MP: सीहोर के कोसमी गांव में आदिवासियों के 12 मकान तोड़े, फसलें भी नष्ट, नेता प्रतिपक्ष ने कहा- सत्ता की खींचतान में आदिवासी परिवार क्यों उजड़ें?

केंद्रीय कृषि मंत्री ने मुख्य सचिव को फोन कर प्रभावित परिवारों के लिए नए घर और अस्थायी आवास की व्यवस्था करने को कहा; दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग। जीतू पटवारी और उमंग सिंघार ने मोहन यादव सरकार पर साधा निशाना, वन विकास निगम और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष नहीं आया सामने।
MP: सीहोर के कोसमी गांव में आदिवासियों के 12 मकान तोड़े, फसलें भी नष्ट, नेता प्रतिपक्ष ने कहा- सत्ता की खींचतान में आदिवासी परिवार क्यों उजड़ें?
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भोपाल। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में रविवार दोपहर वन विकास निगम की कार्रवाई के बाद कई आदिवासी परिवारों के सामने बेघर होने और आजीविका का संकट खड़ा हो गया। जानकारी के मुताबिक, वन विकास निगम ने रविवार दोपहर करीब 2 बजे बरेला समुदाय के परिवारों के 12 मकान तोड़ दिए। इस दौरान खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचाया गया। वर्षों से गांव में रह रहे परिवारों के घर उजड़ने के बाद उनके सामने रहने और भोजन की व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

घटना की जानकारी मिलने पर केंद्रीय कृषि मंत्री और क्षेत्र के सांसद शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों से मिलने गांव पहुंचे। इस दौरान पीड़ित महिलाएं उनसे मिलकर रोने लगीं। शिवराज ने धरना स्थल पर बैठकर परिवारों की पीड़ा सुनी और अधिकारियों से बातचीत कर राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में जुल्म और अन्याय की इंतिहां हो गई है।

पीड़ितों की पीड़ा सुन भावुक हुए शिवराज, बोले- मेरे क्षेत्र में अन्याय की इंतिहां

प्रभावित परिवारों से मुलाकात के दौरान शिवराज सिंह चौहान भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि जिन घरों में सुबह तक बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब बच्चों की चीखें सुनाई दे रही हैं। महिलाएं छाती पीट-पीटकर रो रही हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के वर्षों पुराने घरों को तोड़ दिया गया, उनकी फसलों को कुचल दिया गया और कुओं तक को भर दिया गया।

शिवराज ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोगों की वर्षों की मेहनत को नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई करने वालों को अपने किए का जवाब देना होगा।

उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को इस तरह बेघर नहीं किया जाना चाहिए। प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा और इस मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने भी उठाया जाएगा।

मुख्य सचिव को फोन, नए मकान और अस्थायी आवास की व्यवस्था के निर्देश

पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए नए घर बनवाने और जब तक स्थायी आवास की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके रहने और खाने का इंतजाम करने को कहा।

शिवराज ने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। उनका कहना था कि गरीब परिवारों को बेघर करने की कार्रवाई की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी कदम उठाने की जरूरत बताई।

मौके पर वन विकास निगम और प्रशासन के किसी बड़े अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर भी उन्होंने नाराजगी जाहिर की। शिवराज ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को फोन कर घटना की जानकारी दी और प्रभावित परिवारों की स्थिति से अवगत कराया।

हालांकि, मुख्य सचिव को फोन किए जाने और राहत के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन खबर लिखे जाने तक प्रभावित परिवारों के लिए नए मकानों और अस्थायी आवास की व्यवस्था को लेकर किसी अंतिम सरकारी आदेश या क्रियान्वयन की पुष्टि उपलब्ध नहीं थी।

पहले भी दिए गए थे घर नहीं तोड़ने के निर्देश

कोसमी गांव शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा और विधानसभा क्षेत्र बुधनी में आता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब एक साल पहले शिवराज ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत कर आदिवासी परिवारों के घर नहीं गिराने के निर्देश दिए थे।

