
जलपाईगुड़ी/पश्चिम बंगाल: पश्चिमी डुआर्स क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन के हस्तांतरण और वितरण में हो रही भारी धांधली को लेकर आदिवासी समुदाय का सब्र अब जवाब दे गया है। मंगलवार को 'अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद' (ABAVP) के नेतृत्व में आदिवासियों के एक समूह ने जलपाईगुड़ी में जिला भूमि एवं भूमि सुधार अधिकारी (DL&LRO) के कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया।
नागाकाटा ब्लॉक से आए इन प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आदिवासियों के हक की जमीन गैर-आदिवासियों को अवैध रूप से सौंपी जा रही है। साथ ही, जिस जमीन पर वे पीढ़ियों से खेती करते आ रहे थे, उसे चाय बागान प्रबंधन द्वारा छीना जा रहा है।
सड़कों पर उतरा जनसैलाब
मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने शहर के कलेक्ट्रेट एवेन्यू तक एक विशाल रैली निकाली और DL&LRO कार्यालय के बाहर अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के बाद, ABAVP की नागाकाटा ब्लॉक समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा, जिसमें आदिवासी भूमि अधिकारों से जुड़ी कई गंभीर गड़बड़ियों को उजागर किया गया है।
ज्ञापन में दावा किया गया है कि कई मामलों में, जमीन के पट्टे (भूमि का मालिकाना हक) जो वास्तव में आर्थिक रूप से पिछड़े आदिवासियों को मिलने चाहिए थे, वे रसूखदार और संपत्ति वाले गैर-आदिवासियों को आवंटित किए जा रहे हैं।
घर बनाने के पैसे नहीं मिले: पंचम उरांव
परिषद के नागाकाटा ब्लॉक समिति के अध्यक्ष पंचम उरांव ने मामले की गंभीरता को बताते हुए कहा कि सरकार की तरफ से पट्टा मिलने के बाद भी कई आदिवासी परिवार बेघर हैं।
उन्होंने कहा, "धरणीपुर चाय बागान में असली आदिवासी लाभार्थियों को नजरअंदाज कर उन लोगों को जमीन के पट्टे दे दिए गए जिनके पास पहले से काफी संपत्ति है। हमने ऐसे वंचित लोगों की सूची आज (मंगलवार) प्रशासन को सौंप दी है। इसके अलावा, कैरॉन चाय बागान में कुछ आदिवासी परिवारों को काफी पहले पट्टे तो मिल गए, लेकिन राज्य की आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए उन्हें अब तक आर्थिक मदद नहीं मिली है।"
200 साल पुरानी खेती पर संकट
नागाकाटा में ABAVP के सचिव विकास बारला ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि भगतपुर चाय बागान के निवासी पिछले करीब 200 वर्षों से खाली पड़ी जमीन पर अलग-अलग फसलें उगाकर अपना गुजर-बसर कर रहे थे।
बारला ने कहा, "चाय बागानों में मजदूरी बहुत कम है, इसलिए ये परिवार अपनी आजीविका के लिए इस खेती पर ही निर्भर हैं। लेकिन अब चाय बागान प्रबंधन ने उस जमीन पर पौधारोपण शुरू कर दिया है, जिससे इन गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है और उन्हें खेती बंद करने पर मजबूर किया जा रहा है।"
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
विकास बारला ने खैरकाटा इलाके का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वहां भी आदिवासी जमीन को गैर-आदिवासियों के नाम पर अवैध रूप से ट्रांसफर किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा, "अगर प्रशासन ने तुरंत कोई कदम नहीं उठाया, तो हम अपने आंदोलन को और उग्र करेंगे।"
प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
इस मामले पर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (राजस्व) हैरिस रशीद ने भरोसा दिलाया है कि प्रशासन इन मामलों को गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने कहा, "हमें आदिवासी भूमि मामलों में गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं। जांच को जल्द से जल्द पूरा करने के आदेश दे दिए गए हैं। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.