रसंग के शक में निर्वस्त्र कर घुमाया, चार आरोपी गिरफ्तार

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com