बताया जाता है कि इस मामले में पहले की गई शिकायत के बाद सीहोर के तत्कालीन डीएफओ मगन सिंह डाबर को पद से हटाया गया था। इसके बावजूद रविवार को वन विकास निगम की ओर से मकानों को तोड़ने की कार्रवाई की गई।

घर नहीं तोड़ने के निर्देश से संबंधित शिवराज का बयान वर्ष 2025 का बताया जा रहा है। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि पहले ही इस मामले में हस्तक्षेप किया गया था, तो इसके बावजूद रविवार को कार्रवाई कैसे हुई और संबंधित अधिकारियों ने किन परिस्थितियों में मकानों को तोड़ने का फैसला लिया।

हालांकि, कार्रवाई के आधार, संबंधित जमीन की कानूनी स्थिति और पहले दिए गए निर्देशों के पालन को लेकर वन विकास निगम या प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इन तथ्यों की पुष्टि संबंधित विभागों के पक्ष से होना बाकी है।

वर्षों से रह रहे बरेला समुदाय के परिवारों के सामने आजीविका का संकट

कोसमी गांव में बरेला समुदाय के कई परिवार लंबे समय से रह रहे हैं। रविवार की कार्रवाई में मकान टूटने और फसलें नष्ट होने से इन परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि परिवारों की वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी का आधार भी होते हैं। मकानों के टूटने से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के सामने सुरक्षित आश्रय का संकट पैदा हो गया है। वहीं, फसलों को नुकसान पहुंचने से परिवारों की आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका है।

ऐसे में प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल भोजन, अस्थायी आवास और सुरक्षा की व्यवस्था जरूरी है। इसके साथ ही यह स्पष्ट होना भी आवश्यक है कि कार्रवाई किस आधार पर की गई, परिवारों को पहले कोई नोटिस दिया गया था या नहीं और प्रभावित लोगों को नियमानुसार सुनवाई का अवसर मिला था या नहीं।

इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही कार्रवाई की परिस्थितियों और जिम्मेदारी का स्पष्ट आकलन किया जा सकेगा।

जीतू पटवारी का आरोप- शिवराज के निर्देश के बावजूद हुई कार्रवाई

कोसमी गांव की घटना को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान के पहले से रोकने के निर्देश के बावजूद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने की कार्रवाई हुई।

पटवारी ने इसे भाजपा के मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच टकराव से जोड़ते हुए कहा कि इसकी कीमत गरीब आदिवासी परिवारों को चुकानी पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस आदिवासी अधिकारों की लड़ाई जमीन पर लड़ेगी और राज्य सरकार को इस मामले में जवाब देना होगा। पटवारी के बयान के बाद घटना ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। अब विपक्ष इस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग कर रहा है।

उमंग सिंघार बोले- सत्ता की खींचतान में आदिवासी परिवार क्यों उजड़ें?

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के बीच कथित खींचतान का खामियाजा आदिवासी परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

सिंघार ने सवाल किया कि आखिर आदिवासियों का कसूर क्या है और सत्ता के भीतर कथित खींचतान की सजा गरीब परिवारों को क्यों मिले? उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवारों की फसलें नष्ट की जा रही हैं और उनके सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से इस कार्रवाई पर जवाब देने की मांग करते हुए पूछा कि प्रभावित परिवारों को न्याय और सुरक्षा कब मिलेगी।

कांग्रेस नेताओं के इन बयानों में सरकार के भीतर टकराव के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इस घटना के पीछे किसी राजनीतिक टकराव की भूमिका होने की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। फिलहाल, मुख्य सवाल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, कार्रवाई की वैधानिकता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े हैं।

मामले में वन विकास निगम के अधिकारियों से संपर्क कर कार्रवाई की जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई। प्रशासन की तरफ से भी खबर लिखे जाने तक कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया।

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