झारखंड: गोड्डा जिले से एक बेहद चौंकाने और शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मिशनरी स्कूल से जुड़े 36 वर्षीय पादरी पर स्कूल में ही रसोइया का काम करने वाली 42 वर्षीय आदिवासी महिला के साथ बलात्कार और कई बार यौन शोषण करने का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने सोमवार को मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। हालांकि, मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
दर्ज की गई प्राथमिकी के अनुसार, पीड़ित महिला और उसका पति इसी साल जून महीने में काम की तलाश में आए थे। आरोपी पादरी ने ही उन दोनों को स्कूल में काम दिया था। जहां महिला को रसोइया के तौर पर रखा गया, वहीं उसके पति को छात्रों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि पादरी ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाया और कई बार उसका यौन उत्पीड़न किया। जब भी महिला ने पादरी की दरिंदगी का विरोध करने की कोशिश की, तो पादरी ने उसे और उसके पति को नौकरी से निकालने की धमकी दी। आरोपी ने यहां तक डराया कि अगर उसने किसी के सामने मुंह खोला, तो उसके बच्चे को भी स्कूल से निकाल दिया जाएगा। एफआईआर में स्पष्ट किया गया है कि ये कथित वारदातें पादरी के कमरे और स्कूल के कार्यालय में अंजाम दी गईं।
अत्याचार का सिलसिला यहीं नहीं रुका। महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि इन घटनाओं के कारण वह गर्भवती हो गई। इसके बाद पादरी ने दबाव डालकर उसे गर्भपात की गोलियां दीं और उसे चुप रहने की हिदायत दी। लेकिन जब उन दवाइयों के कारण महिला की तबीयत बिगड़ने लगी, तो आखिरकार उसने हिम्मत जुटाकर अपने पति को इस पूरी घटना की जानकारी दे दी।
सच्चाई सामने आने के बाद दंपती ने न्याय के लिए झारखंड राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य ममता कुमारी से संपर्क किया, जिसके बाद पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। ममता कुमारी ने इन आरोपों को बेहद गंभीर करार देते हुए मामले की गहन जांच की मांग उठाई है।
इस मामले पर गोड्डा के एसपी मुकेश कुमार ने बताया कि पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, "एक डीएसपी रैंक के अधिकारी को इस जांच का नेतृत्व करने का निर्देश दिया गया है, जिन्होंने सोमवार को घटनास्थल का दौरा भी किया है। पुलिस फिलहाल पीड़िता की मेडिकल जांच सुनिश्चित करवा रही है ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।"
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