पटना: बिहार के वरिष्ठ समाजवादी नेता, पूर्व मंत्री और विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष शिवनंदन पासवान की 90वीं जयंती मंगलवार को पटना स्थित विधानसभा के विस्तारित भवन में मनाई गई। इस अवसर पर 'व्याख्यामाला' का आयोजन किया गया और उन पर केंद्रित एक स्मारिका का विमोचन भी हुआ।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने शिवनंदन पासवान के ऐतिहासिक निर्णयों को याद करते हुए इस बात पर चिंता जताई कि ऐसे प्रखर नेता को इतिहास और उनके अपने ही राजनीतिक साथियों ने भुला दिया है।
कर्पूरी ठाकुर को दिया था 'मरणोपरांत न्याय'
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने शिवनंदन पासवान के उस ऐतिहासिक फैसले को याद किया, जब वे विधानसभा के कार्यकारी अध्यक्ष थे। वरिष्ठ पत्रकार हेमंत कुमार और अन्य वक्ताओं ने बताया कि जननायक कर्पूरी ठाकुर को नेता प्रतिपक्ष के पद से विस्थापित कर दिया गया था। लेकिन, शिवनंदन पासवान ने अपने संक्षिप्त कार्यकाल में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए जननायक को मरणोपरांत नेता प्रतिपक्ष के पद पर पुनर्स्थापित किया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने जननायक को तो न्याय दिया, लेकिन इतिहास ने शिवनंदन बाबू के साथ न्याय नहीं किया।
इमरजेंसी में भी नहीं डरे: मंगनी लाल मंडल
कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने की। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने आपातकाल (इमरजेंसी) के दिनों को याद किया। श्री मंडल ने कहा, "इंदिरा गांधी की इमरजेंसी में जब पक्षी भी डरते थे, तब एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में शिवनंदन बाबू ने जिस साहस का परिचय दिया, वह अपने आप में दुर्लभ है।"
उन्होंने कहा कि आज के विपरीत माहौल में उन्हें याद करना पुरानी समाजवादी परंपरा से जुड़ने जैसा है।
सादा जीवन, उच्च विचार के प्रतीक
पूर्व मंत्री और विधान पार्षद अब्दुल बारी सिद्दीकी ने शिवनंदन पासवान को बिहार की समाजवादी परंपरा की जीवंत मिसाल बताया। वहीं, पूर्व विधायक रमाकांत पांडे ने उन्हें 'सादा जीवन, उच्च विचार' का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनकी ईमानदारी आज की राजनीति के लिए एक नजीर है। पूर्व एमएलसी गणेश भारती ने कहा कि हासिए के समाज से आने वाले शिवनंदन बाबू अपने दौर के चमकते सितारे थे।
मीडिया और अकादमी में नैरेटिव तोड़ने की जरूरत
'स्त्री कल' के संपादक संजीव चंदन ने कार्यक्रम में कहा कि आज बिहार में मीडिया और अकादमी जगत में जिस तरह का 'अपर कास्ट नैरेटिव' काम कर रहा है, उसे तोड़ने की जरूरत है और आज की बहुजन राजनीति को यह कार्यभार अपने ऊपर लेना चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान ने कहा कि उनके परिवार द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम स्वागत योग्य है और उन्हें याद करना पुरानी राजनीतिक परंपरा को पुनर्जीवित करने के समान है।
इनकी रही उपस्थिति
इस कार्यक्रम को पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान, विधान पार्षद अब्दुल बारी सिद्दीकी, पूर्व एमएलसी गणेश भारती, पूर्व विधायक रमाकांत पांडे, वरिष्ठ पत्रकार हेमंत कुमार, संजीव चंदन, श्वेता सागर और पंकज आनंद सहित कई लोगों ने संबोधित किया। इस अवसर पर पत्रकार वेदप्रकाश, वीरेंद्र यादव, अरविंद कुमार, मुसाफिर बैठा और कंचनमाला सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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