जामिया मिल्लिया इस्लामिया को झारखंड की असुर जनजाति पर शोध के लिए ICSSR से मिला 16 लाख रुपये का प्रोजेक्ट

झारखंड के असुर समुदाय के सतत विकास और सशक्तिकरण के रास्ते तलाशेगा जामिया मिल्लिया इस्लामिया, ICSSR ने 16 लाख रुपये के बहुविषयक शोध प्रोजेक्ट को दी मंजूरी।
Jamia Millia Islamia Asur Tribe Jharkhand Research
जामिया मिल्लिया इस्लामिया झारखंड की असुर जनजाति के सतत विकास और डिजिटल समावेशन पर करेगा शोध। ICSSR ने 16 लाख के प्रोजेक्ट को दी मंजूरी।
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नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रबंधन अध्ययन विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज) ने एक बड़ी अकादमिक उपलब्धि हासिल की है। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) ने राष्ट्रीय स्तर की एक कड़ी मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद विभाग को एक बहुविषयक शोध परियोजना सौंपी है। यह अहम प्रोजेक्ट भारत के विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) पर आधारित बहुविषयक अध्ययन (2025-26) के दूसरे चरण के तहत स्वीकृत किया गया है।

इस अध्ययन के लिए परिषद की ओर से 16 लाख रुपये का बजट भी आवंटित किया गया है, जो विभाग के लिए एक बड़े गर्व का विषय है।

यह शोध परियोजना मुख्य रूप से झारखंड के असुर समुदाय पर केंद्रित होगी, जो देश की सबसे कमजोर और संवेदनशील जनजातियों में से एक है। इस अध्ययन का शीर्षक "इंटीग्रेटिंग इंडिजिनस नॉलेज, फॉरेस्ट राइट्स, एंड डिजिटल इनोवेशन फॉर सस्टेनेबल ट्राइबल डेवलपमेंट: ए स्टडी ऑफ द असुर कम्युनिटी ऑफ झारखंड" रखा गया है। इस रिसर्च का मुख्य लक्ष्य असुर जनजाति के लिए सतत विकास के नए और प्रभावी रास्ते तलाशना है।

शोधकर्ताओं की टीम एक विस्तृत ढांचे का उपयोग करते हुए यह समझने का प्रयास करेगी कि स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, वन अधिकारों के सही कार्यान्वयन और डिजिटल समावेशन की मदद से आदिवासी समुदायों की आजीविका को कैसे सुरक्षित किया जा सकता है। इसके अलावा, यह अध्ययन उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और सामुदायिक उद्यमिता को बढ़ावा देने के तरीकों पर भी गहराई से प्रकाश डालेगा।

इस महत्वपूर्ण शोध परियोजना का नेतृत्व प्रबंधन अध्ययन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. तौफीक अहमद सिद्दीकी कर रहे हैं। उनके साथ इस प्रोजेक्ट में सहायक प्रोफेसर डॉ. मो. ओबैदुल ओला और समाज कार्य विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क) के प्रमुख प्रोफेसर रवींद्र रमेश पाटिल भी अपना अहम योगदान दे रहे हैं। प्रबंधन अध्ययन विभाग को इस तरह की सामाजिक शोध परियोजना मिलना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब मैनेजमेंट रिसर्च का दायरा केवल पारंपरिक व्यापारिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।

अब यह समावेशी विकास, सामाजिक नवाचार और सार्वजनिक नीति से जुड़े मुद्दों की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। प्रबंधन के नजरिए से होने वाले इस शोध में हाशिए पर रहने वाले इन समुदायों के लिए शासन तंत्र, संस्थागत प्रभावशीलता और तकनीक-आधारित विकास रणनीतियों पर विशेष जोर दिया जाएगा।

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