
नई दिल्ली / बर्लिन — स्वतंत्र पत्रकारिता के क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व वैश्विक मुकाम हासिल करते हुए, भारत के वंचित और हाशिए पर खड़े समुदायों की आवाज बुलंद करने वाले स्वतंत्र मीडिया प्लेटफॉर्म 'द मूकनायक' (The Mooknayak) की फाउंडर और एडिटर-इन-चीफ मीना कोटवाल को जर्मनी में प्रतिष्ठित आरएसएफ (रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स - RSF) बर्लिन फेलोशिप के लिए चुना गया है।
मीना कोटवाल ने 25 जून को शाम 4:22 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपने इस नए करियर अपडेट को साझा किया। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर को स्वतंत्र पत्रकारिता के सशक्तिकरण और वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया है।
इस गौरवपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए चुने जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मीना कोटवाल ने कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी नहीं रुकती और हर नया मील का पत्थर हमें यह याद दिलाता है कि यह पूरी यात्रा कितनी लंबी और कितनी कठिन रही है।
जर्मनी में फेलो के रूप में चुने जाने को एक बड़ा सम्मान बताते हुए उन्होंने आगे कहा कि वह दुनिया भर के उत्कृष्ट पत्रकारों के साथ विचारों के आदान-प्रदान और स्वतंत्र पत्रकारिता की नींव को मजबूत करने के लिए पूरी तरह उत्सुक हैं, ताकि उन लोगों की मदद की जा सके जिनकी आवाजें अक्सर मुख्यधारा में अनसुनी रह जाती हैं।
फेलोशिप पर मीना कोटवाल ने क्या कहा?
"आरएसएफ बर्लिन फेलोशिप के लिए चुना जाना मेरे लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं बढ़कर है। यह द मूकनायक और उन वंचित समुदायों के लिए एक महत्वपूर्ण सम्मान है, जिनकी आवाज़ को हम लगातार सामने लाने का प्रयास करते हैं। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित प्रेस स्वतंत्रता संगठनों में से एक है। यह अवसर मेरे लिए सम्मान के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। इस फेलोशिप के माध्यम से मुझे डिजिटल सुरक्षा, वैश्विक सहयोग और स्वतंत्र पत्रकारिता को मजबूत करने की नई समझ और अनुभव प्राप्त होंगे, जिन्हें मैं भारत लौटकर अपने न्यूज़रूम और पत्रकारिता को और अधिक सशक्त बनाने में उपयोग करूँगी। मेरा विश्वास है कि यह अनुभव हमें हाशिए पर खड़े समुदायों की आवाज़ को और अधिक प्रभावी ढंग से दुनिया तक पहुँचाने में मदद करेगा।"
ऐसे खड़ा किया अपना मीडिया समूह
मीना कोटवाल का यह ऐतिहासिक मुकाम उनके असाधारण और बेहद प्रेरणादायक जीवन संघर्ष का प्रतिफल है। एक ऐसे परिवार में जन्मीं जहां उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर के रूप में कार्य करते थे, उनका पालन-पोषण बेहद सीमित संसाधनों और अभावों के बीच हुआ। समाज की कठोर संरचनात्मक बाधाओं, चुनौतियों और अवसरों की भारी कमी के बावजूद, उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
वह अपने पूरे समुदाय से पत्रकारिता में करियर बनाने वाली और एक स्वतंत्र मीडिया हाउस की स्थापना कर उसका कुशल नेतृत्व करने वाली पहली दलित महिलाओं में से एक बनकर उभरीं। 'द मूकनायक' की नींव रखने से पहले उन्होंने बीबीसी हिंदी (BBC Hindi) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ काम किया था, जहां उन्होंने जाति, लिंग और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर बेबाक और गहन रिपोर्टिंग की थी।
उनके इस जन-सरोकारी और निष्पक्ष कार्य को समय-समय पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना और पहचान मिली है। दुनिया के शीर्ष और सबसे प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स जैसे द न्यूयॉर्क टाइम्स, नीमन रिपोर्ट्स, वॉयस ऑफ अमेरिका, अल जजीरा, डॉयचे वेले और ले फिगारो सहित कई अन्य वैश्विक मंचों पर उनकी प्रोफाइल और उनके संघर्षों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जा चुका है।
इसके अलावा, उन्हें दुनिया के अत्यंत प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, जिनमें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, कोलंबिया यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सांता क्रूज़ शामिल हैं, में विविधता, समावेशन और मीडिया जैसे गंभीर विषयों पर व्याख्यान देने और अपने विचार साझा करने के लिए आमंत्रित किया जा चुका है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके निरंतर और उत्कृष्ट योगदान को कई बड़े पुरस्कारों से भी नवाजा गया है। उन्हें अमेरिका में भारतीय प्रवासियों द्वारा स्थापित प्रतिष्ठित एचआरआरएफ (HRRF) जर्नलिज्म अवार्ड 2022 से सम्मानित किया जा चुका है। इसके साथ ही, विकासात्मक रिपोर्टिंग के क्षेत्र में उनके शानदार काम के लिए उन्हें तीन बार आईआईएमसीए (IIMCA) अवार्ड प्रदान किया गया, जिसमें पहला पुरस्कार वर्ष 2019 में और अन्य दो पुरस्कार वर्ष 2020 में मिले थे। इसके अलावा, उन्हें यूएनएफपीए (UNFPA) और नार्वेजियन दूतावास द्वारा समर्थित दो प्रतिष्ठित 'लाड़ली मीडिया एप्रिसिएशन प्रशस्ति पत्र' भी प्राप्त हुए हैं।
वैश्विक मंचों पर फेलोशिप का उनका अनुभव पहले भी काफी समृद्ध रहा है, जिसमें वे वर्ष 2023 में स्वीडन में ग्लोबल इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स नेटवर्क (GIJN) की फेलो रह चुकी हैं और वर्ष 2024 में सिंगापुर में नेशनल प्रेस फाउंडेशन द्वारा दी जाने वाली इंटरनेशनल ट्रेड जर्नलिज्म फेलोशिप भी सफलतापूर्वक प्राप्त कर चुकी हैं।
वर्तमान में मीना कोटवाल रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की इसी विशेष फेलोशिप के तहत बर्लिन में मौजूद हैं, जहां वे डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी उच्च शिक्षा को आगे बढ़ा रही हैं, महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं, और नई भाषाएं सीख रही हैं ताकि समावेशी पत्रकारिता के इस अभियान को और अधिक धार दी जा सके।
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