मणिपुर में आदिवासी चर्च नेताओं पर जानलेवा हमला: 3 की मौत, सीएम ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में उग्रवादियों के घात लगाकर किए गए हमले में तीन आदिवासी चर्च नेताओं की दर्दनाक मौत। घटना के बाद इलाके में भारी तनाव, संगठनों ने किया 3 दिन के बंद का ऐलान और मुख्यमंत्री ने दिए दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश।
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हत्यासाभार- इंटरनेट/ सांकेतिक फोटो
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नई दिल्ली: मणिपुर के कांगपोकपी जिले में बुधवार, 13 मई 2026 की सुबह संदिग्ध हथियारबंद उग्रवादियों ने आदिवासी चर्च नेताओं के एक दल पर घात लगाकर हमला कर दिया। इस खौफनाक वारदात में तीन नेताओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना तब घटी जब ये नेता चुराचांदपुर में आयोजित एक बैपटिस्ट सम्मेलन से लौट रहे थे।

थाडौ बैपटिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टीबीएआई) और यूनाइटेड बैपटिस्ट काउंसिल (यूबीसी) के सदस्य दो अलग-अलग गाड़ियों में सफर कर रहे थे। सुबह करीब 10 बजे कोटलें और कोटज़िम गांवों के बीच स्थित पहाड़ी 'टाइगर रोड' पर अचानक यह हमला हुआ। यह रास्ता कुकी बहुल चुराचांदपुर और कांगपोकपी जिलों को जोड़ता है।

3 मई 2023 को मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा के बाद से कुकी समुदाय के लोग मैतेई बहुल इंफाल घाटी के छोटे रास्ते से बचने के लिए इसी उबड़-खाबड़ मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं।

हमले में बाल-बाल बचे एक चश्मदीद ने सुरक्षाकर्मियों को बताया कि हमलावर पैदल ही वहां पहुंचे थे। उन्होंने पहाड़ी की ओर से करीब तीन-चार मिनट तक गोलियों की बौछार की और फिर वहां से फरार हो गए। मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी के मुताबिक, ऐसा अंदेशा है कि 8-10 हथियारबंद लोगों ने एके-47 जैसी स्वचालित राइफलों से दोनों वाहनों पर अंधाधुंध फायरिंग की।

इस कायराना हमले में अपनी जान गंवाने वालों में टीबीएआई के अध्यक्ष रेवरेंड वुमथांग सितलहौ, वित्त सचिव रेवरेंड कैगौलुन ल्हौवम और पादरी पाओगौलेन सितलहौ शामिल हैं। टीबीएआई अध्यक्ष ने हाल ही में मणिपुर के अशांत कामजोंग और उखरूल जिलों में कुकी और तांगखुल नागाओं के बीच शांति बहाली के लिए नागालैंड में कुकी ईसाई नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था।

भारतीय सेना द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, सुरक्षा बलों की संयुक्त टीमों ने घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाने में मदद की और इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। घायलों में से तीन को इलाज के लिए इंफाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

एक अन्य व्यक्ति जो भागने में सफल रहा था, उसे बाद में पहाड़ियों से सुरक्षित निकाल लिया गया। इस घटना के विरोध में कई थाडौ, कुकी और ज़ोमी संगठनों ने कांगपोकपी, चुराचांदपुर और अन्य जिलों में तीन दिन के 'पूर्ण बंद' का ऐलान किया है।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री लोसी दिखो, गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम और अन्य विधायकों के साथ अस्पताल जाकर घायलों का हाल जाना।

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार उनके इलाज का पूरा खर्च उठाएगी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि राज्य में शांति बहाल करने के सामूहिक प्रयासों को कमजोर करने वाले ऐसे हमले कतई बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और दोषियों को उनके आकाओं सहित हर हाल में सजा मिलेगी।

इस घटना के तुरंत बाद यूनाइटेड नागा काउंसिल की सेनापति जिला इकाई ने दावा किया कि लेइलोन वैफेई गांव के लोगों ने कोंसाखुल गांव के करीब 20 नागाओं को बंधक बना लिया है। वहीं, नागा बहुल इसी जिले में एक कुकी गांव के अध्यक्ष ने भी पुलिस से गुहार लगाई है कि स्थानीय लोगों द्वारा बंधक बनाए गए 23 कुकी मजदूरों को तुरंत रिहा कराया जाए।

पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस हत्याकांड पर गहरी नाराजगी जताई है। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस घटना की निंदा करते हुए मणिपुर सरकार से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया।

नौ विधायकों वाले मणिपुर के नागा लेजिस्लेचर फोरम ने एक संयुक्त बयान जारी कर शांति की अपील की है और हिरासत में लिए गए सभी कुकी और नागा नागरिकों की रिहाई की मांग की है।

इसके अलावा स्वदेशी जनजातीय नेता मंच (आईटीएलएफ), कुकी ज़ो काउंसिल, थाडौ इनपी मणिपुर और पूर्वोत्तर भारत के यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम (यूसीएफएनईआई) ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। यूसीएफएनईआई के प्रवक्ता एलन ब्रूक्स ने कहा कि इन शांतिप्रिय नेताओं की हत्या एक अमानवीय कृत्य है, जिन्होंने अपना जीवन समाज के आध्यात्मिक उत्थान के लिए समर्पित कर दिया था।

इस हमले के बाद राज्य में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। एनएससीएन (आई-एम), जेडयूएफ, जेडयूएफ (कामसन), अरामबाई तेंगगोल और कुकी नेशनल आर्मी जैसे कई चरमपंथी और कट्टरपंथी समूहों पर इस घटना को अंजाम देने का शक जताया जा रहा है। हालांकि, इन सभी गुटों ने हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया है।

दूसरी तरफ, कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (कोहुर) ने सीधा आरोप लगाया है कि यह हमला एनएससीएन (आई-एम) और जेडयूएफ की मिलीभगत से किया गया एक सुनियोजित आतंकी कृत्य था। ट्रस्ट का कहना है कि मारे गए नेता शांति वार्ता आयोजित करने में अहम भूमिका निभा रहे थे और इसी पहल का जवाब गोलियों से दिया गया है।

फरवरी 2026 से मणिपुर के उखरूल और कामजोंग में कुकी और तांगखुल नागाओं के बीच कई हिंसक झड़पें हो चुकी हैं, जिनमें कई जानें गई हैं और घर जलाए गए हैं। ऐसे में एक नागा संगठन ने अंदेशा जताया है कि शायद कुछ कुकी चरमपंथी गुटों ने मुख्यमंत्री की शांति पहल को नाकाम करने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया हो। मारे गए नेता 15 मई को मुख्यमंत्री के चुराचांदपुर दौरे से पहले उनसे खास मुलाकात करने वाले थे।

इन तमाम थ्योरीज़ के बीच सुरक्षा बलों का यह भी मानना है कि यह गलत पहचान का मामला हो सकता है। एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि हमलावरों को शायद यह नहीं पता था कि गाड़ियों में चर्च के नेता सफर कर रहे हैं। फिलहाल असली हत्यारों की पहचान करने के लिए गहन जांच जारी है।

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