आन्ध्र प्रदेश: ममता और मजबूरी की एक झकझोर देने वाली तस्वीर रविवार को सामने आई। चक्रवात 'अर्नब' की तबाही के कारण मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट चुके एक आदिवासी गांव की 36 वर्षीय महिला को अपनी 11 साल की बीमार बेटी के इलाज के लिए भारी संघर्ष करना पड़ा। बच्ची की जान बचाने की खातिर इस बेबस मां ने उसे अपने कंधों पर उठाया और एस. कोटा (S. Kota) के सरकारी अस्पताल तक का सफर पैदल ही तय किया।
पल्लापू डुंगाडा (Pallapu Dungada) गांव की रहने वाली इस महिला का नाम सुंकारम्मा है। गांव में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और परिवहन का पूरी तरह से अभाव था। अपनी बीमार बेटी सम्पूर्णा के इलाज का कोई अन्य विकल्प न देख, सुंकारम्मा ने पहाड़ी और दुर्गम रास्तों पर 7 किलोमीटर पैदल चलने का साहसिक फैसला लिया। एक हाथ में सामान का थैला और कंधे पर बेटी का बोझ उठाए दर्द से कराहती यह मां अपनी मंजिल तक बिना रुके चलती रही।
लंबी और थका देने वाली इस यात्रा के बाद जब सुंकारम्मा अस्पताल पहुंची, तो वह शारीरिक रूप से बेहद कमजोर और थकी हुई लग रही थी। एस. कोटा सरकारी अस्पताल के प्रशासन ने बिना कोई देरी किए तुरंत बच्ची का इलाज शुरू किया और इस साहसी मां को भी आवश्यक सहारा और देखभाल प्रदान की।
इस घटना के सामने आने के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आया। जिला कलेक्टर एस. रामसुंदर रेड्डी ने एस. कोटा के अधिकारियों को तत्काल इस मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने गांव तक मोटर वाहनों के जाने योग्य पक्की सड़क का संपर्क जल्द से जल्द बहाल करने को कहा है।
अधिकारियों ने कलेक्टर को दी गई अपनी रिपोर्ट में बताया कि चक्रवात अर्नब के प्रभाव से आए बारिश के भारी पानी के कारण सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस बीच, एस. कोटा की विधायक कोल्ला ललिता कुमारी ने भी हालात पर चिंता जताई है।
उन्होंने आश्वासन दिया है कि वह एस. कोटा और कोठावलासा से अपने निर्वाचन क्षेत्र के विभिन्न आदिवासी गांवों तक सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के लिए सरकार से अतिरिक्त फंड की मांग करेंगी, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
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