MP: उज्जैन में आदिवासी छात्रावास में बाहरी व्यक्ति की आवाजाही से परेशान छात्राएं पहुंचीं कलेक्टर कार्यालय, सुरक्षा पर उठाए सवाल!

छात्राओं ने सोनू कुशवाहा पर बिना अनुमति छात्रावास में आने, अभद्रता करने और वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के लगाए आरोप; सीसीटीवी कैमरे बंद कराने की भी जताई आशंका, दो-तीन दिन में जांच और समाधान का आश्वासन।
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भोपाल। मध्य प्रदेश के उज्जैन में आदिवासी कन्या महाविद्यालयीन छात्रावास की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। छात्रावास में एक बाहरी व्यक्ति की कथित तौर पर बार-बार आवाजाही और हस्तक्षेप से परेशान करीब 50 छात्राएं सोमवार को दोपहर लगभग 3 बजे सामूहिक शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। छात्राओं ने सोनू कुशवाहा नामक व्यक्ति पर बिना किसी आधिकारिक अनुमति के छात्रावास परिसर में प्रवेश करने, छात्राओं और अधीक्षिका के साथ अभद्र व्यवहार करने तथा उनकी गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

छात्राओं ने कलेक्टर के नाम सौंपे ज्ञापन में कहा कि संबंधित व्यक्ति का छात्रावास की व्यवस्थाओं से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है। इसके बावजूद वह लगभग हर दूसरे-तीसरे दिन छात्रावास परिसर में पहुंचता है। कई बार रात 8 से 9 बजे के बीच भी उसकी आवाजाही रहती है। छात्राओं ने इसे उनकी निजता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए संबंधित व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है।

छात्राओं और वार्डन से अभद्रता का आरोप

छात्रा किरण सूर्यवंशी ने बताया कि सोनू कुशवाहा ने छात्रावास की 4-5 छात्राओं के साथ बदतमीजी की है। उन्होंने अधीक्षिका के साथ भी अभद्र भाषा में बातचीत की। किरण के अनुसार, वार्डन से बातचीत के दौरान संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर कहा, 'तू होती कौन है बोलने वाली।'

छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में रहने वाली लड़कियों की सुरक्षा और अनुशासन की जिम्मेदारी अधीक्षिका की होती है। ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति का बार-बार आना और कर्मचारियों के साथ इस तरह का व्यवहार करना छात्रावास के माहौल को प्रभावित कर रहा है।

वार्डन बोलीं- दिन में 4-5 बार आते हैं, 8 अक्टूबर को की थी शिकायत

छात्रावास की अधीक्षिका प्रीति चंदेल ने बताया कि सोनू कुशवाहा आदिम जाति कल्याण विभाग के संभागीय उपायुक्त के वाहन चालक हैं। छात्रावास से उनका कोई आधिकारिक संबंध नहीं है। इसके बावजूद वे दिन में 4 से 5 बार परिसर में आते हैं। रात के समय भी उनका आना-जाना बना रहता है।

चंदेल के मुताबिक, वे छात्रावास की अधीक्षिका पवित्रा परमार से मिलने के लिए आते हैं और उनके निवास के साथ छात्रावास परिसर में भी पहुंचते हैं। इस संबंध में उन्होंने 8 अक्टूबर को जिला संयोजक और संभागीय उपायुक्त को लिखित शिकायत देकर संबंधित गतिविधियों की जानकारी दी थी।

अधीक्षिका का आरोप है कि बार-बार होने वाले इस हस्तक्षेप से छात्रावास की शासकीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसका असर छात्राओं की पढ़ाई और वहां के वातावरण पर भी पड़ रहा है।

बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों से आने का भी आरोप

छात्राओं ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि सोनू कुशवाहा थार, स्कूटर और अन्य वाहनों से छात्रावास आते हैं। इनमें से कुछ वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं लगी होती। छात्राओं का दावा है कि उनके पास संबंधित वाहनों के फोटो और वीडियो भी मौजूद हैं। उन्होंने इनकी जांच कराने की मांग की है।

इसके अलावा छात्राओं ने आरोप लगाया कि छात्रावास में उनकी गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग कर विभाग के अधिकारियों को भेजी जाती है। पेयजल संकट के दौरान भी संबंधित व्यक्ति द्वारा हस्तक्षेप किए जाने की बात शिकायत में कही गई है।

छात्राओं ने छात्रावास में लगे सीसीटीवी कैमरों को बंद करवाने अथवा हटवाने की आशंका भी जताई है। उन्होंने मांग की है कि छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए और परिसर में आने-जाने वाले बाहरी व्यक्तियों के लिए स्पष्ट नियम लागू किए जाएं।

संयुक्त कलेक्टर बोलीं- सभी आरोपों की होगी जांच

छात्राओं की शिकायत लेने वाली संयुक्त कलेक्टर शिवानी तरेटिया ने बताया कि छात्राओं ने एक व्यक्ति के खिलाफ नामजद शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति निर्धारित नियमों के विपरीत और असमय छात्रावास परिसर में प्रवेश करता है।

छात्राओं ने उसके प्रवेश पर रोक लगाने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। संयुक्त कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं की जांच कराई जाएगी। छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक इंतजाम भी किए जाएंगे। सीसीटीवी कैमरों को हटाने या बंद कराने की आशंका से जुड़े आरोपों की भी जांच होगी।

दो-तीन दिन में समाधान नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री कार्यालय जाएंगी छात्राएं

छात्रा किरण सूर्यवंशी ने बताया कि छात्राएं अपनी समस्याएं सीधे कलेक्टर के सामने रखना चाहती थीं, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद संबंधित अधिकारी ने उनकी शिकायत लेते हुए दो से तीन दिन में समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है।

छात्राओं ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी सुरक्षा और छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे अपनी शिकायत लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक जाएंगी।

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