मणिपुर तनाव: भारी बवाल के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच इंफाल अस्पताल से शिफ्ट किए गए तीन घायल कुकी युवक

इंफाल के रिम्स अस्पताल के बाहर उग्र प्रदर्शन के बाद तीनों घायलों को आधी रात में चुराचांदपुर भेजा गया, वहीं दूसरी ओर स्थानीय विधायक ने पुलिस एनकाउंटर पर उठाए गंभीर सवाल।
Imphal RIMS hospital protest
मणिपुर के इम्फाल स्थित RIMS अस्पताल में घायल कुकी युवकों के इलाज पर भारी बवाल। नागा-मैतेई प्रदर्शनकारियों पर दागे गए आंसू गैस के गोले।
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नई दिल्ली: मणिपुर के कांगपोकपी जिले में 15 जून को एक सशस्त्र हमले का शिकार हुए तीन कुकी युवकों को बुधवार, 17 जून की तड़के इंफाल के क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इन घायलों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रात करीब 12:15 बजे इंफाल से लगभग 60 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित चुराचांदपुर मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि इन घायलों में 18 वर्षीय गेनलेनमांग वैफेई और पाोगौलाल चोंगलोई के साथ 20 वर्षीय लुनलियानदाव वैफेई शामिल हैं।

इन युवकों को 15 जून को जब रिम्स में भर्ती कराया गया था, तभी से अस्पताल के बाहर उग्र प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। हालात बेकाबू होने लगे तो सुरक्षा बलों को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा। इसके अगली रात भी प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल पर धावा बोलकर इन तीनों घायलों को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की और गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया।

गौरतलब है कि इन घायल युवकों में कोलकाता के प्रसिद्ध मोहन बागान क्लब के लिए खेल चुका एक फुटबॉलर भी शामिल है।

कुकी संगठनों ने इस पूरी घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा है कि मौजूदा जातीय तनाव को देखते हुए इन युवकों को इंफाल के अस्पताल में भर्ती ही नहीं कराया जाना चाहिए था। आपको बता दें कि इंफाल और घाटी के इलाकों में मैतेई समुदाय बहुसंख्यक है, जबकि चुराचांदपुर और कांगपोकपी जिलों में कुकी-ज़ो समुदाय का दबदबा है। मई 2023 से दोनों समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा में अब तक 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

हमले के बारे में कुकी संगठनों का दावा है कि 15 जून की सुबह करीब 6 बजे लेइलोन वैफेई गांव के पास नागा सशस्त्र समूहों ने फायरिंग की थी। इस हमले में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम (एनएससीएन) और ज़ेलियनग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (जेडयूएफ) के कैमसन गुट के हथियारबंद कैडरों का हाथ बताया जा रहा है। इसी लेइलोन वैफेई गांव से संबंध रखने वाले छह नागा युवकों के शव हाल ही में बरामद किए गए थे। इन नागा युवकों को 13 मई को तीन चर्च नेताओं की हत्या के बाद अगवा किया गया था।

इस बीच, राज्य भर में चरमपंथी ठिकानों को नष्ट करने के लिए सुरक्षा बलों का सघन अभियान भी जारी है। मंगलवार को चुराचांदपुर, कांगपोकपी और उखरुल जिलों में सेना, असम राइफल्स, सीआरपीएफ और मणिपुर पुलिस के संयुक्त अभियान के दौरान एक संदिग्ध उग्रवादी मारा गया। राज्य पुलिस द्वारा 17 जून को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह मुठभेड़ चुराचांदपुर जिले के मोलफेई और सोंगकोंग गांवों के बीच हुई। मौके से एक एके-47 राइफल, भारी मात्रा में गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है।

हालांकि, इस एनकाउंटर पर स्थानीय विधायक लेतजामांग हाओकिप ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मारे गए व्यक्ति की पहचान लेनमिनसांग नामक एक आम नागरिक के रूप में की है। विधायक ने इस घटना को 'फर्जी मुठभेड़' करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की और मामले की स्वतंत्र व न्यायिक जांच की मांग की है।

उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की वकालत करने के साथ ही सुरक्षा बलों से मांग की है कि मृतक का शव उसके परिजनों को सौंपा जाए ताकि वे पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर सकें।

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