"10 हजार की दिहाड़ी, 4 हजार का सिलेंडर... क्या किसी के भड़काने से बहक जाएंगे मजदूर?" पत्रकार सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी पर देशभर में गुस्सा!

16 अप्रैल को लखनऊ के जनचेतना बुकस्टोर पर नोएडा पुलिस ने छापा मारा था। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार सत्यम वर्मा, सुप्रसिद्ध कवियित्री कात्यायनी, कलाकार राम बाबू और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।
जन इतिहासकार प्रो. लाल बहादुर वर्मा के बेटे और यूनीवार्ता के संपादक पत्रकार सत्यम वर्मा को नोएडा पुलिस ने मजदूर आंदोलन से बेहद सतही तरीके से जोड़ते हुए गिरफ्तार कर लिया।
जन इतिहासकार प्रो. लाल बहादुर वर्मा के बेटे और यूनीवार्ता के संपादक पत्रकार सत्यम वर्मा को नोएडा पुलिस ने मजदूर आंदोलन से बेहद सतही तरीके से जोड़ते हुए गिरफ्तार कर लिया। ग्राफिक- आसिफ निसार
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नई दिल्ली- वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक सत्यम वर्मा की नोएडा पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी के खिलाफ अब देशभर के बौद्धिक, पत्रकार, कानूनविद और मानवाधिकार संगठन एकजुट हो गए हैं। 'कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन' ने भी इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया है कि नोएडा में हो रहे मजदूर हिंसा प्रदर्शनों को लेकर सरकार एक व्यापक साजिश के तहत कार्यकर्ताओं, ट्रेड यूनियन नेताओं और पत्रकारों को निशाना बना रही है।

गौरतलब है कि 16 अप्रैल को लखनऊ के जनचेतना बुकस्टोर पर नोएडा पुलिस ने छापा मारा था। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार सत्यम वर्मा, सुप्रसिद्ध कवियित्री कात्यायनी, कलाकार राम बाबू और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने कंप्यूटर, हार्ड ड्राइव, पेन ड्राइव, डायरियां और किताबें जब्त कर लीं। कात्यायनी मधुमेह व थायराइड की मरीज हैं और उन्हें व अन्य को घंटों भूखा-प्यासा रखा गया।

यह शैली सिर्फ 'इमर्जेंसी' जैसी नहीं; 'इमर्जेंसी का भी बाप' है!
उर्मिलेश, वरिष्ठ पत्रकार

एक्टिविस्ट्स कहते हैं कि जन इतिहासकार प्रो. लाल बहादुर वर्मा के बेटे और यूनीवार्ता के संपादक पत्रकार सत्यम वर्मा को नोएडा पुलिस ने मजदूर आंदोलन से बेहद सतही तरीके से जोड़ते हुए गिरफ्तार कर लिया। सत्यम वर्मा को शाम करीब 8 बजे पुलिस एक कार में ले गई, जिसके बाद तीन घंटे तक उनका कोई पता नहीं चला। बाद में उन्हें उनके कमरे की तलाशी के बाद फिर से हिरासत में ले लिया गया। अंदेशा है कि यूपी पुलिस सत्यम वर्मा के कंप्यूटर व हार्ड ड्राइव में फर्जी सबूत प्लांट कर सकती है और उन्हें झूठे मामले में फंसा सकती है।

'कैंपेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन' ने एक बयान जारी कर विशेष तौर पर 'इंकलाबी मजदूर केंद्र' से जुड़े कार्यकर्ताओं - श्यामवीर, अजीत, पिंटू यादव, हरीश, राजू और आकाश - के साथ-साथ समाजसेवी निरंजन लाल की गिरफ्तारी की भी कड़े शब्दों में निंदा की है। संगठन के अनुसार, इन सभी पर दंगा, आगजनी, साजिश और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर झूठे आरोप लगाए गए हैं।

बयान में कहा गया है कि "महिला श्रमिक, जिनमें घरेलू और असंगठित क्षेत्र की मजदूरें भी शामिल हैं, शोषण के खिलाफ आवाज उठा रही थीं। अब उन्हें भी दमन का सामना करना पड़ रहा है।"

वरिष्ठ पत्रकारों ने इस पूरे घटनाक्रम को 'इमरजेंसी का बाप' बताते हुए कहा कि बिना किसी आधिकारिक आपातकाल की घोषणा के, भाजपा-शासित राज्यों में इस तरह का निरंकुश कामकाज हो रहा है। वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने एक सोशल मीडिया पोस्ट पर वर्मा की रिहाई की मांग की. उन्होंने लिखा, " हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक सत्यम वर्मा की गिरफ़्तारी अत्यंत निंदनीय है. यूपी की नोएडा पुलिस ने उन पर अनर्गल आरोप मढें हैं. देश की प्रमुख न्यूज एजेंसी- UNI-यूनीवार्ता में लंबे समय तक काम कर चुके सत्यम वर्मा को अंग्रेजी-हिंदी के श्रेष्ठ अनुवादकों में शुमार किया जाता है.

पर आज के निजाम के मिजाज और शासकीय कामकाज की शैली देखिये! प्रकाशित खबरों के मुताबिक सत्यम वर्मा को पुलिस ने "नोएडा के श्रमिक अशांति प्रकरण" में किसी आधार और साक्ष्य के बगैर 16 अप्रैल को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया.

यह शैली सिर्फ 'इमर्जेंसी' जैसी नहीं; 'इमर्जेंसी का भी बाप' है! क्योंकि इस तरह का निरंकुश शासकीय कामकाज किसी 'इमर्जेंसी' की आधिकारिक घोषणा के बगैर हो रहा है! कमोबेश, सभी भाजपा-शासित प्रदेशों में बहुत बड़े पैमाने पर हो रहा है..

19 अप्रैल को दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में देश के विख्यात वरिष्ठ अधिवक्ता काॅलिन गोंजाल्वेस सहित कई कानूनविदों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सत्यम वर्मा की गिरफ़्तारी को अवैध और असंवैधानिक कदम करार दिया.

वरिष्ठ पत्रकार-लेखक सत्यम वर्मा को अविलंब रिहा कर उन पर थोपे मा"मलों को वापस लेना चाहिए."

जन इतिहासकार प्रो. लाल बहादुर वर्मा के बेटे और यूनीवार्ता के संपादक पत्रकार सत्यम वर्मा को नोएडा पुलिस ने मजदूर आंदोलन से बेहद सतही तरीके से जोड़ते हुए गिरफ्तार कर लिया।
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जन इतिहासकार प्रो. लाल बहादुर वर्मा के बेटे और यूनीवार्ता के संपादक पत्रकार सत्यम वर्मा को नोएडा पुलिस ने मजदूर आंदोलन से बेहद सतही तरीके से जोड़ते हुए गिरफ्तार कर लिया।
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