नई दिल्ली: नागालैंड में स्वदेशी समुदायों की समृद्ध विरासत को सहेजने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राजधानी कोहिमा में 7 मई को 'नागालैंड इंडिजिनस ट्राइब्स कल्चरल रिसोर्स सेंटर' (नागालैंड स्वदेशी जनजाति सांस्कृतिक संसाधन केंद्र) का विधिवत उद्घाटन हुआ। यह पहल राज्य की अनूठी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने, उनका दस्तावेजीकरण करने और उन्हें विश्व स्तर पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए के. कोन्गम कोन्याक ने इस केंद्र को एक दूरदर्शी सोच का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल हमारी पुरानी परंपराओं को बचाने का प्रयास भर नहीं है, बल्कि एक ऐसा जीवंत मंच है जहां सांस्कृतिक प्रथाओं को पोषित कर आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित सौंपा जा सकेगा।
कोन्याक ने इस बात पर खास जोर दिया कि नागालैंड की असली सांस्कृतिक ताकत इसके स्वदेशी समुदायों की विविधता में बसती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, केंद्र में राज्य की सभी 16 आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त जनजातियों की शानदार विरासत को प्रदर्शित करने के लिए अलग-अलग विशेष स्थान बनाए गए हैं।
आने वाले समय में यह नया परिसर प्रदर्शनियों, शोध, ज्ञानार्जन, दस्तावेजीकरण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के एक प्रमुख केंद्र के रूप में काम करेगा। इससे विभिन्न जनजातीय समुदायों के बीच आपसी समझ और एकता को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। इस मौके पर मौजूद बोदेनो एस. कोलो ने संसाधन केंद्र के उद्घाटन को नागालैंड के लोगों की पहचान और उनकी अनमोल परंपराओं का जश्न मनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर करार दिया।
इस महत्वपूर्ण परियोजना की लागत और निर्माण को लेकर काखेली स्वू ने अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस भव्य संसाधन केंद्र को 12.83 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसके निर्माण के लिए 'नॉन-लैप्सेबल सेंट्रल पूल ऑफ रिसोर्सेज' (एनएलसीपीआर) और राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से धन मुहैया कराया है।
उद्घाटन के अवसर पर मौजूद अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि यह केंद्र भविष्य में एक ऐसे प्रमुख ज्ञान केंद्र के रूप में उभरेगा जहां परंपरा और नवाचार एक साथ फल-फूल सकेंगे, जिससे नागालैंड की सांस्कृतिक विरासत युगों-युगों तक जीवंत और सुरक्षित रहेगी।
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