झारखंड हाईकोर्ट ने 'टू-फिंगर टेस्ट' पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध, रेप पीड़िताओं के बच्चों को मिलेगी मुफ्त शिक्षा और स्कॉलरशिप

'टू-फिंगर टेस्ट' पर बैन और पीड़िताओं के बच्चों को IIT-AIIMS जैसी संस्थाओं में स्कॉलरशिप, जानें झारखंड हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक और समाज बदलने वाले फैसले की सभी अहम बातें।
Jharkhand High Court judgement, two-finger test ban
झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! 'टू-फिंगर टेस्ट' पर पूर्ण प्रतिबंध और रेप पीड़िताओं के बच्चों को 12वीं तक मुफ्त शिक्षा व IIT-IIM के लिए मिलेगी स्कॉलरशिप।(Ai Image)
Published on

नई दिल्ली: रेप पीड़िताओं के जीवन और समाज के नजरिए में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से झारखंड हाईकोर्ट ने एक बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को कई कड़े निर्देश दिए हैं, जिनमें अनिवार्य जीरो एफआईआर दर्ज करने से लेकर विवादित 'टू-फिंगर टेस्ट' पर पूरी तरह रोक लगाना शामिल है। इसके साथ ही, दुष्कर्म के कारण पैदा हुए बच्चों को 12वीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा और देश के शीर्ष संस्थानों में प्रवेश पर स्कॉलरशिप देने का भी प्रावधान किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने रेप पीड़िताओं के संरक्षण और पुनर्वास से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान (suo motu) जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने 8 जून को अपनी टिप्पणी में कहा था कि यह बेहद दुखद है कि कई बार पीड़िताओं को ही आरोपी की तरह सामाजिक उपहास का शिकार होना पड़ता है। समाज का यह रवैया उनके और उनके परिवारों के लिए भारी मानसिक और मनोवैज्ञानिक तनाव का कारण बनता है।

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि घटना के बाद पीड़ितों के परिजनों को भी पड़ोसियों के उदासीन रवैये के कारण अपना घर तक छोड़ना पड़ जाता है। इस स्थिति को बदलने के लिए सामाजिक संवेदनशीलता की सख्त जरूरत है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए कोर्ट ने झारखंड सरकार को सभी सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों में 'टू-फिंगर टेस्ट' पर प्रतिबंध लगाने का सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया है। इसका उल्लंघन करने वालों पर पेशेवर कदाचार के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस के रवैये को लेकर भी हाईकोर्ट ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को दुष्कर्म पीड़िताओं के साथ पूरी संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए। पीड़िता का बयान सब-इंस्पेक्टर रैंक से नीचे की महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज नहीं किया जाना चाहिए। बयान दर्ज करते समय पीड़िता पर कोई दबाव नहीं होना चाहिए और पुलिसकर्मियों को ऐसे मामलों से निपटने के लिए उचित प्रशिक्षण तथा नियमित संवेदीकरण कार्यक्रमों से गुजरना होगा।

समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को दुष्कर्म मामलों की प्रारंभिक जांच 15 दिनों के भीतर और पूरी जांच पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी द्वारा सूचना दर्ज किए जाने की तारीख से दो महीने के अंदर पूरी करनी होगी। इसके अलावा, घटना के 24 घंटे के भीतर पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत पीड़िता को शेल्टर होम में प्रवेश और मेडिकल जांच सहित तत्काल देखभाल मिलनी चाहिए। पीड़िताओं को प्रशिक्षित वकीलों द्वारा तुरंत कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है।

झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को बीएनएसएस (BNSS), 2023 की धारा 173 के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। आदेश का पालन न करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, राज्य सरकार को जीरो एफआईआर के कानूनी जनादेश को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुलिसकर्मियों के लिए नियमित कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

बालिकाओं की सुरक्षा के लिए 'समग्र शिक्षा योजना' के तहत 'रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण (RAKSHA)' को भी मजबूत किया गया है। सरकारी स्कूलों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBVs) में छठी से 12वीं कक्षा की छात्राओं को तीन महीने का आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए प्रति स्कूल दी जाने वाली धनराशि को 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। लड़कियों को चाबी का गुच्छा, दुपट्टा, मफलर और पेन जैसी रोजमर्रा की चीजों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है। इसी के तहत अदालत ने राज्य सरकार को हर जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है। ये अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि रेप की घटनाओं से पैदा हुए बच्चों को 12वीं तक मुफ्त शिक्षा मिले। अगर ये मेधावी छात्र आगे चलकर आईआईटी (IITs), एनआईटी (NITs), एम्स (AIIMs) या आईआईएम (IIMs) जैसे प्रमुख संस्थानों में चुने जाते हैं, तो राज्य सरकार उन्हें स्कॉलरशिप भी प्रदान करेगी।

महिला, बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव को न्यायमित्र (Amicus Curiae) द्वारा बताई गई 'वन-स्टॉप सेंटर्स' की सभी कमियों को जल्द से जल्द दूर करने का निर्देश दिया गया है। इन केंद्रों के कामकाज की निगरानी और शिकायतें सुनने के लिए विभाग द्वारा एक महिला-नेतृत्व वाली समिति का गठन किया जाएगा। विभाग को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि महिलाओं के लिए बने शेल्टर होम और पुनर्वास केंद्रों के स्थान और संपर्क विवरण का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

यह पूरा मामला एक महिला द्वारा दायर की गई जनहित याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें रेप पीड़िताओं की सुरक्षा, मुआवजे, जांच में देरी, 'टू-फिंगर टेस्ट' और मीडिया द्वारा पहचान उजागर करने जैसी चिंताएं उठाई गई थीं। अदालत ने इस याचिका के आधार पर 24 सितंबर, 2025 को स्वतः संज्ञान लिया था और महिला को इस मामले में हस्तक्षेपकर्ता के रूप में अदालत की सहायता करने की अनुमति दी गई।

झालसा (JHALSA) की ओर से पेश हुए वकील अतनु बनर्जी ने भी इस जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों पर अपने सुझाव दिए। मामले की सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि रांची में यौन उत्पीड़न की शिकार वयस्क महिलाओं के लंबे समय तक रुकने के लिए 'नारी निकेतन' (शक्ति सदन) को एक प्रभावी शेल्टर होम के रूप में चालू कर दिया गया है। इस पूरे मामले में 2 मई, 2024 से वकील सुमित गाड़ोदिया न्यायमित्र (Amicus Curiae) के रूप में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

Jharkhand High Court judgement, two-finger test ban
"CJP Protest में नहीं जाना": दिल्ली पुलिस की मनमानी; युवती को जिम से उठाकर लगाया 'वर्चुअल हाउस अरेस्ट'
Jharkhand High Court judgement, two-finger test ban
शादी से पहले संबंध अब आम बात, इसे चरित्रहीनता नहीं मान सकते: पुलिस भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला
Jharkhand High Court judgement, two-finger test ban
मणिपुर में भारी जनाक्रोश: 'जनगणना से पहले अपडेट हो 1951 का NRC', इंफाल की सड़कों पर उतरे हजारों लोग

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक की मदद करें

‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.

यहां सपोर्ट करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com