यूपी के देवरिया में चोरी के शक में 14 साल की दलित नाबालिग का बाल पकड़कर घसीटा, पेड़ से बांधकर दी सजा

यूपी के देवरिया में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना। चोरी के झूठे शक में 14 साल की दलित बच्ची को बालों से घसीटकर सरेआम गांव में घुमाया और पेड़ से बांधकर पीटा। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपी दुकानदार को किया गिरफ्तार।
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दलित नाबालिग(सांकेतिक तस्वीर)
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उत्तर प्रदेश: देवरिया जिले से एक बेहद झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ चोरी के झूठे शक में एक 14 वर्षीय दलित किशोरी के साथ अमानवीय व्यवहार की सारी हदें पार कर दी गईं। एक स्थानीय दुकानदार पर आरोप है कि उसने बच्ची को बालों से पकड़ा, पूरे गांव में घुमाया, जातिसूचक गालियां दीं और फिर उसे एक पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा। इस खौफनाक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, यह शर्मनाक वारदात तरकुलवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मिश्रौली गांव की है। यहाँ हरीश गुप्ता नामक एक दुकानदार ने इस कृत्य को अंजाम दिया। सोशल मीडिया पर मारपीट का वीडियो तेजी से फैलने के बाद पुलिस ने हरकत में आते हुए 1 जून को मुख्य आरोपी को धर दबोचा।

वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आरोपी किस तरह उस मासूम बच्ची को अपनी दुकान से चोरी करने के शक में एक पेड़ से बांध रहा है और फिर उसके साथ मारपीट कर रहा है। पीड़िता के परिजनों और गांव वालों का आरोप है कि दुकानदार ने पहले उस बच्ची को बालों से पकड़कर पूरे गांव में घसीटा और उसे सरेआम जलील किया। इसके बाद उसने अपने घर के बाहर लगे नीम के पेड़ से उस नाबालिग को बांध दिया और फिर उस पर अपना कहर बरपाया।

इस दौरान वहां मौजूद किसी राहगीर ने इस पूरी अमानवीय घटना का वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर लिया और उसे इंटरनेट पर डाल दिया। वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया, जिसने पूरे इलाके में भारी आक्रोश पैदा कर दिया। पुलिस ने बताया कि उन्हें 31 मई को आपातकालीन हेल्पलाइन 112 के जरिए इस पूरी घटना की सूचना मिली थी। बिना कोई देरी किए पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को आरोपी के चंगुल से सुरक्षित छुड़ाया।

इस मामले में पुलिस ने आरोपी हरिकेश गुप्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। घटना को लेकर सर्किल ऑफिसर (सीओ) सुनील कुमार रेड्डी ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया।

उन्होंने कहा कि पुलिस को खबर मिली थी कि एक दुकानदार चोरी के शक में एक लड़की से जबरन पूछताछ कर रहा है, जिसके बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों में गुस्सा दिखाई दिया, जहां कई दलित अधिकार समूहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। सूरज कुमार बौद्ध ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि क्या इस देश में दलितों के लिए कोई सरकार, न्यायपालिका, कानून व्यवस्था, बाल अधिकार आयोग या मानवाधिकार आयोग बचा है, या फिर सभी संस्थाएं सिर्फ सवर्णों के लिए ही काम कर रही हैं।

वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता रवि परमार ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने अपनी गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि इस देश में अगर आरोपी सवर्ण समुदाय से हो और पीड़ित दलित हो, तो इसे अपराध माना ही नहीं जाता है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर 'द दलित वॉयस' नामक हैंडल ने भी इस घटना को लेकर गंभीर चिंता जताई। उनकी पोस्ट में लिखा गया कि भारत दलितों के लिए एक कब्रिस्तान में तब्दील होता जा रहा है, जहां यूपी के देवरिया में दिनदहाड़े एक दलित नाबालिग बच्ची को गांव में घुमाया जाता है और पेड़ से बांधकर पीटा जाता है।

उन्होंने इस अहम मुद्दे को न उठाने के लिए मुख्यधारा की मीडिया की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने अपनी पोस्ट में साफ तौर पर लिखा कि आरोपी के सवर्ण हिंदू होने के कारण इस भयानक घटना को मीडिया में कोई कवरेज नहीं दी गई है।

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