गाजियाबाद: चुनावी कार्यों में लापरवाही पड़ी भारी, 21 BLOs के खिलाफ एफआईआर दर्ज; डीएम ने दी सख्त हिदायत

चुनावी कार्य में ढिलाई पर प्रशासन सख्त: डीएम ने कहा- काम पूरा करने पर वापस हो सकता है मुकदमा, 4 दिसंबर है अभियान की आखिरी तारीख.
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उत्तर प्रदेश: गाजियाबाद जिला प्रशासन ने चुनावी कार्यों में कोताही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार चल रहे मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान में लापरवाही बरतने के आरोप में गुरुवार को 21 बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of People Act) के तहत की गई है।

डीएम ने जताई नाराजगी: 'यह महत्वपूर्ण चुनावी कार्य है'

गाजियाबाद के जिलाधिकारी (DM) रवींद्र कुमार मंदर ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि इन बीएलओ के खिलाफ उनकी लापरवाही को देखते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन्होंने मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा, "हमने 21 बीएलओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है क्योंकि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण चुनावी कार्य था और इसमें पूरा प्रशासनिक तंत्र लगा हुआ है। ऐसे में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।"

धीमी गति से चल रहा है काम: केवल 30% कार्य पूरा

डीएम मंदर ने जिले के आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि गाजियाबाद में कुल 3,089 बूथ हैं और यहां मतदाताओं की संख्या 28 लाख से अधिक है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा अब तक केवल 30 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है, जबकि समय सीमा नजदीक है।

क्या लिखा है एफआईआर में?

दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, डिजिटलीकरण (digitization) के कार्य में लापरवाही बरती जा रही है और चुनाव संबंधी कार्यों में पूरा सहयोग या योगदान नहीं दिया जा रहा है। गौरतलब है कि महीने भर चलने वाला यह विशेष पुनरीक्षण अभियान 4 दिसंबर को समाप्त होने वाला है।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ अधिकारी जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं और अपेक्षित सहयोग प्रदान नहीं कर रहे हैं।

डीएम का संदेश: काम पूरा करें, केस वापस ले लिया जाएगा

हालांकि, जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य दंडात्मक कार्यवाही से ज्यादा काम को समय पर पूरा कराना है। उन्होंने कहा, "हमने सभी बीएलओ को फॉर्म जमा करने के निर्देश दिए थे। इस एफआईआर का मकसद उन्हें सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें काम के प्रति ईमानदारी और गंभीरता सिखाना है। यदि वे अपना काम पूरा कर लेते हैं, तो एफआईआर वापस ले ली जाएगी।"

इसके साथ ही, डीएम ने व्यावहारिक दिक्कतों का जिक्र करते हुए माना कि गाजियाबाद एक औद्योगिक क्षेत्र है और यहां बड़ी संख्या में लोग किराए पर रहते हैं, जिससे कई बार मतदाताओं को ढूंढना और सत्यापित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

पुलिस कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मुकदमा गाजियाबाद के सिहानी गेट पुलिस स्टेशन के एसएचओ (SHO) आलोक कुमार यादव की शिकायत पर दर्ज किया गया है। प्रशासन की इस सख्ती के बाद उम्मीद है कि चुनावी कार्यों में तेजी आएगी।

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