13 की उम्र में सिर से उठा माता-पिता का साया, अब लखनऊ की दीप्ति कन्नौजिया ने सिंगापुर में पढ़ाई के लिए जीती फुल स्कॉलरशिप

माता-पिता को खोने के बाद भी लखनऊ की इस बेटी ने नहीं मानी हार, सिंगापुर के प्रतिष्ठित संस्थान में 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए हासिल की फुल स्कॉलरशिप।
Dipti Kannaujiya
13 साल की उम्र में अनाथ हुई लखनऊ की दीप्ति ने हार नहीं मानी और सिंगापुर की फुल स्कॉलरशिप जीतकर मिसाल कायम की।
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उत्तर प्रदेश: करीब दस महीने पहले जब उसने विदेश में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप का फॉर्म भरा था, तो उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि वह इसे जीत लेगी। लेकिन आज लखनऊ की रहने वाली 17 वर्षीय दीप्ति कन्नौजिया की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। दसवीं कक्षा की इस होनहार छात्रा को सिंगापुर के प्रतिष्ठित 'यूनाइटेड वर्ल्ड कॉलेज साउथ ईस्ट एशिया' (UWCSEA) में इंटरनेशनल बैकालॉरिएट (IB) डिप्लोमा प्रोग्राम की पढ़ाई करने का सुनहरा अवसर मिला है।

महज 13 साल की उम्र में अनाथ होने वाली दीप्ति 4 अगस्त को सिंगापुर के लिए उड़ान भरने वाली हैं। यह शानदार स्कॉलरशिप यूनाइटेड वर्ल्ड कॉलेजेज (UWC) मूवमेंट के तहत दी गई है। इसके जरिए दीप्ति अगले दो शैक्षणिक वर्षों तक सिंगापुर में अपनी 11वीं और 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करेंगी। इस खास प्रोग्राम के लिए दुनिया भर से उम्मीदवारों का चयन उनके बेहतरीन शैक्षणिक प्रदर्शन, नेतृत्व क्षमता, मुश्किलों से लड़ने के जज्बे और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की उनकी इच्छा के आधार पर किया जाता है।

दीप्ति की अब तक की यात्रा गहरे व्यक्तिगत नुकसान और अद्भुत साहस की एक प्रेरणादायक कहानी है। वह 'स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन' (SHEF) द्वारा संचालित 'प्रेरणा गर्ल्स स्कूल' की छात्रा हैं। यह स्कूल विशेष रूप से वंचित समुदाय की लड़कियों के लिए एक K-12 संस्थान है। दीप्ति ने बहुत कम उम्र में अपनी मां को एक लंबी बीमारी के कारण खो दिया था। इसके बाद, जब वह महज 13 वर्ष की थीं, तब उनके पिता का भी दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

इतनी कम उम्र में माता-पिता का साया उठ जाने के बावजूद दीप्ति ने जिंदगी से कभी हार नहीं मानी। उसने अपनी पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ स्कूल की अन्य गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वर्तमान में दीप्ति लखनऊ के गोमती नगर इलाके में अपने भाई के साथ एक छोटे से एक कमरे के घर में रहती हैं। पिछले साल अक्टूबर में उन्होंने इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू की थी। इस बेहद प्रतिस्पर्धी और कठिन चयन प्रक्रिया के दौरान उन्हें कई इंटरव्यू और कड़े मूल्यांकन के दौर से गुजरना पड़ा।

अपनी इस शानदार कामयाबी पर दीप्ति का कहना है कि उनके शिक्षकों ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया है। दीप्ति बताती हैं कि जब भी उन्हें अपनी क्षमताओं पर शक होता था, तब उनके गुरुओं ने उन पर अटूट विश्वास जताया। वह मानती हैं कि उनके स्कूल ने न केवल उन्हें बेहतरीन शिक्षा दी है, बल्कि उन्हें यह आत्मविश्वास और हिम्मत भी दी है कि गरीब होना कोई अभिशाप नहीं है।

प्रेरणा गर्ल्स स्कूल की प्रिंसिपल राखी पंजवानी ने दीप्ति के चयन को उसकी कड़ी मेहनत और निरंतर विकास का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि दीप्ति हमेशा से कुछ नया सीखने की चाह रखने वाली एक बेहद साहसी लड़की रही है। एक शिक्षक के तौर पर उसके आत्मविश्वास को बढ़ते हुए देखना उनके लिए भी बेहद खुशी की बात है। प्रिंसिपल पंजवानी का मानना है कि दीप्ति की यह सफलता स्कूल की हर लड़की को यह याद दिलाती है कि कोई भी सपना पहुंच से बाहर नहीं है।

इस अवसर पर SHEF की संस्थापक उर्वशी साहनी ने भी इस बड़ी कामयाबी के पीछे के व्यापक प्रयासों पर अपनी बात रखी। साहनी ने कहा कि दीप्ति की यह सफलता इस बात का एक अद्भुत और जीता-जागता उदाहरण है कि जब लड़कियों को बड़े सपने देखने के लिए सशक्त किया जाता है, तो उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं रह जाता।

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