मणिपुर में SIR पर रार: कुकी संगठन ने किया कड़ा विरोध, 59 हजार विस्थापितों के हक की उठाई आवाज

मणिपुर में मतदाता सूची के विशेष संशोधन (SIR) का कुकी संगठनों ने किया कड़ा विरोध, 59,000 बेघर कुकी-ज़ो विस्थापितों के लोकतांत्रिक अधिकारों और उनकी भागीदारी की उठाई मांग।
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में, Wall of Remembers के सामने बैठे कुकी-जो समाज के लोग
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में, Wall of Remembers के सामने बैठे कुकी-जो समाज के लोगफोटो- राजन चौधरी, द मूकनायक
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नई दिल्ली: मणिपुर में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) का शीर्ष कुकी संगठन ने कड़ा विरोध किया है। कुकी इन्पी मणिपुर (KIM) का आरोप है कि संघर्ष से बुरी तरह प्रभावित इस राज्य में हो रही इस प्रक्रिया से समुदाय के हजारों आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (IDP) को पूरी तरह बाहर रखा जा रहा है।

संगठन ने स्पष्ट किया है कि सरकार को पहले लगभग 59,000 कुकी-ज़ो विस्थापितों के मुद्दे का स्थायी समाधान करना चाहिए। उनकी प्रमुख मांग है कि इन बेघर लोगों को सुरक्षित उनके घर लौटने और इस महत्वपूर्ण संशोधन प्रक्रिया में हिस्सा लेने में पूरी मदद की जाए।

गुरुवार (4 जून) को जारी एक आधिकारिक बयान में संगठन ने कहा कि आबादी के एक बड़े और बेहद संवेदनशील हिस्से की भागीदारी सुनिश्चित किए बिना ऐसा बड़ा चुनावी कदम उठाना लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के मूल सिद्धांतों को ही कमजोर करता है। उनका साफ तौर पर मानना है कि विस्थापितों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मतदान प्रक्रिया से बाहर रखने से यह कवायद अधूरी और अपने मौजूदा स्वरूप में पूरी तरह अस्वीकार्य हो जाती है।

कुकी इन्पी मणिपुर ने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल और ठोस कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने एक ऐसा सुलभ और समावेशी तंत्र स्थापित करने की मांग की है, जिससे सभी प्रभावित विस्थापितों का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो सके। संगठन ने चेतावनी दी है कि इन जरूरी प्रावधानों के बिना प्रक्रिया को आगे बढ़ाना न केवल अन्यायपूर्ण होगा, बल्कि पूरी कवायद की वैधता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

यह विशेष संशोधन प्रक्रिया कुछ ही दिन पहले मणिपुर के साथ-साथ दो अन्य पूर्वोत्तर राज्यों मिजोरम और सिक्किम में शुरू की गई थी। गौरतलब है कि 3 मई, 2023 को कुकी-ज़ो और मैतेई समुदायों के बीच भड़की भीषण जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। इस भयानक त्रासदी में लगभग 62,000 लोग बेघर हो गए थे, जिसके कारण आज भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं।

इस बीच, राज्य में एक और तनावपूर्ण स्थिति खड़ी हो गई है। दो अन्य कुकी संगठनों ने ऑल नगा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर (ANSAM) द्वारा आयोजित एक मार्च का कड़ा विरोध किया है। यह मार्च उन छह नगा लोगों के परिवारों से मिलने के लिए निकाला जा रहा है, जिन्हें कथित तौर पर 13 मई को सशस्त्र कुकी समूहों ने बंधक बना लिया था।

ANSAM के सदस्यों ने गुरुवार (4 जून) को उखरुल से अपना यह मार्च शुरू किया। इस मार्च का अंतिम लक्ष्य कांगपोकपी जिले में स्थित उन लापता नगाओं का गांव है। एसोसिएशन का कहना है कि यह मार्च अपहृत लोगों के परिवारों के प्रति गहरी एकजुटता दिखाने और अधिकारियों पर उनकी सुरक्षित वापसी के प्रयास तेज करने का दबाव बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

हालांकि, कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन की उखरुल जिला इकाई और कुकी सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशंस वर्किंग कमेटी ने इस मार्च पर कड़ी आपत्ति जताई है। इन संगठनों का तर्क है कि मार्च का तय रास्ता उन कुकी इलाकों से होकर गुजरता है जहां पहले से ही भारी तनाव व्याप्त है, इसलिए मौजूदा संवेदनशील हालात में किसी भी तरह की बड़ी भीड़ का जुटना बिल्कुल भी उचित और सुरक्षित नहीं है।

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