
भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने डॉक्टरों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में पर्याप्त डॉक्टर और विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण अब सरकार ने इन अस्पतालों के संचालन में निजी क्षेत्र की मदद लेने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रदेश के तीन जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इस प्रस्ताव को इसी साल जून में कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। अब योजना को जमीन पर उतारने के लिए आवश्यक शर्तें और संचालन की लागत निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
अप्रैल 2027 तक शुरू हो सकता है निजी एजेंसियों के हाथों संचालन
योजना के तहत मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉरपोरेशन एक एजेंसी का चयन करेगा। यह एजेंसी सभी 18 अस्पतालों का आकलन कर उनके संचालन पर आने वाली संभावित लागत का निर्धारण करेगी। इसके आधार पर अस्पतालों को PPP मॉडल पर संचालित करने के लिए निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। सबसे कम राशि में अस्पतालों का संचालन करने के लिए तैयार निवेशक या निजी एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
योजना की प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार पूरी हुई तो अप्रैल 2027 तक इन अस्पतालों का संचालन निजी एजेंसियों के हाथों में जा सकता है। इसके लिए पांच वर्ष का अनुबंध किया जाएगा। सरकार इस प्रयोग के परिणामों का आकलन करेगी। यदि व्यवस्था सफल रहती है तो भविष्य में अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को भी चरणबद्ध तरीके से PPP मॉडल पर संचालित करने की योजना बनाई जा सकती है।
रीवा के 8, देवास के 4 और गुना के 6 अस्पताल शामिल
पहले चरण में प्रदेश के तीन जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का चयन किया गया है। इनमें रीवा जिले के आठ, देवास जिले के चार और गुना जिले के छह अस्पताल शामिल हैं। इस व्यवस्था में अस्पतालों की इमारत, चिकित्सा उपकरण, दवाइयां और अन्य बुनियादी संसाधनों का स्वामित्व सरकार के पास ही रहेगा।
हालांकि, अस्पतालों के रोजमर्रा के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को दी जाएगी। निजी एजेंसी अपने स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों, मेडिकल ऑफिसर, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारियों की नियुक्ति करेगी। इसके बदले सरकार संबंधित एजेंसी को निर्धारित राशि का भुगतान करेगी।
सरकारी कर्मचारियों को दूसरी स्वास्थ्य संस्थाओं में किया जाएगा पदस्थ
PPP मॉडल लागू होने के बाद इन 18 अस्पतालों में पहले से कार्यरत सरकारी कर्मचारियों को दूसरी सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में पदस्थ किया जाएगा। कर्मचारियों के स्थानांतरण और योजना के क्रियान्वयन से जुड़े कामों के लिए डायरेक्टर नर्सिंग बीनू कुशवाह को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
बीनू कुशवाह के अनुसार, योजना को लागू करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं का परीक्षण किया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद निविदा आमंत्रित करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव की तैयारी
प्रदेश सरकार का यह कदम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी दूर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निजी एजेंसियां ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में पर्याप्त डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित कर पाती हैं या नहीं। साथ ही मरीजों को सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली सुविधाओं, इलाज की गुणवत्ता और सेवाओं की निरंतरता पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
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