
उदयपुर- आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय समन्वय समिति की दो दिवसीय बैठक उदयपुर के गुजराती समाज भवन में संपन्न हुई। त्रिपुरा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, असम,केरल, पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच राष्ट्रीय संयोजक पुलिन बास्की ने रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया कि रांची में संपन्न बैठक के बाद महाराष्ट्र में वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन को लेकर दो लंबी पदयात्राओं का आयोजन किया गया , उड़ीसा में आदिवासियों के अवैध विस्थापन के खिलाफ लड़ते हुए आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच साल मरांडी जेल में गए, डूंगरपुर,उदयपुर राजस्थान में अल्पसंख्यकों पर हमले के खिलाफ आरएसएस का सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया गया, त्रिपुरा में गण शक्ति मुक्ति परिषद द्वारा भाजपा त्रिपुरा सरकार की नीतियों के खिलाफ विशाल रैली का आयोजन किया गया।
रविवार को पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मंच की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेत्री वृंदा करात ने राजस्थान की भाजपा सरकार पर हमला बोला।
वृंदा करात ने कहा कि राजस्थान में डबल इंजन सरकार (भाजपा सरकार) ने आदिवासियों के खिलाफ एक अघोषित युद्ध छेड़ रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार तीन स्तरों पर आदिवासियों के अधिकारों का हनन कर रही है - नौकरियों में आरक्षण के साथ छेड़छाड़, जबरन विस्थापन और निजीकरण।
करात ने कहा, "राजस्थान में भर्ती प्रक्रियाओं में चाहे वह द्वितीय श्रेणी की हो, प्रथम श्रेणी की हो या चतुर्थ श्रेणी की, हर जगह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण नीति की पालना नहीं की जा रही है। सरकार आउटसोर्सिंग और संविदा भर्ती में निजी एजेंसियों के माध्यम से आरक्षण समाप्त कर रही है, जिससे आदिवासी अभ्यर्थी संवैधानिक अधिकार होने के बावजूद नौकरियों से वंचित हो रहे हैं।"
उन्होंने आदिवासी बहुल इलाकों में चल रही विकास परियोजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उदयपुर, डूंगरपुर और बांसवाड़ा में सड़क, बांध और बिजली परियोजनाओं के नाम पर आदिवासियों को बिना मुआवजा और बिना ग्राम सभा की सहमति के जबरदस्ती विस्थापित किया जा रहा है।
करात ने कहा, "हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास का यह मॉडल आदिवासी विरोधी है। बिना वैधानिक प्रक्रिया, बिना पुनर्वास नीति के पुलिस के बल पर लोगों को उनकी जल, जंगल और जमीन से बेदखल किया जा रहा है। " उन्होंने हाल ही में झाड़ोल तहसील के अम्बासा गांव में वन विभाग और पुलिस द्वारा आदिवासी महिलाओं पर कथित हमले और क्रूरता की निंदा करते हुए इसे अमानवीय करार दिया।
आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंत्र सभा अध्यक्ष नेता प्रतिपक्ष त्रिपुरा जितेंद्र चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार का नारा तो "सबका साथ सबका विश्वास सबका विकास" है लेकिन वह वैचारिक नीतिगत निर्णय में आदिवासी दलित पिछड़े वर्गों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि देश की आबादी में आदिवासियों संख्या 8.6% है जबकि केंद्रीय बजट 2026-27 में आदिवासियों के लिए बजट आवंटन मात्र 2.58% है, वही केंद्र सरकार वर्ष 2025 26 में केंद्रीय बजट में आवंटित फंड में से 7000 करोड रुपए का खर्च भी नहीं कर पाई।
उन्होंने कहा कि आदिवासी गरीबों, ग्रामीण आबादी के लिए मनरेगा योजना को खत्म कर दिया गया है, उसकी जगह वी बी राम जी नया अधिनियम बनाया गया, जिसमें 125 दिन रोजगार देने का दावा किया गया है लेकिन बजट आवंटन वर्ष 2026 27 यह बताता है कि सरकार मनरेगा जितना रोजगार भी देने के लिए पैसा नहीं दे रही है, 125 दिन तो दूर की बात है। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष 2 करोड़ रोजगार देने के वादे के साथ सत्ता में आई सरकार का अनुभव यह दिखाता है कि सरकार का दावा कुछ और होता है और हकीकत कुछ और होती है। जल जंगल जमीन अम्बानी अदानी को 50-60 साल के लिए दिए जा रहे हैं । आदिवासी राष्ट्रीय अधिकार मंच मांग करता है कि आरक्षण की नीति का पालन करते हुए सरकारी कार्यालय में खाली पदों को भरे जाए।
आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक पुलिंन बास्किन ने कहा कि भाजपा आदिवासी अधिकारों पर बुलडोजर चलाकर आदिवासियों की पहचान मिटाने में लगी है। उन्होंने कहा कि जनगणना में आदिवासी पहचान को शामिल नहीं किया गया है, जिसके खिलाफ हम संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की आयात निर्यात नीति आदिवासी दलित पिछड़ा और देश विरोधी है! हाल ही में भारत अमेरिका व्यापार समझौते में कपास, सोयाबीन, तेल, फल आदि पर अमेरिका के लिए शून्य टेरिफ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी ब्रिटिश काल से ही स्वाधीनता के लिए साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच किसानों के साथ मिलकर मुक्त व्यापार समझौता से होने वाले नुकसान के खिलाफ संघर्ष करेगा।
आदिवासी जनाधिकार एका मंच, राजस्थान के अध्यक्ष दुलीचंद ने कहा कि अरावली पर्वतमाला को 100 मीटर के परिभाषा के तहत शामिल करना केंद्र सरकार की बड़ी साजिश थी, जिसको प्रतिरोध से फिलहाल विफल कर दिया गया है लेकिन यह परिभाषा राज्य की अरावली पर्वतमाला को खनन माफिया के हवाले करने की एक बहुत बड़ी साजिश थी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड में राज्यों में अडानी अंबानी को जंगल, जमीन कोयला सब सौंपा जा रहा है, इस तरह अरावली को भी 100 मीटर के दायरे के ऊपर मानना एक तरीके से आदिवासियों के जल जंगल जमीन और पहाड़ को पूंजीपतियों को सौंपने का खेल है। उन्होंने कहा कि अरावली केवल पर्वतमाला न हो हमारे राजस्थान की जीवन रेखा का महत्वपूर्ण प्रश्न है, इसलिए आदिवासी जन अधिकार का मंच अरावली क्षेत्र में और अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग करता है और अरावली को संपूर्ण क्षेत्र को सुरक्षित किए जाने की मांग करता है।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.