
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को अपनी शैक्षिक योग्यता सार्वजनिक करने की सीधी चुनौती दी है। उनकी यह तीखी प्रतिक्रिया तब सामने आई जब उनके विदेश में पढ़ाई के खर्च को लेकर एक आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी गई।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में दीपके ने स्पष्ट किया कि वह अपनी शिक्षा से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक बीजेपी कार्यकर्ता ने उनके खिलाफ आरटीआई दाखिल की है, जिस पर वह पूछना चाहते हैं कि क्या उनके नेता अपनी डिग्रियां दिखाएंगे?
माइक्रोब्लॉगिंग साइट 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए दीपके ने लिखा कि वह अपनी स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से जुड़े पत्र दिखाने को तैयार हैं, लेकिन क्या 'बादशाह' अपनी डिग्री दिखाएंगे? उनका यह बयान सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा उनके पिता की वित्तीय संपत्तियों की जांच की मांग के बाद आया है।
ध्यान देने वाली बात है कि दीपके के पिता महाराष्ट्र सरकार के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। आरटीआई में इसी बात पर सवाल उठाया गया था कि उन्होंने अपने बेटे की अमेरिका में पढ़ाई के लिए पैसों का इंतजाम कैसे किया। इसके जवाब में दीपके ने बेबाकी से कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बोस्टन यूनिवर्सिटी से उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी और बाकी खर्चों को पूरा करने के लिए उन्होंने एजुकेशन लोन लिया था। दीपके के मुताबिक, यह लोन अभी भी बकाया है और वह इसे लगातार चुका रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि यह कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है और जो लोग उनकी पढ़ाई के खर्च की जांच करना चाहते हैं, वे इसके लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल करने वाले 30 वर्षीय अभिजीत दीपके इसी साल जून में भारत लौटे हैं। भारत आते ही उन्होंने कथित एनईईटी-यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले को लेकर सीजेपी के आंदोलन का नेतृत्व किया था। इस उग्र विरोध प्रदर्शन का ही असर था कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
अपनी पार्टी के प्रदर्शनों को पड़ोसी देशों के राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ने की कोशिशों को भी दीपके ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए बांग्लादेश और नेपाल के विरोध प्रदर्शनों का सहारा लिया जा रहा है, जबकि उनका आंदोलन बिल्कुल अलग है।
इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि महाराष्ट्र सरकार छात्रों पर दर्ज पुलिस केस वापस लेगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने हमेशा अपनी प्रगतिशील विरासत के जरिए देश का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि किसी भी छात्र को परेशान न किया जाए क्योंकि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है, वे सिर्फ अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे थे।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई), केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और महाराष्ट्र सरकार से लिखित शिकायत की। तिवारी ने न केवल दीपके के पिता की वित्तीय संपत्तियों की जांच की मांग की, बल्कि कॉकरोच जनता पार्टी की कानूनी स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
इसके अलावा, आरटीआई कार्यकर्ता ने पुलिस मुकदमों का सामना कर रहे सीजेपी प्रदर्शनकारियों के लिए वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा घोषित 1 करोड़ रुपये के कानूनी रक्षा कोष पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने अधिकारियों से यह जांच करने का भी आग्रह किया कि क्या इस संगठन को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत किया जाना चाहिए या नहीं।
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